15 अक्टूबर 2026
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भगवंत मान के फ्रांस दौरे की मंजूरी रद्द: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र से माँगा जवाब

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भगवंत मान के फ्रांस दौरे की मंजूरी रद्द: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र से माँगा जवाब

सारांश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के पेरिस फूड मेले के दौरे की मंजूरी MEA ने बिना कारण बताए रद्द कर दी — यह दूसरी बार है जब केंद्र ने उनकी फ्रांस यात्रा रोकी। हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब माँगा है। यह मामला केंद्र-राज्य संघीय संबंधों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

मुख्य बातें

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार से मुख्यमंत्री भगवंत मान के फ्रांस दौरे की मंजूरी रद्द करने पर जवाब माँगा।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने ऑनलाइन आवेदन को बिना कोई कारण बताए 'अस्वीकृत' कर दिया था।
प्रतिनिधिमंडल 15 से 21 अक्टूबर के बीच पेरिस के अंतरराष्ट्रीय फूड मेले में मार्कफेड उत्पादों को प्रचारित करने जाने वाला था।
दौरे का सारा खर्च मार्कफेड वहन करने वाला था; एपीडा ने स्टॉल भी आवंटित कर दिया था।
जुलाई 2024 में भी पेरिस ओलंपिक के दौरान मान की फ्रांस यात्रा को केंद्र ने मंजूरी नहीं दी थी।
पंजाब सरकार ने केंद्र के इनकार को संघीय ढाँचे का उल्लंघन बताया है।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के फ्रांस दौरे की राजनीतिक मंजूरी रद्द किए जाने के मामले में केंद्र सरकार से जवाब माँगा है। यह याचिका पंजाब सरकार ने दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि विदेश मंत्रालय (MEA) ने बिना कोई स्पष्ट कारण बताए ऑनलाइन आवेदन को 'अस्वीकृत' कर दिया। यह विवाद केंद्र और पंजाब के बीच संघीय ढाँचे को लेकर जारी तनाव का नया अध्याय बन गया है।

दौरे का उद्देश्य और तैयारियाँ

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल 15 से 21 अक्टूबर के बीच पेरिस में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय फूड मेले में शामिल होने वाला था। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और प्रधान सचिव रवि भगत भी शामिल थे।

दौरे का प्रमुख उद्देश्य मार्कफेड के उत्पादों को वैश्विक बाज़ार में प्रचारित करना और पंजाब के किसानों के लिए नए व्यापारिक अवसर तलाशना था। पंजाब सरकार के अनुसार, एपीडा (कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) ने पहले ही मेले में स्टॉल आवंटित कर दिया था और दौरे का समस्त खर्च मार्कफेड द्वारा वहन किया जाना था।

पंजाब सरकार के तर्क

पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में दलील दी कि दौरे की सभी तैयारियाँ पूर्ण हो चुकी थीं और केंद्र सरकार का यह इनकार संघीय ढाँचे का उल्लंघन है। सरकार का कहना है कि MEA के पोर्टल पर आवेदन को महज 'अस्वीकृत' दर्शाया गया, जबकि अस्वीकृति का कोई विशेष कारण नहीं बताया गया।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भगवंत मान की विदेश यात्रा को केंद्र की मंजूरी नहीं मिली। जुलाई 2024 में भी पेरिस ओलंपिक के दौरान भारतीय हॉकी टीम को समर्थन देने के लिए फ्रांस जाने की उनकी योजना को केंद्र सरकार ने अनुमति नहीं दी थी। यह ऐसे समय में आया है जब आम आदमी पार्टी (AAP) शासित राज्य और केंद्र सरकार के बीच कई मुद्दों पर टकराव जारी है।

केंद्र-राज्य संघर्ष का संदर्भ

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, किसी राज्य के मुख्यमंत्री के विदेश दौरे के लिए केंद्र की राजनीतिक मंजूरी लेना संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि बिना कारण बताए अस्वीकृति लोकतांत्रिक पारदर्शिता के सिद्धांतों के विरुद्ध है। यह मामला इस दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है कि इससे राज्य सरकारों की विदेश नीति संबंधी स्वायत्तता की सीमाएँ तय होंगी।

अगली सुनवाई और प्रक्रिया

हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद अब केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा। अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की बहस फिर से शुरू होगी। पंजाब सरकार ने यह भी बताया कि प्रतिनिधिमंडल को फ्रांस के अलावा इटली भी जाना था, और 15 अक्टूबर को फ्रांस के लिए रवाना होने की योजना थी। केंद्र के जवाब के बाद यह स्पष्ट होगा कि मंजूरी रद्द करने के पीछे कोई नीतिगत कारण था अथवा यह राजनीतिक निर्णय था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एक पैटर्न की ओर संकेत करता है। असली प्रश्न यह है कि MEA के पास राजनीतिक मंजूरी अस्वीकार करने के लिए क्या मानदंड हैं और क्या वे पारदर्शी रूप से लागू होते हैं — विपक्ष-शासित राज्यों के साथ भी उतनी ही समानता से जितनी सत्तारूढ़ दल के मुख्यमंत्रियों के साथ। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप इस प्रक्रियागत अपारदर्शिता पर न्यायिक रोशनी डालने का अवसर है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब हाईकोर्ट ने भगवंत मान के फ्रांस दौरे पर क्यों नोटिस जारी किया?
पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब माँगा, क्योंकि MEA ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के फ्रांस दौरे की राजनीतिक मंजूरी बिना कोई कारण बताए रद्द कर दी थी। पंजाब सरकार ने इसे संघीय ढाँचे का उल्लंघन बताया है।
भगवंत मान के फ्रांस दौरे का उद्देश्य क्या था?
यह दौरा 15 से 21 अक्टूबर 2026 के बीच पेरिस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फूड मेले में शामिल होने के लिए था। इसका मकसद मार्कफेड उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना और पंजाब के किसानों के लिए नए व्यापारिक अवसर तलाशना था।
क्या पहले भी भगवंत मान की विदेश यात्रा रोकी गई थी?
हाँ, जुलाई 2024 में भी पेरिस ओलंपिक के दौरान भारतीय हॉकी टीम को समर्थन देने के लिए फ्रांस जाने की मान की योजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी थी। यह दूसरा मौका है जब उनकी फ्रांस यात्रा को अस्वीकृत किया गया।
फ्रांस दौरे का खर्च कौन उठाने वाला था?
पंजाब सरकार के अनुसार, इस दौरे का समस्त खर्च मार्कफेड द्वारा वहन किया जाना था, न कि सरकारी खजाने से। इसके अलावा एपीडा ने पेरिस के फूड मेले में स्टॉल भी पहले ही आवंटित कर दिया था।
इस मामले में आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा। अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएँगी और अदालत यह तय करेगी कि MEA द्वारा बिना कारण बताए मंजूरी रद्द करना उचित था या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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