क्या भाद्रपद शुक्ल पंचमी पर गुरुवार को रवि योग में शुभ कार्य करना चाहिए?

सारांश
Key Takeaways
- भाद्रपद शुक्ल पंचमी का दिन विशेष है।
- रवि योग में कार्य करने से सफलता मिलती है।
- भगवान विष्णु की पूजा का महत्व है।
नई दिल्ली, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को इस वर्ष गुरुवार का दिन है। इस दिन रवि योग भी उपस्थित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह एक शुभ योग है, जिसमें कोई भी कार्य करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
दृक पंचांग के अनुसार, इस दिन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से लेकर 12:48 बजे तक रहेगा, वहीं राहुकाल 1:58 बजे से 3:35 बजे तक रहेगा।
ज्योतिष के अनुसार, रवि योग तब बनता है जब चंद्रमा का नक्षत्र सूर्य के नक्षत्र से चौथे, छठे, नौवें, दसवें या तेरहवें स्थान पर होता है। यह योग निवेश, यात्रा, शिक्षा और व्यवसाय जैसे कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल होता है। इस दिन किए गए कार्यों में सफलता और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
अग्नि पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने काशी में शिवलिंग की स्थापना की थी, जिससे गुरुवार को भगवान बृहस्पति की पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि गुरुवार का व्रत धन, समृद्धि, संतान और सुख-शांति प्रदान करता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनना और पीले फल व फूलों का दान करना शुभ होता है।
गुरुवार का व्रत आरंभ करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल से शुद्ध करें। एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें। भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। केले के वृक्ष की जड़ में चने की दाल, गुड़ और मुनक्का चढ़ाएं। दीपक जलाकर भगवान बृहस्पति की कथा सुनें और आरती करें। आरती के बाद आचमन करें। इस दिन पीले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
मान्यता है कि केले के पत्ते में भगवान विष्णु का वास होता है, इसलिए इसकी पूजा विशेष फल देती है। भगवान विष्णु को हल्दी चढ़ाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गरीबों को अन्न और धन का दान करने से पुण्य मिलता है। यह व्रत शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से शुरू कर 16 गुरुवार तक रखा जा सकता है, फिर इसका उद्यापन किया जाता है।