भारत ऑप्टेल की स्वदेशी 'गरुड़' दूरबीन लॉन्च: रक्षा तकनीक अब आम नागरिकों के लिए
सारांश
मुख्य बातें
भारत ऑप्टेल लिमिटेड ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के डीपीएसयू भवन में स्वदेशी 'गरुड़' उच्च-रिज़ॉल्यूशन दूरबीन का अनावरण किया — वही प्रकाशीय तकनीक जो अब तक भारतीय सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की सेवा में थी, अब आम नागरिकों के हाथों में होगी। रक्षा उत्पादन विभाग के अधीन मिनी रत्न श्रेणी-1 की यह कंपनी इस लॉन्च के साथ पहली बार नागरिक उपभोक्ता बाज़ार में उतरी है।
क्या है 'गरुड़' और कैसे काम करती है यह दूरबीन
देहरादून स्थित आयुध निर्माणी में पूर्णतः स्वदेशी डिज़ाइन और निर्माण से तैयार 'गरुड़' में 8 गुना आवर्धन क्षमता है, जो दूर की वस्तुओं को स्पष्ट और करीब दिखाती है। इसका 7.6 डिग्री का व्यापक दृश्य क्षेत्र एक साथ बड़े भूभाग को देखने की सुविधा देता है। उपयोगकर्ता की अलग-अलग दृष्टि के अनुसार ±5 डायोप्टर समायोजन की सुविधा इसे व्यक्तिगत ज़रूरतों के अनुकूल बनाती है।
लंबे समय तक उपयोग में आँखों को थकान से बचाने के लिए मुलायम आईकप लगाए गए हैं। दूरबीन का वज़न करीब 610 ग्राम है और इसकी कॉम्पैक्ट संरचना इसे यात्रा और मैदानी गतिविधियों के लिए सुविधाजनक बनाती है। मज़बूत पकड़ और मौसम-अनुकूल बाहरी ढाँचा इसे विभिन्न परिस्थितियों में उपयोगी बनाता है।
किन लोगों के लिए है यह दूरबीन
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 'गरुड़' को मुख्य रूप से बाहरी गतिविधियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। पक्षी-अवलोकन के शौकीन, वन्यजीव प्रेमी, प्रकृति अन्वेषक, यात्री, खिलाड़ी, वन-कर्मी और समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोग इसका उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा सुरक्षा-संबंधी नागरिक कार्यों में भी यह उपयोगी बताई जा रही है।
गौरतलब है कि इसी तकनीक पर आधारित उपकरण भारतीय सशस्त्र बल और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कठिन परिचालन परिस्थितियों में लंबे समय से उपयोग करते रहे हैं। यह पहली बार है कि इस कोटि की सैन्य-ग्रेड प्रकाशीय तकनीक आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराई जा रही है।
भारत ऑप्टेल की विरासत और नागरिक बाज़ार में प्रवेश
भारत ऑप्टेल के पास सटीक प्रकाशीय उपकरण बनाने का 1943 से अनुभव है। कंपनी ने इसी दशकों पुरानी विशेषज्ञता को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर 'गरुड़' विकसित किया है। यह लॉन्च कंपनी के लिए एक रणनीतिक मोड़ है — रक्षा और सुरक्षा बलों की आपूर्तिकर्ता से आगे बढ़कर नागरिक उपभोक्ता बाज़ार में पहली बार कदम रखना।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत रक्षा क्षेत्र की स्वदेशी तकनीक को व्यापक नागरिक उपयोग तक पहुँचाने पर ज़ोर दे रही है।
लॉन्च समारोह और उपस्थित अधिकारी
'गरुड़' का शुभारंभ रक्षा उत्पादन विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. गरिमा भगत की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम में रक्षा उत्पादन विभाग, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और वन्यजीव क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस विविध उपस्थिति से स्पष्ट है कि 'गरुड़' को केवल रक्षा नहीं, बल्कि खेल, पर्यावरण और नागरिक सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में प्रासंगिक माना जा रहा है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत ऑप्टेल इस उत्पाद की मूल्य निर्धारण और वितरण रणनीति कैसे तय करती है, ताकि यह तकनीक वास्तव में आम नागरिकों तक पहुँच सके।