10 अगस्त 2026
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बैतूल में विजय सेवा न्यास ने 59 बेसहारा बच्चों की फीस भरी, हेमंत खंडेलवाल ने परिवारों को भी दी आर्थिक मदद

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बैतूल में विजय सेवा न्यास ने 59 बेसहारा बच्चों की फीस भरी, हेमंत खंडेलवाल ने परिवारों को भी दी आर्थिक मदद

सारांश

बैतूल में विजय सेवा न्यास ने इस वर्ष 59 बेसहारा बच्चों की जिम्मेदारी उठाई — पिछले साल यह संख्या 41 थी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने फीस, शैक्षणिक सामग्री और परिवारों को आर्थिक मदद देकर यह संदेश दिया कि सेवा सिर्फ स्कूल तक नहीं, रोजगार तक जाएगी।

मुख्य बातें

विजय सेवा न्यास ने बैतूल में 42 बेसहारा परिवारों के 59 बच्चों की स्कूल फीस के चेक संबंधित विद्यालयों को सौंपे।
प्रत्येक बच्चे को शैक्षणिक सामग्री के लिए ₹2,000 अतिरिक्त दिए गए।
बेसहारा बच्चों की देखभाल करने वाले अभिभावकों को ₹20,000 और शासकीय विद्यालयों के बच्चों के परिजनों को ₹10,000 की आर्थिक सहायता दी गई।
वर्ष 2025 में 41 बच्चे लाभार्थी थे, इस वर्ष संख्या बढ़कर 59 हुई।
न्यास शिक्षा पूरी होने के बाद बच्चों के रोजगार और स्वरोजगार की व्यवस्था करने की भी योजना बना रहा है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने 19 जून 2026 को बैतूल के रामकृष्ण बगिया में आयोजित एक कार्यक्रम में घोषणा की कि विजय सेवा न्यास के माध्यम से 42 बेसहारा परिवारों के 59 बच्चों की स्कूल फीस का पूरा खर्च वहन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक बच्चे को शैक्षणिक सामग्री के लिए ₹2,000 अलग से प्रदान किए गए।

कार्यक्रम का विवरण

इस अवसर पर स्कूल फीस के चेक संबंधित विद्यालयों के संचालकों और प्राचार्यों को सौंपे गए। खंडेलवाल ने बताया कि बेसहारा बच्चों की देखभाल कर रहे अभिभावकों को ₹20,000 प्रति परिवार की आर्थिक सहायता दी गई, जबकि शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बेसहारा बच्चों के परिजनों को ₹10,000 की अतिरिक्त आर्थिक मदद प्रदान की गई।

न्यास का उद्देश्य और विस्तार

विजय सेवा न्यास की स्थापना पूर्व सांसद विजय खंडेलवाल की स्मृति में की गई थी। न्यास 'मानव सेवा ही माधव सेवा' के सिद्धांत पर कार्य करते हुए कई वर्षों से बेसहारा बच्चों को सहारा देता आ रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में न्यास ने 41 बच्चों की फीस वहन की थी, जो इस वर्ष बढ़कर 59 हो गई है — यानी एक साल में लाभार्थी बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

शिक्षा के बाद रोजगार की भी योजना

हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि न्यास की जिम्मेदारी केवल बच्चों की शिक्षा तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पूरी होने के बाद इन बच्चों के रोजगार और स्वरोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी योजना है। इसके साथ ही बच्चों की परवरिश कर रहे परिजनों को उनकी योग्यता और क्षमता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास भी किया जा रहा है।

समग्र विकास पर जोर

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि केवल बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके परिवारों को भी आत्मनिर्भर बनाना उतना ही आवश्यक है। विजय सेवा न्यास इसी समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रहा है — शिक्षा, आर्थिक सहायता और भविष्य में रोजगार के अवसर, तीनों मोर्चों पर एक साथ। आने वाले वर्षों में न्यास के लाभार्थियों की संख्या में और वृद्धि की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि शिक्षा पूरी होने के बाद रोजगार का वादा किस हद तक पूरा होता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस तरह की पहलें तब अधिक टिकाऊ होती हैं जब इनके क्रियान्वयन की पारदर्शी निगरानी हो।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजय सेवा न्यास क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?
विजय सेवा न्यास की स्थापना पूर्व सांसद विजय खंडेलवाल की स्मृति में की गई थी। यह न्यास 'मानव सेवा ही माधव सेवा' के सिद्धांत पर कार्य करते हुए कई वर्षों से बैतूल में बेसहारा बच्चों की शिक्षा और उनके परिवारों की आर्थिक मदद करता आ रहा है।
बैतूल कार्यक्रम में कितने बच्चों को लाभ मिला और क्या-क्या दिया गया?
19 जून 2026 को आयोजित कार्यक्रम में 42 बेसहारा परिवारों के 59 बच्चों की स्कूल फीस के चेक संबंधित विद्यालयों को सौंपे गए। इसके अलावा प्रत्येक बच्चे को शैक्षणिक सामग्री के लिए ₹2,000 अतिरिक्त दिए गए।
बेसहारा बच्चों के परिवारों को कितनी आर्थिक सहायता दी गई?
बेसहारा बच्चों की देखभाल करने वाले अभिभावकों को ₹20,000 प्रति परिवार की आर्थिक सहायता दी गई। शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बेसहारा बच्चों के परिजनों को ₹10,000 की अलग से आर्थिक मदद प्रदान की गई।
पिछले साल की तुलना में इस साल लाभार्थियों की संख्या में कितना बदलाव आया?
वर्ष 2025 में विजय सेवा न्यास ने 41 बच्चों की फीस वहन की थी, जो इस वर्ष बढ़कर 59 हो गई है। यानी एक वर्ष में लाभार्थी बच्चों की संख्या में लगभग 44% की वृद्धि हुई है।
शिक्षा के बाद इन बच्चों के भविष्य के लिए क्या योजना है?
हेमंत खंडेलवाल के अनुसार शिक्षा पूरी होने के बाद इन बच्चों के रोजगार और स्वरोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी योजना है। इसके साथ ही बच्चों की परवरिश कर रहे परिजनों को उनकी योग्यता और क्षमता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास भी किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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