सोनम वांगचुक बोले: जवाबदेही की मांग करने वाले सभी संगठनों के साथ मेरा समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि देश में जवाबदेही लाने की बात करने वाले सभी नेताओं और संगठनों के साथ उनकी सहानुभूति, सहमति और समर्थन है। यह बयान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन की घोषणा के बाद आया।
वांगचुक का पूरा बयान
वांगचुक ने कहा, 'मैं हमेशा से चाहता था कि जो लोग काबिल बन जाएं, वे आगे चलकर अलग-अलग मुद्दों को उठाएं। जब वे नए थे और उन्हें मेरी जरूरत थी, तो मैंने शिक्षा आंदोलन में उनका साथ दिया। अब वे ऐसे कई मुद्दों को उठाने में सक्षम हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर समय हर आंदोलन से जुड़े रहना उनके लिए संभव नहीं होगा।
वांगचुक ने आगे कहा, 'न सिर्फ सीजेपी, बल्कि देश में जवाबदेही लाने की बात करने वाले सभी नेताओं और संगठनों के साथ मेरी सहानुभूति, सहमति और समर्थन है — लेकिन मैं हर आंदोलन में शामिल नहीं हो पाऊंगा क्योंकि अभी मैं लद्दाख के लिए न्याय की मांग कर रहा हूं और उस दिशा में आगे बढ़ रहा हूं।'
लद्दाख मुद्दे पर चेतावनी
लद्दाख हिंसा की पहली बरसी के मौके पर वांगचुक ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा, 'अक्टूबर की शुरुआत में बातचीत की बात कही गई थी, लेकिन हमारा भरोसा धीरे-धीरे कम हो रहा है क्योंकि अब तक चीजें ऐसी ही होती रही हैं।'
उन्होंने 2 अक्टूबर की समयसीमा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उस तारीख तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला, तो वे और उनके समर्थक शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन तथा अन्य उपलब्ध शांतिपूर्ण तरीकों को जारी रखेंगे।
सीजेपी और सीईसी विवाद की पृष्ठभूमि
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक सार्वजनिक आंदोलन की घोषणा की थी। यह ऐसे समय में आया है जब निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली को लेकर देशभर में बहस जारी है।
गौरतलब है कि वांगचुक पहले भी कई नागरिक आंदोलनों का हिस्सा रह चुके हैं और उनकी सार्वजनिक साख उन्हें राजनीतिक दलों से परे एक स्वतंत्र आवाज़ के रूप में स्थापित करती है।
आगे क्या होगा
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिक ऊर्जा फिलहाल लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई पर केंद्रित है। 2 अक्टूबर 2026 तक सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि वे अगला कदम किस दिशा में उठाते हैं। उनका यह बयान संकेत देता है कि नागरिक समाज के भीतर जवाबदेही की माँग अलग-अलग मोर्चों पर और अधिक संगठित रूप लेती जा रही है।