क्या भारत ने ईरान से एमटी वेलियंट रोर मामले में 'हिरासत में लिए गए 16 भारतीयों को कांसुलर एक्सेस देने' की मांग की?

Click to start listening
क्या भारत ने ईरान से एमटी वेलियंट रोर मामले में 'हिरासत में लिए गए 16 भारतीयों को कांसुलर एक्सेस देने' की मांग की?

सारांश

भारत ने ईरान में हिरासत में लिए गए 16 भारतीय चालक दल सदस्यों के लिए कांसुलर एक्सेस की मांग की है। यह मामला द्विपक्षीय संबंधों और कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। जानिए इस मामले की विस्तृत जानकारी और भारतीय दूतावास की कार्रवाई।

Key Takeaways

  1. भारत ने कांसुलर एक्सेस की मांग की है।
  2. ईरान पर तस्करी का आरोप है।
  3. दूतावास ने क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं।

नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एमटी वेलियंट रोर जहाज मामले को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी किया है, जिसमें 16 भारतीय चालक दल सदस्यों की हिरासत का मुद्दा उठाया गया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को पुष्टि की थी कि भारत सरकार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है और चालक दल की रिहाई के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रही है।

शनिवार को जारी बयान से स्पष्ट है कि भारतीय दूतावास ईरानी अधिकारियों के साथ संपर्क में है, कांसुलर एक्सेस की मांग की गई है, और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भोजन, पानी और कानूनी सहायता प्रदान की जा रही है।

यह जहाज दिसंबर 2025 में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में रोका गया था। इसमें 16 भारतीय चालक दल सदस्य सवार हैं। ईरान ने जहाज पर 6,000 मीट्रिक टन ईंधन की तस्करी का आरोप लगाया है।

दूतावास ने सिलसिलेवार तरीके से सारी कहानी बताई है। एमईए ने एक्स पर बयान जारी किया जो तीन अहम बिंदुओं पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि दिसंबर 2025 के मध्य में, मिशन को ईरानी अधिकारियों द्वारा जहाज एमटी वेलियंट रोर को कब्जे में लेने के बारे में बताया गया, जिसमें 16 भारतीय क्रू-मेंबर सवार थे। बंदर अब्बास में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने तुरंत (14 दिसंबर को) ईरान सरकार को पत्र लिखकर क्रू तक कांसुलर एक्सेस देने का अनुरोध किया।

राजनयिक पत्राचार और बंदर अब्बास और तेहरान में व्यक्तिगत मुलाकातों के माध्यम से कई बार मांग दोहराई गई है। राजदूत स्तर पर भी अनुरोध शामिल है। ईरानी अधिकारियों से यह भी अनुरोध किया गया कि वे क्रू को भारत में उनके परिवारों से बात करने की अनुमति दें।

इसमें आगे लिखा है- वाणिज्य दूतावास ने 15 दिसंबर को जहाज के मालिक यूएई-स्थित कंपनी से भी संपर्क स्थापित किया, और बाद में कंपनी के ईरान-स्थित एजेंटों के संपर्क में रहा, ताकि कंपनी पर जहाज के लिए भोजन, पानी और ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करने और ईरानी अदालतों में क्रू के लिए कानूनी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करने का दबाव डाला जा सके। जहाज से भोजन और पानी के स्टॉक कम होने की सूचना मिलने पर, मिशन ने जनवरी की शुरुआत में भोजन और पानी की आपातकालीन आपूर्ति की व्यवस्था करने के लिए ईरानी नौसेना के जरिए मदद पहुंचाई। दुबई में भारतीय वाणिज्य दूतावास भी जहाज कंपनी पर कानूनी प्रतिनिधित्व और जहाज को नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दबाव डाल रहा है।

अंत में लिखा गया है कि उम्मीद है कि यह मामला ईरान में न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा। फिर भी, मिशन और वाणिज्य दूतावास ईरानी अधिकारियों पर क्रू को जल्द से जल्द कांसुलर एक्सेस देने और न्यायिक कार्यवाही को तेजी से पूरा करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।

Point of View

यह मामला न केवल भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का प्रश्न है, बल्कि यह हमारे देश की कूटनीतिक क्षमता और विदेश नीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। हमें उम्मीद है कि सरकार इस मामले में उचित कदम उठाएगी और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करेगी।
NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

भारत ने ईरान से कांसुलर एक्सेस क्यों मांगा?
क्योंकि 16 भारतीय चालक दल सदस्य हिरासत में हैं और उनके अधिकारों की रक्षा करना महत्वपूर्ण है।
ईरान ने जहाज पर क्या आरोप लगाया है?
ईरान ने जहाज पर 6,000 मीट्रिक टन ईंधन की तस्करी का आरोप लगाया है।
भारत सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
भारत सरकार ईरानी अधिकारियों से संपर्क में है और चालक दल की रिहाई के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रही है।
Nation Press