पंजाब BJP अध्यक्ष ढिल्लों और कैप्टन अमरिंदर के बीच दूरी पर CM भगवंत मान का बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार, 30 मई को चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों हमेशा से पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते रहे हैं, लेकिन अब दोनों नेताओं के रास्ते अलग होते दिख रहे हैं। मान ने कहा कि इस बदलाव के कारण केवल वे दोनों ही जानते हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री मान उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ढिल्लों को पार्टी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने से खुद को अलग करते हुए स्पष्ट किया था कि इस फैसले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। मान ने याद दिलाया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ढिल्लों का समर्थन तब किया था जब उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में संगरूर सीट से चुनाव लड़ा था। दोनों के बीच मौजूदा शीतलता को मुख्यमंत्री ने 'रहस्य' करार दिया।
भाजपा की चुनावी स्थिति पर तीखा हमला
मान ने BJP की राज्य में गिरती साख पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हालिया चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी BJP से अधिक सीटें हासिल की हैं और पंजाब की जनता ने BJP को पाँचवें स्थान पर धकेल दिया है। मान के अनुसार यह परिणाम जनता द्वारा BJP के नकारात्मक एजेंडे को स्पष्ट रूप से नकारने का प्रमाण है।
आगामी विधानसभा चुनावों पर AAP का दावा
राज्य के भावी राजनीतिक परिदृश्य पर भगवंत मान ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और BJP दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान के लिए आपस में होड़ करेंगी, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) जनता के समर्थन से सरकार बनाएगी।
नगर निगम चुनावों पर विपक्ष के आरोपों का जवाब
मान ने कहा कि नगर निगम चुनावों में करारी हार से स्तब्ध विपक्षी दल अब उन चुनावों पर सवाल उठा रहे हैं, जिन्हें उन्होंने राज्य में अब तक के सबसे शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों ने ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया और वे प्रशंसा के पात्र हैं। विपक्ष अपनी 'अपमानजनक हार' को पचा नहीं पा रहा और इसीलिए शोर मचा रहा है।
क्या होगा आगे
BJP में ढिल्लों की नियुक्ति और कैप्टन अमरिंदर सिंह के उससे किनारा करने की घटना पंजाब BJP की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े करती है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी नगर निगम चुनावों में पहले से ही कमज़ोर प्रदर्शन से उबरने की कोशिश कर रही है। आने वाले हफ्तों में BJP का आंतरिक नेतृत्व इस दरार को कैसे संभालता है, यह पंजाब की राजनीति की दिशा तय करेगा।