सोनम वांगचुक ने पुणे के युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन को सराहा, सरकारों से संवाद बनाए रखने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
लद्दाख के著名 सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 11 जून 2026 को पुणे में कॉकरोच जनता पार्टी के देशव्यापी आंदोलन में भाग लिया और वहाँ के युवाओं की शांतिपूर्ण एवं संगठित भागीदारी की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने पुणे को शैक्षणिक केंद्र के साथ-साथ जनचेतना और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का उभरता हुआ केंद्र बताया।
पुणे की बदलती पहचान
वांगचुक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पुणे अब केवल एक शैक्षणिक नगर नहीं रहा, बल्कि यह जनभागीदारी, सामाजिक चेतना और लोकतांत्रिक संवाद का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुणे आने पर उन्हें हमेशा एक सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
उन्होंने याद दिलाया कि पिछली यात्राओं में उन्होंने यहाँ के नागरिकों को पेड़ बचाने के अभियानों से लेकर नदियों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तक, विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों पर सक्रिय रूप से संघर्ष करते देखा है।
युवाओं की भूमिका और शिक्षा में जवाबदेही की माँग
वांगचुक ने कहा कि इस बार उन्हें एक नया और उत्साहजनक पहलू देखने को मिला — पुणे के युवा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग को लेकर संगठित होकर अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। उन्होंने इस शांतिपूर्ण एकजुटता को पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक और सकारात्मक संदेश करार दिया।
गौरतलब है कि शिक्षा में जवाबदेही की यह माँग केवल पुणे तक सीमित नहीं है — देश के कई शहरों में युवा इसी तरह के मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं, जो एक व्यापक राष्ट्रीय प्रवृत्ति का संकेत है।
सरकारों से अपील: शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति को समर्थन दें
वांगचुक ने सरकारों से स्पष्ट अपील की कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण जनसहभागिता और अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जहाँ भी नागरिक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, उन्हें ऐसा करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।'
उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि शांतिपूर्ण अभिव्यक्तियों को दबाया जाता है, तो इससे समाज में गलत संदेश जाता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था कमज़ोर होती है। उनके अनुसार, सरकार की ज़िम्मेदारी हिंसा पर अंकुश लगाना है, न कि रचनात्मक संवाद को।
मीडिया की स्वतंत्रता और 'विश्वगुरु' की राह
मीडिया की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए वांगचुक ने कहा कि समाचार माध्यमों को सत्य, निष्पक्षता और जनहित के सिद्धांतों पर काम करना चाहिए। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' में मीडिया की स्वतंत्रता, सत्यनिष्ठा और ज़िम्मेदार पत्रकारिता जैसे विषयों पर चर्चा करें।
वांगचुक ने कहा कि यदि भारत को वैश्विक स्तर पर एक आदर्श राष्ट्र और 'विश्वगुरु' के रूप में स्थापित होना है, तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, स्वतंत्र मीडिया और तथ्य-आधारित संवाद को मज़बूत करना अनिवार्य होगा। संचार माध्यमों पर किसी प्रकार का अनावश्यक दबाव नहीं होना चाहिए — यह उनका स्पष्ट मत था।
आगे की राह
वांगचुक ने दोहराया कि शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण उनके जीवन और कार्य के केंद्रबिंदु हैं, और सत्य व अहिंसा का मार्ग उनके हर अभियान की मूल प्रेरणा है। उनकी यह यात्रा इस बात का संकेत है कि देशभर में युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलनों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और समर्थन मिल रहा है।