18 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर सुप्रिया सुले: 'शांतिपूर्ण आंदोलन को रोकना संविधान के खिलाफ'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर सुप्रिया सुले: 'शांतिपूर्ण आंदोलन को रोकना संविधान के खिलाफ'

सारांश

NCP-SP सांसद सुप्रिया सुले ने सोनम वांगचुक को आंदोलन स्थल से हटाए जाने को संविधान के खिलाफ बताया। परिसीमन विधेयक पर 'पहले बिल लाओ, फिर राय' का रुख अपनाया। जयंत पाटिल की फडणवीस-शिंदे से मुलाकात को पूरी तरह पारदर्शी और आधिकारिक करार दिया।

मुख्य बातें

सुप्रिया सुले ने 18 जुलाई को मुंबई में कहा कि सोनम वांगचुक को आंदोलन स्थल से हटाया जाना संविधान के खिलाफ है।
सुले स्वयं शुक्रवार को आंदोलन स्थल पर गई थीं; पार्टी प्रवक्ता अनीस गवांडे दिल्ली में स्थिति पर नज़र रख रहे हैं।
प्रस्तावित परिसीमन विधेयक और महिला 50% आरक्षण पर पार्टी ने विधेयक आने के बाद ही राय देने का रुख अपनाया।
जयंत पाटिल की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से हुई मुलाकात को सुले ने पूरी तरह पारदर्शी और आधिकारिक बताया।
सुले ने कहा कि वह खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिली थीं — पार्टी की पारदर्शिता का उदाहरण देते हुए।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने 18 जुलाई को मुंबई में सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और उससे जुड़े हालिया घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक सशक्त लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करने का अधिकार है और वांगचुक को उनके आंदोलन स्थल से जिस तरह हटाया गया, वह संविधान की भावना के विरुद्ध है।

मुख्य घटनाक्रम

सुप्रिया सुले ने बताया कि वह स्वयं शुक्रवार को आंदोलन स्थल पर गई थीं और वहाँ की स्थिति का प्रत्यक्ष जायज़ा लिया था। उन्होंने कहा, 'यह बेहद दुखद है कि जो आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था, उसमें इस तरह का घटनाक्रम सामने आया।' पार्टी के मुख्य प्रवक्ता अनीस गवांडे दिल्ली में मौजूद हैं और स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं।

संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों पर रुख

सुले ने जोर देकर कहा कि सोनम वांगचुक पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन चला रहे थे। उनके अनुसार, जिस तरह से उन्हें वहाँ से ले जाया गया, वह न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि संविधान के प्रावधानों के भी खिलाफ है। गौरतलब है कि वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की माँग को लेकर आंदोलनरत हैं।

परिसीमन विधेयक पर सतर्क रुख

प्रस्तावित डीलिमिटेशन (परिसीमन) विधेयक पर सुले ने कहा कि अभी तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव या विधेयक सामने नहीं आया है। उनका कहना था, 'जब बिल ही नहीं आया, प्रस्ताव ही नहीं है, तो बिना उसे देखे कैसे कुछ कहा जा सकता है? पहले सरकार बिल लाए, फिर उसे पढ़ने के बाद हम अपनी विस्तृत राय देंगे।' महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े सवाल पर भी उन्होंने यही रुख अपनाया — जब तक विधेयक सामने नहीं आता, किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं।

जयंत पाटिल की मुलाकात पर सफाई

एनसीपी-एसपी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से हुई मुलाकात को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों पर सुले ने कहा कि इसमें कोई गोपनीयता नहीं थी। उन्होंने तर्क दिया, 'अगर मुलाकात चोरी-छिपे होती तो क्या वह खुद उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते? यह पूरी तरह आधिकारिक और खुली मुलाकात थी।'

पारदर्शिता का दावा

सुले ने कहा कि उनकी पार्टी के नेता हमेशा पारदर्शिता के साथ काम करते हैं। उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिली थीं और वह मुलाकात भी पूरी तरह सार्वजनिक थी। उन्होंने कहा, 'हम लोग फ्रंट डोर से जाते हैं, पीछे के रास्ते वाले लोग नहीं हैं।' आने वाले दिनों में पार्टी वांगचुक के मुद्दे पर अपना रुख और स्पष्ट करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सरकार से सीधी टकराहट से बचना। परिसीमन पर 'बिल आने दो' का रुख विपक्ष की क्लासिक 'प्रतीक्षा' रणनीति है, जो न समर्थन है न विरोध। जयंत पाटिल की सत्तापक्ष के नेताओं से मुलाकात पर सफाई देने की ज़रूरत पड़ना खुद बताती है कि NCP-SP के भीतर और बाहर इस मुलाकात को लेकर असहजता थी। वांगचुक का मुद्दा लद्दाख की संवैधानिक स्थिति से जुड़ा है — यह महज़ एक भूख हड़ताल नहीं, बल्कि 2019 के पुनर्गठन के बाद से उपजे असंतोष का प्रतीक है, जिसे मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियाँ अब तक पर्याप्त गंभीरता से नहीं उठा पाई हैं।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल किस मुद्दे पर है?
सोनम वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने और उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की माँग को लेकर आंदोलनरत हैं। 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश बना, जिसके बाद से वहाँ के निवासियों में विधानसभा और संवैधानिक सुरक्षा की माँग लगातार उठती रही है।
सुप्रिया सुले ने वांगचुक के मुद्दे पर क्या कहा?
NCP-SP सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि सोनम वांगचुक को उनके आंदोलन स्थल से जिस तरह हटाया गया, वह संविधान के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सशक्त लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण आंदोलन का अधिकार है।
परिसीमन विधेयक पर NCP-SP का क्या रुख है?
सुप्रिया सुले ने कहा कि अभी तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक परिसीमन विधेयक सामने नहीं आया है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि विधेयक का अध्ययन करने के बाद ही वे अपनी विस्तृत राय देंगे।
जयंत पाटिल की फडणवीस और शिंदे से मुलाकात को लेकर विवाद क्यों है?
NCP-SP के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से हुई मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया। सुप्रिया सुले ने इसे पूरी तरह आधिकारिक और पारदर्शी मुलाकात बताया, यह कहते हुए कि पाटिल ने खुद इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी।
महिला आरक्षण के 50 प्रतिशत प्रस्ताव पर सुप्रिया सुले का क्या कहना है?
सुले ने इस मुद्दे पर भी 'प्रतीक्षा करो' का रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जब तक महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक सामने नहीं आता, तब तक किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 29 मिनट पहले
  2. 1 घंटा पहले
  3. 2 घंटे पहले
  4. 4 घंटे पहले
  5. 4 घंटे पहले
  6. 5 घंटे पहले
  7. 5 घंटे पहले
  8. 4 महीने पहले