बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में पहली बार निष्पक्ष चुनाव: BJP विधायक रुद्रनील घोष का TMC पर तीखा प्रहार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक रुद्रनील घोष ने 1 नवंबर 2026 को टॉलीगंज टेक्नीशियन स्टूडियो, कोलकाता में कहा कि ममता बनर्जी के पूर्ववर्ती शासनकाल में मसल पावर और राजनीतिक दबाव के चलते बंगाली फिल्म इंडस्ट्री पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। वे रविवार को कोलकाता सिने एवं टीवी फ्रीलांस ड्राइवर यूनियन के चुनाव का जायज़ा लेने वहाँ पहुँचे थे, जहाँ उनके साथ BJP नेता पापिया अधिकारी भी मौजूद थीं।
मुख्य घटनाक्रम
रविवार को टॉलीगंज टेक्नीशियन स्टूडियो में 23 ट्रेड यूनियनों के संगठन — यानी गिल्ड — का चुनाव अपने अंतिम दिन में था। कुल 333 उम्मीदवार मैदान में थे और मतदान शनिवार को शुरू होकर रविवार को समाप्त हुआ। घोष ने बताया कि यह चुनाव लोकसभा या विधानसभा की तर्ज पर नहीं, बल्कि ट्रेड यूनियन और लेबर कमीशन के नियमों के तहत हो रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इन 23 गिल्डों के चुनाव के बाद प्रत्येक गिल्ड से 5 सदस्य मुख्य समिति यानी फेडरेशन के गठन के लिए पुनः चुनाव लड़ेंगे या मतदाता बनेंगे। चुनाव प्रक्रिया में पुलिस सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की व्यवस्था की गई।
रुद्रनील घोष की TMC और विपक्ष पर टिप्पणी
रुद्रनील घोष ने कहा, 'ये लोग अपना मॉक कर रहे हैं, मॉक का मतलब मजाक। असली सच्चाई क्या है? यह केवल बंगाल के लोगों को नहीं, दुनिया के लोगों को मालूम है। कौन लोग अशांत परिवेश तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, ये सब देख रहे हैं।' उन्होंने कहा कि बंगाल में कुछ करने की जगह नहीं मिल रही तो विपक्षी दिल्ली जाकर मॉक पार्लियामेंट जैसा मज़ाक कर रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिषेक बनर्जी से जुड़े मामलों पर घोष ने कहा कि उनके खिलाफ कई मामले और शिकायतें अदालत में विचाराधीन हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'अच्छा वकील लगाइए, बस यही बोल सकते हैं हम लोग।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि न्यायाधीशों के खिलाफ अभिषेक बनर्जी और उनकी पार्टी की टिप्पणियाँ अत्यंत दुखदायी रही हैं।
फिल्म इंडस्ट्री पर पुराने शासन का असर
घोष के अनुसार, पूर्व की TMC सरकार के दौरान बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के तकनीशियन, बैंड वाले और अन्य कर्मचारी अपनी इच्छा अनुसार काम नहीं कर सकते थे। उन्होंने कहा कि संविधान और कानून की किताब को दरकिनार कर मसल पावर और राजनीतिक शक्ति का खुलकर उपयोग किया गया, जिससे फिल्म इंडस्ट्री 'ध्वस्त' हो गई।
उन्होंने विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी को धन्यवाद देते हुए कहा कि नई सरकार बनने के बाद से तकनीशियन भाइयों के बीच जो भेदभाव था, वह दूर हुआ है। घोष ने कहा, 'तकनीशियन भाइयों, कलाकारों, निर्माताओं और निर्देशकों — सभी का सम्मान टूट गया था। अब उसे जोड़ने का अवसर मिला है।'
पापिया अधिकारी की आपत्ति
वहीं BJP नेता पापिया अधिकारी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का अवसर ही नहीं दिया गया और उन्हें कार्ड भी नहीं मिला। उन्होंने कहा, 'जो लोग उस समय विरोध कर रहे थे, उन्हीं लोगों को कार्ड दिया गया है — यह ठीक बात नहीं है।' उन्होंने अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती का हवाला देते हुए कहा कि मिथुन दा ने स्वयं कहा है कि सबको काम करना पड़ेगा और सबको साथ लेकर चलना पड़ेगा।
आगे क्या
चुनाव के परिणाम रविवार की शाम मतदान समाप्त होने के बाद आने शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद प्रत्येक गिल्ड से 5 प्रतिनिधि चुनकर फेडरेशन का गठन होगा। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि नई नेतृत्व संरचना बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के तकनीशियनों और कामगारों के अधिकारों को किस हद तक सुनिश्चित करती है।