क्या बसंत पंचमी पर बैद्यनाथ मंदिर में महादेव को बारात लाने का न्योता दिया जाता है?

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क्या बसंत पंचमी पर बैद्यनाथ मंदिर में महादेव को बारात लाने का न्योता दिया जाता है?

सारांश

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में बसंत पंचमी के अवसर पर अनूठी परंपरा का आयोजन होता है। यहाँ महिला भक्त भगवान शिव को बारात का न्योता देती हैं, जो शिवरात्रि तक जारी रहता है। जानें इस विशेष परंपरा के बारे में और कैसे भक्त इसे भक्ति के साथ मनाते हैं।

Key Takeaways

  • बसंत पंचमी पर बैद्यनाथ मंदिर में अनूठी परंपरा का आयोजन होता है।
  • महिला भक्त भगवान शिव को बारात का न्योता देती हैं।
  • यह परंपरा शिवरात्रि तक जारी रहती है।
  • बाबा बैद्यनाथ को मनोकामना शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है।
  • यह परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है।

नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सम्पूर्ण देश में 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की पूजा का त्योहार मनाया जाता है।

जहाँ एक ओर देशभर के भक्त माँ सरस्वती की आराधना में लीन होंगे, वहीं झारखंड के देवघर में बाबा के तिलकोत्सव का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। बसंत पंचमी के दिन, मंदिर में विशेष रूप से महिला भक्त भगवान शिव को बारात का न्योता देती हैं। यह परंपरा शिवरात्रि तक जारी रहती है।

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, बाबा बैद्यनाथ मंदिर अपनी कई विशेषताओं के लिए जाना जाता है। हर साल शिवरात्रि और सावन में यहाँ विशेष अनुष्ठान होते हैं, लेकिन बसंत पंचमी के दिन बाबा की शादी से संबंधित विशेष परंपरा को श्रद्धा और भक्ति से निभाया जाता है। इस दिन बाबा का तिलकोत्सव होता है, जो बाबा की शादी की पहली रस्म होती है। इसमें मिथिलांचल के लोग, जो खुद को माँ पार्वती के पक्ष का मानते हैं, मिष्ठान और फूल-माला लेकर बड़ी संख्या में मंदिर पहुँचते हैं।

पहले बाबा की पूजा की जाती है और फिर उन्हें बेल पत्रों और फूलों से सजाया जाता है। बाबा को तिल और मिष्ठान का भोग लगाकर गर्भगृह में महिलाएं एकत्र होती हैं।

तिलकोत्सव में बाबा पर विशेष रूप से धान की बाली, लड्डू, घी और लाल गुलाल चढ़ाया जाता है। यह परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है और हर साल माघ शुक्ल की पंचमी को इस रस्म को श्रद्धा के साथ निभाया जाता है। पहले संत और ऋषि-मुनि इस परंपरा का पालन करते थे, लेकिन अब आम लोग भी 'तिलकहरु' बनकर बाबा का तिलक करने पहुँचते हैं।

12 ज्योतिर्लिंग में से एक, बाबा बैद्यनाथ को मनोकामना शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, यहाँ माँ सती का हृदय गिरा था, और इसी कारण इसे माँ पार्वती और भगवान शिव का मिलन स्थल माना जाता है। भक्त हर साल लाखों की संख्या में बाबा बैद्यनाथ मंदिर में दर्शन के लिए पहुँचते हैं।

Point of View

हम भारतीय संस्कृति की गहराई और धार्मिक आस्था का अनुभव कर सकते हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक भावनाओं को जगाती है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी संजीवनी देती है।
NationPress
19/01/2026

Frequently Asked Questions

बसंत पंचमी पर क्या विशेष आयोजन होते हैं?
बसंत पंचमी पर बैद्यनाथ मंदिर में विशेष तिलकोत्सव का आयोजन होता है, जहाँ महिला भक्त भगवान शिव को बारात का न्योता देती हैं।
तिलकोत्सव का महत्व क्या है?
तिलकोत्सव बाबा की शादी की पहली रस्म होती है, जिसे श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
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