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भागलपुर में खुशबू और स्वास्थ्य का संगम: सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं का अरोमाथेरेपी गुलाल

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भागलपुर में खुशबू और स्वास्थ्य का संगम: सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं का अरोमाथेरेपी गुलाल

सारांश

भागलपुर में होली के इस खास अवसर पर, सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाएं प्राकृतिक रंगों और सुगंध वाले गुलाल का निर्माण कर रही हैं। यह न केवल रंगों में खुशबू का समावेश करता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।

मुख्य बातें

अरोमाथेरेपी गुलाल का निर्माण प्राकृतिक सुगंधों से किया गया है।
महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
यह पहल पर्यावरण के अनुकूल है।
गुलाल बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित है।
महानंदी संस्था का उद्देश्य 'वेस्ट-टू-वेल्थ' मॉडल पर काम करना है।

भागलपुर, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के भागलपुर में होली के पर्व पर एक विशेष अरोमाथेरेपी आधारित गुलाल का निर्माण किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह (सेल्फ हेल्प ग्रुप) से जुड़ी महिलाएं प्राकृतिक सुगंध और त्वचा के अनुकूल रंगों का उपयोग कर रही हैं, जिससे होली के रंगों में खुशबू और सेहत का अद्भुत मेल देखने को मिल रहा है।

इस पहल का उद्देश्य न केवल त्योहार को सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाना है, बल्कि महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न करना है।

महानंदी संस्था की संचालिका प्रिया सोनी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि इस साल बाजार में जो गुलाल पेश किया जा रहा है, उसमें गुलाब, लैवेंडर, चंदन और केवड़ा जैसे फूलों की प्राकृतिक सुगंध का समावेश किया गया है। यह गुलाल रसायन-मुक्त है और खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों की त्वचा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

उनका यह भी कहना है कि त्योहार की हलचल के बीच यह सुगंधित गुलाल लोगों को सुकून और ताजगी का अनुभव देगा।

प्रिया ने बताया कि संस्था का लक्ष्य ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ मॉडल पर काम करना है। मंदिरों के बाहर इकट्ठे होने वाले फूलों को रिसाइकल करके उपयोगी उत्पादों में बदला जाता है। यह संस्था महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करती है और हजारों महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और मंदिरों के आस-पास रहने वाली महिलाओं को इससे रोजगार मिल रहा है। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं स्वयं गुलाल तैयार करती हैं और उसकी मार्केटिंग भी करती हैं।

महानंदी संस्था से जुड़ी निशा देवी ने कहा कि पहले उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन संस्था से जुड़ने के बाद उनकी आय का एक स्थायी स्रोत बन गया है। वहीं, प्रियतम देवी ने कहा कि पहले वह केवल गृहिणी थीं, लेकिन अब आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान कर रही हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह महिलाओं के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम भी बन रहा है। इसे देखते हुए, यह न केवल एक सामाजिक बदलाव का संकेत है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण का भी प्रतीक है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरोमाथेरेपी गुलाल क्या है?
अरोमाथेरेपी गुलाल प्राकृतिक सुगंधों और रंगों का उपयोग कर बनाया गया है, जो त्वचा के लिए सुरक्षित है।
यह गुलाल बच्चों के लिए सुरक्षित है?
हाँ, यह गुलाल खासकर बच्चों और बुजुर्गों की त्वचा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
महिलाओं को इस पहल से क्या लाभ मिल रहा है?
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के अवसर और रोजगार मिल रहा है।
इस गुलाल में कौन-कौन सी सुगंधें हैं?
इस गुलाल में गुलाब, लैवेंडर, चंदन और केवड़ा जैसी प्राकृतिक सुगंधें शामिल हैं।
यह गुलाल पर्यावरण के लिए कितना सुरक्षित है?
यह गुलाल रसायन-मुक्त होने के कारण पर्यावरण के लिए सुरक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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