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भोपाल मास्टर प्लान 2047 का मसौदा जारी, सीएम मोहन यादव ने की सराहना; कांग्रेस ने उठाए सवाल

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भोपाल मास्टर प्लान 2047 का मसौदा जारी, सीएम मोहन यादव ने की सराहना; कांग्रेस ने उठाए सवाल

सारांश

वर्षों की प्रतीक्षा और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भोपाल विकास योजना 2047 का मसौदा आखिरकार जारी हुआ। सीएम मोहन यादव ने इसे 'हरित और समावेशी भोपाल' की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि कांग्रेस ने श्रेय-दावे को ही विवादित कर दिया।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश सरकार ने 26 सितंबर 2026 को भोपाल विकास योजना 2047 का मसौदा जारी किया।
मसौदा अब तीन महीने के आपत्ति-दावों के चरण में है; इसके बाद अंतिम योजना अधिसूचित होगी।
सीएम मोहन यादव ने योजना को 'हरित, समृद्ध और समावेशी भोपाल' का रोडमैप बताया।
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आरोप लगाया कि सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय की फटकार के बाद ही यह कदम उठाया।
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने याद दिलाया कि 2031 का मास्टर प्लान कांग्रेस के 15 महीने के कार्यकाल में बना था और उन्होंने 31 घंटे का अनशन किया था।
100 से अधिक व्यापारी प्रतिनिधियों ने सीएम आवास पर आभार व्यक्त किया और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले अंतिम योजना जारी करने की माँग की।

मध्य प्रदेश सरकार ने 26 सितंबर 2026 को भोपाल विकास योजना 2047 का मसौदा जारी किया, जो राजधानी के सुनियोजित विकास की दिशा में वर्षों से प्रतीक्षित एक अहम कदम है। मसौदा अब अंतिम अधिसूचना से पहले तीन महीने के आपत्ति और दावों के चरण में प्रवेश कर चुका है। इस पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है, कांग्रेस ने सरकार के श्रेय-दावे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और योजना का उद्देश्य

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'भोपाल विकास योजना 2047 का उद्देश्य भोपाल को एक हरित, समृद्ध और समावेशी शहर के रूप में विकसित करना है।' उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, नागरिकों और अधिकारियों के आपसी सहयोग से इस योजना को आगे बढ़ाएगी।

सीएम यादव ने जोर दिया कि भोपाल के भविष्य के विकास के लिए प्रस्तावित ढाँचे को आकार देने में समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य होगी।

कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया

भोपाल विधायक आरिफ मसूद ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय की फटकार के बाद ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा, 'इसे लागू करने का श्रेय लेने पर उन्हें (भाजपा को) शर्म आनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ही इसका मसौदा जारी किया गया। अब, आपत्तियों और दावों के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा।'

पूर्व मंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के वरिष्ठ नेता पीसी शर्मा ने स्पष्ट किया कि अभी केवल मसौदा जारी हुआ है, अंतिम मास्टर प्लान नहीं। उन्होंने कहा, 'अंतिम मास्टर प्लान अभी तक जारी नहीं किया गया है; केवल मसौदा जारी किया गया है। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री का धन्यवाद करता हूं।' शर्मा ने यह भी दावा किया कि 2031 का मास्टर प्लान कांग्रेस सरकार के 15 महीने के कार्यकाल में तैयार किया गया था और उन्होंने योजना जारी करने में हुई देरी के विरोध में अपने 31 घंटे के अनशन का भी उल्लेख किया।

व्यापारी वर्ग का स्वागत

इस मसौदे के जारी होने का कई व्यापारिक संगठनों ने स्वागत किया। जिला अध्यक्ष रविंद्र यति के नेतृत्व में क्रेडाई, चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, कोलार ट्रेडर्स फेडरेशन, कोलार बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन, न्यू मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन और संत हिरदाराम नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन के 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री आवास पर पहुँचकर आभार व्यक्त किया।

व्यापारियों ने मास्टर प्लान को भोपाल के लिए अत्यंत आवश्यक बताया और सरकार से अगले वर्ष होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले अंतिम योजना जारी करने का आग्रह किया, यह कहते हुए कि इससे शहर में निवेश और सुनियोजित विकास को बल मिलेगा।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

राज्य मंत्री और गोविंदपुरा (भोपाल) से भाजपा विधायक कृष्ण गौर ने कहा कि मास्टर प्लान से भोपाल एक आदर्श राजधानी के रूप में उभरेगा। उन्होंने जोर दिया कि मोहन यादव सरकार अपने वादों को पूरा कर रही है।

आगे क्या होगा

मसौदे पर तीन महीने तक नागरिकों, व्यापारियों और अन्य हितधारकों से आपत्तियाँ और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। इसके बाद अंतिम भोपाल विकास योजना 2047 को अधिसूचित किया जाएगा। कांग्रेस ने भी संकेत दिया है कि वह प्रस्तावित योजना पर अपने विचार औपचारिक रूप से रखेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अंतिम योजना ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले जारी हो पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि यह मसौदे से अंतिम अधिसूचना तक का सफर कितने वर्षों में तय करेगा। सर्वोच्च न्यायालय की फटकार के बाद जारी होना इस योजना की वैधता पर सवाल नहीं उठाता, लेकिन यह सरकार की नियोजन क्षमता पर जरूर प्रश्नचिह्न लगाता है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले अंतिम योजना जारी करना एक राजनीतिक-आर्थिक जरूरत भी है, और इसी में सरकार की असली परीक्षा है। कांग्रेस का श्रेय-विवाद राजनीतिक है, लेकिन नागरिकों और व्यापारियों की भागीदारी का तीन माह का अवसर योजना की गुणवत्ता तय करेगा।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोपाल विकास योजना 2047 क्या है?
भोपाल विकास योजना 2047 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दीर्घकालिक और सुनियोजित विकास के लिए तैयार किया गया एक मास्टर प्लान है। इसका उद्देश्य भोपाल को एक हरित, समृद्ध और समावेशी शहर के रूप में विकसित करना है।
भोपाल मास्टर प्लान 2047 का मसौदा कब जारी हुआ?
यह मसौदा 26 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी किया गया। इस पर तीन महीने तक आपत्तियाँ और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे, जिसके बाद अंतिम योजना अधिसूचित की जाएगी।
कांग्रेस ने भोपाल मास्टर प्लान पर सवाल क्यों उठाए?
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय की फटकार के बाद ही मसौदा जारी किया, इसलिए श्रेय लेना उचित नहीं है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी सिर्फ मसौदा जारी हुआ है, अंतिम मास्टर प्लान नहीं।
व्यापारी वर्ग ने भोपाल मास्टर प्लान पर क्या माँग रखी?
क्रेडाई, चैंबर ऑफ कॉमर्स और अन्य व्यापारिक संगठनों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने सरकार से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले अंतिम मास्टर प्लान जारी करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे शहर में निवेश और सुनियोजित विकास को बल मिलेगा।
भोपाल मास्टर प्लान 2047 कब अंतिम रूप से अधिसूचित होगा?
मसौदे पर तीन महीने की आपत्ति-दावों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम भोपाल विकास योजना 2047 को अधिसूचित किया जाएगा। सरकार ने अभी इसकी कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की है।
राष्ट्र प्रेस
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