27 सितंबर 2026
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सोनम वांगचुक बोले: जवाबदेही की मांग करने वाले सभी संगठनों के साथ मेरा समर्थन

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सोनम वांगचुक बोले: जवाबदेही की मांग करने वाले सभी संगठनों के साथ मेरा समर्थन

सारांश

सोनम वांगचुक ने जवाबदेही की माँग करने वाले हर संगठन को समर्थन का भरोसा दिया — लेकिन खुद को हर आंदोलन से नहीं जोड़ा। उनकी असली लड़ाई लद्दाख के लिए है और 2 अक्टूबर सरकार के लिए आखिरी मौका है।

मुख्य बातें

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 27 सितंबर 2026 को कहा कि देश में जवाबदेही लाने की मांग करने वाले सभी संगठनों के साथ उनका समर्थन है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर आंदोलन की घोषणा की है।
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि वे हर आंदोलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकते क्योंकि उनकी प्राथमिकता लद्दाख के लिए न्याय की लड़ाई है।
उन्होंने 2 अक्टूबर 2026 तक सरकार से सकारात्मक संकेत की उम्मीद जताई, अन्यथा शांतिपूर्ण विरोध जारी रखने की बात कही।
वांगचुक ने कहा कि लद्दाख मुद्दे पर सरकार का भरोसा धीरे-धीरे कम हो रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि देश में जवाबदेही लाने की बात करने वाले सभी नेताओं और संगठनों के साथ उनकी सहानुभूति, सहमति और समर्थन है। यह बयान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन की घोषणा के बाद आया।

वांगचुक का पूरा बयान

वांगचुक ने कहा, 'मैं हमेशा से चाहता था कि जो लोग काबिल बन जाएं, वे आगे चलकर अलग-अलग मुद्दों को उठाएं। जब वे नए थे और उन्हें मेरी जरूरत थी, तो मैंने शिक्षा आंदोलन में उनका साथ दिया। अब वे ऐसे कई मुद्दों को उठाने में सक्षम हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर समय हर आंदोलन से जुड़े रहना उनके लिए संभव नहीं होगा।

वांगचुक ने आगे कहा, 'न सिर्फ सीजेपी, बल्कि देश में जवाबदेही लाने की बात करने वाले सभी नेताओं और संगठनों के साथ मेरी सहानुभूति, सहमति और समर्थन है — लेकिन मैं हर आंदोलन में शामिल नहीं हो पाऊंगा क्योंकि अभी मैं लद्दाख के लिए न्याय की मांग कर रहा हूं और उस दिशा में आगे बढ़ रहा हूं।'

लद्दाख मुद्दे पर चेतावनी

लद्दाख हिंसा की पहली बरसी के मौके पर वांगचुक ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा, 'अक्टूबर की शुरुआत में बातचीत की बात कही गई थी, लेकिन हमारा भरोसा धीरे-धीरे कम हो रहा है क्योंकि अब तक चीजें ऐसी ही होती रही हैं।'

उन्होंने 2 अक्टूबर की समयसीमा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उस तारीख तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला, तो वे और उनके समर्थक शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन तथा अन्य उपलब्ध शांतिपूर्ण तरीकों को जारी रखेंगे।

सीजेपी और सीईसी विवाद की पृष्ठभूमि

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक सार्वजनिक आंदोलन की घोषणा की थी। यह ऐसे समय में आया है जब निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली को लेकर देशभर में बहस जारी है।

गौरतलब है कि वांगचुक पहले भी कई नागरिक आंदोलनों का हिस्सा रह चुके हैं और उनकी सार्वजनिक साख उन्हें राजनीतिक दलों से परे एक स्वतंत्र आवाज़ के रूप में स्थापित करती है।

आगे क्या होगा

वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिक ऊर्जा फिलहाल लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई पर केंद्रित है। 2 अक्टूबर 2026 तक सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि वे अगला कदम किस दिशा में उठाते हैं। उनका यह बयान संकेत देता है कि नागरिक समाज के भीतर जवाबदेही की माँग अलग-अलग मोर्चों पर और अधिक संगठित रूप लेती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन खुद को उससे अलग भी रखते हैं ताकि लद्दाख का मुद्दा राष्ट्रीय एजेंडे पर बना रहे। 2 अक्टूबर की समयसीमा महत्वपूर्ण है — यह गाँधी जयंती है और इसका प्रतीकात्मक वजन सरकार पर दबाव बनाता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि वांगचुक का असली सवाल निर्वाचन आयोग नहीं बल्कि लद्दाख की संवैधानिक स्थिति है — और यह मुद्दा अब तक हल नहीं हुआ है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक ने सीजेपी के आंदोलन पर क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने कहा कि जवाबदेही लाने की बात करने वाले सभी संगठनों के साथ उनकी सहानुभूति और समर्थन है, लेकिन वे हर आंदोलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकते। उन्होंने सीजेपी को शुभकामनाएं दीं और बताया कि उनकी प्राथमिकता अभी लद्दाख के लिए न्याय की मांग है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) किस मुद्दे पर आंदोलन कर रही है?
सीजेपी ने भारत निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर आंदोलन की घोषणा की है। यह विवाद निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली से संबंधित सवालों के बीच सामने आया है।
सोनम वांगचुक ने 2 अक्टूबर की समयसीमा क्यों दी है?
वांगचुक ने कहा कि अक्टूबर की शुरुआत में सरकार से बातचीत की बात कही गई थी, लेकिन उनका भरोसा धीरे-धीरे कम हो रहा है। उन्होंने 2 अक्टूबर तक सरकार से कोई सकारात्मक संकेत न मिलने पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी दी।
सोनम वांगचुक लद्दाख के लिए क्या माँग कर रहे हैं?
सोनम वांगचुक लद्दाख के लिए न्याय और संवैधानिक अधिकारों की माँग को लेकर सक्रिय हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि यही उनकी मुख्य प्राथमिकता है और इसी दिशा में वे अपनी ऊर्जा केंद्रित कर रहे हैं।
क्या सोनम वांगचुक सीजेपी के आंदोलन में शामिल होंगे?
नहीं। वांगचुक ने स्पष्ट कहा कि वे सीजेपी के आंदोलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होंगे, हालांकि उन्होंने अपनी नैतिक सहानुभूति और समर्थन ज़रूर जताया। उनका कहना है कि हर समय हर आंदोलन से जुड़े रहना संभव नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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