21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुषमा अंधारे का केंद्र पर हमला: वांगचुक आंदोलन दमन लोकतंत्र विरोधी, राम मंदिर ट्रस्ट चंदे की पारदर्शी जांच हो

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुषमा अंधारे का केंद्र पर हमला: वांगचुक आंदोलन दमन लोकतंत्र विरोधी, राम मंदिर ट्रस्ट चंदे की पारदर्शी जांच हो

सारांश

शिवसेना (UBT) नेता सुषमा अंधारे ने पुणे में दोहरा मोर्चा खोला — वांगचुक आंदोलन को बलपूर्वक दबाने को लोकतंत्र विरोधी बताया और राम मंदिर ट्रस्ट की कथित वित्तीय गड़बड़ियों की पारदर्शी जांच की माँग की। उनका कहना है कि संवाद के बजाय दमन सरकार की विफलता दर्शाता है।

मुख्य बातें

सुषमा अंधारे (शिवसेना UBT) ने 20 जुलाई को पुणे में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
सोनम वांगचुक के शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कार्रवाई को उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया।
आंदोलन स्थल पर सफेद चादर ओढ़े पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को उन्होंने 'लोकतंत्र की अर्थी' की संज्ञा दी।
राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की माँग की।
22 जनवरी 2024 की अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा के राजनीतिक प्रचार का हवाला देते हुए ट्रस्ट की जवाबदेही पर सवाल उठाए।

शिवसेना (यूबीटी) की वरिष्ठ नेता सुषमा अंधारे ने 20 जुलाई को पुणे में केंद्र सरकार पर दोहरा हमला बोला — एक ओर सोनम वांगचुक के शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक दबाने को लोकतंत्र पर सीधा प्रहार बताया, तो दूसरी ओर राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की माँग की। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को बल के बजाय संवाद का रास्ता चुनना चाहिए।

वांगचुक आंदोलन पर सरकारी रवैया: अंधारे की तीखी आलोचना

अंधारे ने कहा कि सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को जिस तरह प्रशासनिक बल के जरिए दबाने का प्रयास किया गया, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई की आलोचना केवल देश में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। उनके अनुसार, जिस आंदोलन का समाधान बातचीत से निकाला जा सकता था, उसे दबाने की कोशिश सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

सफेद चादर का प्रतीकवाद: 'लोकतंत्र की अर्थी'

प्रदर्शन स्थल पर सफेद चादर ओढ़े पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को अंधारे ने प्रतीकात्मक रूप से लोकतंत्र के लिए अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि इस दृश्य से ऐसा प्रतीत हुआ मानो लोकतंत्र की ही अर्थी निकाली जा रही हो। संसद के बाहर की गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को भी उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करार दिया और आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शासन में देश में तानाशाही की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

राम मंदिर ट्रस्ट: पारदर्शी जांच की माँग

अंधारे ने कहा कि BJP ने राम मंदिर निर्माण को बड़े राजनीतिक अभियान के रूप में प्रस्तुत किया था और 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। उन्होंने कहा कि अब यदि उसी ट्रस्ट को लेकर कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह जांच कराए। उनका तर्क है कि धार्मिक आस्था से जुड़े संस्थानों में कथित गड़बड़ियों के आरोप लोगों के विश्वास को प्रभावित करते हैं।

जवाबदेही और आगे की राह

अंधारे ने चेताया कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो जनता का शासन व्यवस्था और संस्थाओं पर भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने सरकार से अपेक्षा जताई कि वह आलोचनाओं का जवाब संवाद और पारदर्शिता के माध्यम से दे, न कि दमन के जरिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष केंद्र सरकार पर नागरिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही के मुद्दों पर लगातार दबाव बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट पर कथित अनियमितताओं के आरोपों की विश्वसनीयता तब तक सीमित रहेगी जब तक कोई ठोस साक्ष्य या आधिकारिक जांच सामने न आए। गौरतलब है कि विपक्ष की यह रणनीति — धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही की माँग — राजनीतिक रूप से जोखिम भरी भी है, क्योंकि यह हिंदू मतदाताओं के एक वर्ग को संवेदनशील लग सकती है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह माँग संसद या न्यायपालिका में ठोस कदम तक पहुँचती है, या केवल प्रेस वार्ता तक सीमित रहती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुषमा अंधारे ने सोनम वांगचुक के आंदोलन पर क्या कहा?
अंधारे ने कहा कि वांगचुक के शांतिपूर्ण आंदोलन को प्रशासनिक बल से दबाना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर प्रहार है। उनके अनुसार, इस मुद्दे का समाधान बातचीत से निकाला जा सकता था और सरकार का यह रवैया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना का विषय बना है।
राम मंदिर ट्रस्ट पर क्या आरोप हैं और अंधारे ने क्या माँग की?
अंधारे ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट पर कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने 22 जनवरी 2024 की अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा के दौरान हुए व्यापक राजनीतिक प्रचार का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक संस्थाओं में गड़बड़ी के आरोप जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं।
सफेद चादर वाले पुलिसकर्मियों का मुद्दा क्या है?
अंधारे ने आंदोलन स्थल पर सफेद चादर ओढ़े पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को प्रतीकात्मक रूप से लोकतंत्र के लिए अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि यह दृश्य ऐसा लगा जैसे लोकतंत्र की ही अर्थी निकाली जा रही हो।
शिवसेना (UBT) किस आधार पर BJP सरकार को घेर रही है?
शिवसेना (UBT) का आरोप है कि BJP शासन में लोकतंत्र कमजोर हुआ है और तानाशाही की प्रवृत्ति बढ़ रही है। पार्टी नागरिक स्वतंत्रता के दमन और धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही — दोनों मुद्दों पर एक साथ केंद्र सरकार पर दबाव बना रही है।
अंधारे के अनुसार सरकार को आगे क्या करना चाहिए?
अंधारे ने माँग की कि सरकार आलोचनाओं का जवाब दमन के बजाय संवाद और पारदर्शिता से दे। राम मंदिर ट्रस्ट मामले में यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 3 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले