13 अगस्त 2026
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भारत ऑप्टेल की स्वदेशी 'गरुड़' दूरबीन लॉन्च: रक्षा तकनीक अब आम नागरिकों के लिए

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भारत ऑप्टेल की स्वदेशी 'गरुड़' दूरबीन लॉन्च: रक्षा तकनीक अब आम नागरिकों के लिए

सारांश

भारत ऑप्टेल ने 1943 से सशस्त्र बलों को प्रकाशीय उपकरण देने के बाद पहली बार नागरिक बाज़ार में कदम रखा है। 'गरुड़' दूरबीन उसी सैन्य-ग्रेड तकनीक को पक्षी-प्रेमियों, वन्यजीव अन्वेषकों और यात्रियों तक पहुँचाती है — आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ठोस कदम।

मुख्य बातें

भारत ऑप्टेल लिमिटेड ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में स्वदेशी 'गरुड़' दूरबीन नागरिक बाज़ार के लिए लॉन्च की।
दूरबीन में 8 गुना आवर्धन , 7.6 डिग्री दृश्य क्षेत्र और ±5 डायोप्टर समायोजन की सुविधा है।
वज़न करीब 610 ग्राम ; मौसम-अनुकूल और कॉम्पैक्ट डिज़ाइन बाहरी गतिविधियों के लिए उपयुक्त।
वही तकनीक जो भारतीय सशस्त्र बल और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कठिन परिस्थितियों में उपयोग करते हैं।
भारत ऑप्टेल का प्रकाशीय उपकरण निर्माण में 1943 से अनुभव; मिनी रत्न श्रेणी-1 कंपनी।
लॉन्च समारोह की अध्यक्षता रक्षा उत्पादन विभाग की संयुक्त सचिव डॉ.

भारत ऑप्टेल लिमिटेड ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के डीपीएसयू भवन में स्वदेशी 'गरुड़' उच्च-रिज़ॉल्यूशन दूरबीन का अनावरण किया — वही प्रकाशीय तकनीक जो अब तक भारतीय सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की सेवा में थी, अब आम नागरिकों के हाथों में होगी। रक्षा उत्पादन विभाग के अधीन मिनी रत्न श्रेणी-1 की यह कंपनी इस लॉन्च के साथ पहली बार नागरिक उपभोक्ता बाज़ार में उतरी है।

क्या है 'गरुड़' और कैसे काम करती है यह दूरबीन

देहरादून स्थित आयुध निर्माणी में पूर्णतः स्वदेशी डिज़ाइन और निर्माण से तैयार 'गरुड़' में 8 गुना आवर्धन क्षमता है, जो दूर की वस्तुओं को स्पष्ट और करीब दिखाती है। इसका 7.6 डिग्री का व्यापक दृश्य क्षेत्र एक साथ बड़े भूभाग को देखने की सुविधा देता है। उपयोगकर्ता की अलग-अलग दृष्टि के अनुसार ±5 डायोप्टर समायोजन की सुविधा इसे व्यक्तिगत ज़रूरतों के अनुकूल बनाती है।

लंबे समय तक उपयोग में आँखों को थकान से बचाने के लिए मुलायम आईकप लगाए गए हैं। दूरबीन का वज़न करीब 610 ग्राम है और इसकी कॉम्पैक्ट संरचना इसे यात्रा और मैदानी गतिविधियों के लिए सुविधाजनक बनाती है। मज़बूत पकड़ और मौसम-अनुकूल बाहरी ढाँचा इसे विभिन्न परिस्थितियों में उपयोगी बनाता है।

किन लोगों के लिए है यह दूरबीन

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 'गरुड़' को मुख्य रूप से बाहरी गतिविधियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। पक्षी-अवलोकन के शौकीन, वन्यजीव प्रेमी, प्रकृति अन्वेषक, यात्री, खिलाड़ी, वन-कर्मी और समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोग इसका उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा सुरक्षा-संबंधी नागरिक कार्यों में भी यह उपयोगी बताई जा रही है।

गौरतलब है कि इसी तकनीक पर आधारित उपकरण भारतीय सशस्त्र बल और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कठिन परिचालन परिस्थितियों में लंबे समय से उपयोग करते रहे हैं। यह पहली बार है कि इस कोटि की सैन्य-ग्रेड प्रकाशीय तकनीक आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराई जा रही है।

भारत ऑप्टेल की विरासत और नागरिक बाज़ार में प्रवेश

भारत ऑप्टेल के पास सटीक प्रकाशीय उपकरण बनाने का 1943 से अनुभव है। कंपनी ने इसी दशकों पुरानी विशेषज्ञता को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर 'गरुड़' विकसित किया है। यह लॉन्च कंपनी के लिए एक रणनीतिक मोड़ है — रक्षा और सुरक्षा बलों की आपूर्तिकर्ता से आगे बढ़कर नागरिक उपभोक्ता बाज़ार में पहली बार कदम रखना।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत रक्षा क्षेत्र की स्वदेशी तकनीक को व्यापक नागरिक उपयोग तक पहुँचाने पर ज़ोर दे रही है।

लॉन्च समारोह और उपस्थित अधिकारी

'गरुड़' का शुभारंभ रक्षा उत्पादन विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. गरिमा भगत की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम में रक्षा उत्पादन विभाग, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और वन्यजीव क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस विविध उपस्थिति से स्पष्ट है कि 'गरुड़' को केवल रक्षा नहीं, बल्कि खेल, पर्यावरण और नागरिक सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में प्रासंगिक माना जा रहा है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत ऑप्टेल इस उत्पाद की मूल्य निर्धारण और वितरण रणनीति कैसे तय करती है, ताकि यह तकनीक वास्तव में आम नागरिकों तक पहुँच सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल मूल्य निर्धारण और वितरण का है — क्या 'गरुड़' की कीमत उस आम नागरिक की पहुँच में होगी जिसके लिए इसे बनाया गया है, या यह केवल प्रीमियम खरीदारों तक सीमित रहेगी? रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों का नागरिक बाज़ार में प्रवेश नया नहीं है, लेकिन अक्सर वे व्यावसायिक वितरण नेटवर्क और विपणन में निजी प्रतिस्पर्धियों से पीछे रह जाते हैं। 'गरुड़' की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी इसे केवल एक सरकारी उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि एक उपभोक्ता ब्रांड के रूप में स्थापित कर पाती है या नहीं।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ऑप्टेल की 'गरुड़' दूरबीन क्या है?
'गरुड़' भारत ऑप्टेल लिमिटेड द्वारा निर्मित एक स्वदेशी उच्च-रिज़ॉल्यूशन दूरबीन है, जिसे 13 अगस्त 2026 को नागरिक उपभोक्ताओं के लिए लॉन्च किया गया। यह वही सैन्य-ग्रेड प्रकाशीय तकनीक है जो भारतीय सशस्त्र बल और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल उपयोग करते हैं, अब आम लोगों के लिए उपलब्ध कराई गई है।
'गरुड़' दूरबीन की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
'गरुड़' में 8 गुना आवर्धन क्षमता, 7.6 डिग्री का व्यापक दृश्य क्षेत्र और ±5 डायोप्टर समायोजन की सुविधा है। इसका वज़न करीब 610 ग्राम है, मुलायम आईकप आँखों को आराम देते हैं और इसकी संरचना मौसम की विभिन्न परिस्थितियों में उपयोग के अनुकूल है।
'गरुड़' दूरबीन किन लोगों के लिए उपयोगी है?
यह दूरबीन पक्षी-अवलोकन के शौकीनों, वन्यजीव प्रेमियों, प्रकृति अन्वेषकों, यात्रियों, खिलाड़ियों, वन-कर्मियों और समुद्री गतिविधियों में रुचि रखने वालों के लिए उपयुक्त है। नागरिक सुरक्षा-संबंधी कार्यों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
भारत ऑप्टेल लिमिटेड कौन सी कंपनी है?
भारत ऑप्टेल लिमिटेड रक्षा उत्पादन विभाग के अधीन एक मिनी रत्न श्रेणी-1 सरकारी कंपनी है, जिसका मुख्यालय देहरादून में है। कंपनी 1943 से सटीक प्रकाशीय उपकरण बनाने के क्षेत्र में सक्रिय है और मुख्यतः भारतीय सशस्त्र बलों को उपकरण आपूर्ति करती रही है।
'गरुड़' दूरबीन का लॉन्च कहाँ और किसकी उपस्थिति में हुआ?
दूरबीन का शुभारंभ 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के डीपीएसयू भवन में हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता रक्षा उत्पादन विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. गरिमा भगत ने की, और इसमें रक्षा, खेल मंत्रालय, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा वन्यजीव क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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