बस्तर के विकास को नई दिशा: सीएम विष्णु देव साय की पीएम मोदी और अमित शाह से महत्वपूर्ण बैठक
सारांश
Key Takeaways
- बस्तर क्षेत्र के विकास के लिए नई योजनाएँ प्रस्तावित की गई हैं।
- मुख्यमंत्री का रोडमैप बस्तर को आदिवासी-बहुल क्षेत्र के रूप में विकसित करने में सहायक है।
- दिल्ली में बैठकें केंद्र सरकार से फंडिंग प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
- इस यात्रा से बस्तर को आत्मनिर्भर बनाने का सपना साकार हो सकता है।
- केंद्र और राज्य सरकार का समन्वय विकास के लिए आवश्यक है।
रायपुर, ६ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मंगलवार को दिल्ली में कई महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठकें करने वाले हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य बस्तर क्षेत्र के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित करना है, जो अब माओवाद के बाद के युग में प्रवेश कर चुका है।
मुख्यमंत्री साय सोमवार रात करीब ११:३० बजे नई दिल्ली पहुँचेंगे। इसके बाद, ७ अप्रैल को सुबह ११ बजे वे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से और फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे। ये मुलाकातें बस्तर के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं, क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री एक व्यापक रोडमैप और विकास के लिए एक विस्तृत योजना पेश करेंगे। माओवादियों का प्रभाव कम होने के साथ, राज्य सरकार ने ३१ मार्च २०२६ तक वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब सुरक्षा अभियानों के बजाय विकास पहलों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है, ताकि इस आदिवासी-बहुल क्षेत्र को मुख्यधारा में लाया जा सके।
मुख्यमंत्री साय की प्रस्तुति में उम्मीद की जा रही है कि वे इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं, जैसे कि सड़कें, रेलवे और सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, उद्योगों को बढ़ावा देने, नए निवेश आकर्षित करने, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करने और आदिवासी समुदायों के समावेशी विकास की योजनाओं पर विशेष ध्यान देंगे।
इस रणनीति का उद्देश्य बस्तर को प्रगति के एक केंद्र में बदलना है। इसके साथ ही, इसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करना और इसके प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग करना भी महत्वपूर्ण है।
ये बैठकें उस समय हो रही हैं जब छत्तीसगढ़ सरकार ने माओवाद के बाद के दौर में कई विकास कार्यों को प्रारंभ कर दिया है। इनमें अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी की स्थापना, पर्यटन को बढ़ावा देना, खाद्य प्रसंस्करण और लघु वन उपज इकाइयों का विकास करना तथा पुराने सुरक्षा शिविरों को स्कूलों और अस्पतालों जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में बदलना शामिल है।
दिल्ली में होने वाली ये बैठकें बस्तर के कायाकल्प के लिए केंद्र सरकार का समर्थन और फंडिंग प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
केंद्र और राज्य की डबल-इंजन सरकार मिलकर काम कर रही है ताकि सुरक्षा में मिली सफलताओं को इस क्षेत्र के लोगों के लिए ठोस सामाजिक-आर्थिक विकास में बदला जा सके।
मुख्यमंत्री के इस दौरे से विकसित बस्तर की परिकल्पना को एक नई गति मिलने की उम्मीद है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र को आत्मनिर्भर, समृद्ध और पूरी तरह से राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ना है।