दिल्ली एयरपोर्ट पर 2 घंटे रोका, ₹50,000 का चालान: पंजाब CM भगवंत मान का विधानसभा में बड़ा आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 23 अक्टूबर 2026 को पंजाब विधानसभा में दावा किया कि फ्रांस दौरे से लौटने पर दिल्ली इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अधिकारियों ने उन्हें कथित तौर पर दो घंटे तक रोके रखा और उनसे ₹50,000 का मनमाना चालान भरवाने की कोशिश की गई। मान के अनुसार, सामान की जाँच में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, फिर भी उन्हें परेशान किया गया।
फ्रांस दौरे की पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री मान ने विधानसभा को बताया कि पंजाब में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए उन्हें जापान, कोरिया और जर्मनी समेत कई देशों से निमंत्रण मिलते रहे हैं और इन यात्राओं से राज्य को निवेश के रूप में ठोस लाभ मिला है।
उन्होंने बताया कि फ्रांस में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फूड फेयर आयोजित हो रहा था, जिसमें विश्वभर की प्रमुख कंपनियाँ भाग ले रही थीं। पंजाब की सरकारी संस्था मार्कफेड के ब्रांड 'सोहना' का भी वहाँ स्टॉल लगाया गया था। मान के मुताबिक, इस मेले में भारत के लगभग 150 स्टॉल मौजूद थे और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने उन्हें आमंत्रित किया था।
केंद्र की अनुमति न मिलने पर हाई कोर्ट का दरवाज़ा
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस विदेश यात्रा के लिए केंद्र सरकार ने शुरुआत में अनुमति देने से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'मुझे केंद्र सरकार से अनुमति नहीं मिली, इसलिए मुझे हाई कोर्ट जाना पड़ा। हाई कोर्ट ने मुझे आवश्यक प्रोटोकॉल देने का निर्देश दिया।'
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और आम आदमी पार्टी (AAP) शासित राज्यों के बीच विभिन्न प्रशासनिक विषयों को लेकर लगातार तनाव देखा जा रहा है।
दिल्ली एयरपोर्ट पर कथित रोक और चालान का आरोप
मान के अनुसार, फ्रांस से लौटते समय दिल्ली हवाई अड्डे पर उन्हें दो घंटे तक बैठाकर रखा गया। उन्होंने बताया, 'मेरे सामान की जाँच की गई और उसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला। इसके बावजूद दो घंटे बाद मुझे जाने के लिए कहा गया।'
कथित तौर पर अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उन पर 'ऊपर से दबाव' है। मान ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनसे 'कुछ न कुछ' छोड़कर जाने को कहा और ₹50,000 का चालान भरने की माँग की।
मुख्य चुनाव आयुक्त के भाई पर आरोप
मुख्यमंत्री मान ने विधानसभा में यह भी दावा किया कि दिल्ली एयरपोर्ट के कस्टम विभाग के प्रमुख मनीष हैं, जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के भाई हैं। मान ने इसे राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ बदले की भावना से की जा रही कार्रवाई का हिस्सा बताया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के भीतर से भी यह संकेत मिले हैं कि फैसले एकतरफा लिए जाते हैं और परामर्श की प्रक्रिया का पालन नहीं होता। गौरतलब है कि ये गंभीर आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के समय तक उपलब्ध नहीं है।
एनएसए और व्यापक राजनीतिक पैटर्न का आरोप
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत एक छात्रा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया। उन्होंने इसे विरोधियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के एक व्यापक पैटर्न का हिस्सा करार दिया।
केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मामला संसदीय और न्यायिक दोनों मंचों पर और तूल पकड़ सकता है।