3 अक्टूबर 2026
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जमुई के चकाई में ₹3,400 करोड़ का निवेश, CM सम्राट चौधरी बोले — बिहार बनेगा उद्योग और स्किल का हब

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जमुई के चकाई में ₹3,400 करोड़ का निवेश, CM सम्राट चौधरी बोले — बिहार बनेगा उद्योग और स्किल का हब

सारांश

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमुई के चकाई में ₹3,400 करोड़ के निवेश की समीक्षा की — एथेनॉल प्लांट, स्टील और अन्य परियोजनाओं के साथ 10,000 से अधिक रोज़गार का लक्ष्य। यह बिहार को उद्योग के नक्शे पर लाने की सरकार की बड़ी कोशिश है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 3 अक्टूबर को जमुई जिले के चकाई में अंकुर बायोकेम के एथेनॉल प्लांट का निरीक्षण किया।
चार कंपनियों के ज़रिये ₹3,400 करोड़ का निवेश प्रस्तावित; 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार का अनुमान।
एथेनॉल प्लांट की क्षमता 1,000 किलोलीटर प्रतिदिन ; मार्च 2027 तक उत्पादन शुरू होने की संभावना।
औद्योगिक क्षेत्र के लिए 9,000 एकड़ भूमि चिह्नित; 30 अक्टूबर तक पूरा ब्यौरा तैयार करने का निर्देश।
संयंत्र में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली और 20 मेगावाट कैप्टिव पावर जेनरेशन की सुविधा होगी।
लघुआर मंदिर और गरही डैम को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना बनाने के निर्देश।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार, 3 अक्टूबर को जमुई जिले के चकाई प्रखंड में निर्माणाधीन अंकुर बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड के एथेनॉल प्लांट का स्थलीय निरीक्षण किया। इस मौके पर उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार को उद्योग और कौशल विकास का केंद्र बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। जमुई जिले में चार कंपनियों के माध्यम से कुल ₹3,400 करोड़ के निवेश की योजना है, जिससे 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

एथेनॉल प्लांट की मुख्य विशेषताएँ

अंकुर बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड का यह एथेनॉल संयंत्र 105 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि मार्च 2027 तक उत्पादन शुरू होने का अनुमान है। प्लांट की उत्पादन क्षमता 1,000 किलोलीटर प्रतिदिन निर्धारित की गई है और इसमें 20 मेगावाट की कैप्टिव पावर जेनरेशन सुविधा भी स्थापित होगी।

संयंत्र को प्रतिदिन लगभग 30,000 क्विंटल अनाज की आवश्यकता होगी, जिससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज के लिए एक स्थायी और सुनिश्चित बाज़ार मिलेगा। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बिहार के कृषि-क्षेत्र में उपज के उचित मूल्य की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, संयंत्र में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली अपनाई जाएगी, जो जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से एक सकारात्मक कदम है।

चकाई में औद्योगिक क्षेत्र और भूमि अधिग्रहण की तैयारी

समीक्षा बैठक में सामने आया कि चकाई में औद्योगिक क्षेत्र के लिए लगभग 9,000 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। इसमें करीब 5,000 एकड़ वन विभाग की और 4,000 एकड़ रैयती एवं अन्य श्रेणी की भूमि शामिल है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चिह्नित भूमि की मैपिंग 10 से 12 दिनों के भीतर पूरी की जाए और 30 अक्टूबर तक भूमि का संपूर्ण ब्यौरा तैयार कर प्रस्तुत किया जाए।

गौरतलब है कि जमुई जिले में अंकुर स्टील प्राइवेट लिमिटेड, अंकुर बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड, सीएलएम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और अंकुर ट्रेडविस्टा प्राइवेट लिमिटेड की परियोजनाओं के ज़रिये यह निवेश प्रस्तावित है। यह बिहार सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य के पिछड़े और आदिवासी-बहुल क्षेत्रों को औद्योगिक मानचित्र पर लाने की कोशिश की जा रही है।

पर्यटन और कानून-व्यवस्था पर भी निर्देश

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लघुआर मंदिर और गरही डैम को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास से स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए जनसुविधाएँ और ठहरने की व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

इसके साथ ही उन्होंने जिले में कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने, नियमित पुलिस पेट्रोलिंग, नशामुक्ति जागरूकता अभियान और थानों की कार्यप्रणाली की समीक्षा के निर्देश दिए। भीम बांध-लक्ष्मीपुर और मुंगेर-गंगटा मार्गों की निरंतर निगरानी, रोप-वे की आवश्यकता का आकलन तथा वन क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद

समीक्षा बैठक में उद्योग एवं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, परिवहन मंत्री दामोदर रावत, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी प्रीता वर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जमुई को औद्योगिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा और चकाई का एथेनॉल प्लांट इस दिशा में एक निर्णायक परियोजना साबित होगा।

यदि निर्धारित समयसीमा में भूमि मैपिंग और निवेश प्रक्रिया पूरी होती है, तो चकाई अगले कुछ वर्षों में बिहार के सबसे सक्रिय औद्योगिक केंद्रों में से एक बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

400 करोड़ के निवेश की घोषणा कागज़ पर प्रभावशाली दिखती है, लेकिन असली परीक्षा भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं में होगी — जहाँ 5,000 एकड़ वन भूमि शामिल है, जिसके लिए केंद्रीय वन मंजूरी एक लंबी और अनिश्चित प्रक्रिया है। बिहार में पिछले कई वर्षों में निवेश की घोषणाएँ और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई चिंताजनक रही है। मार्च 2027 की समयसीमा तभी यथार्थवादी होगी जब भूमि मैपिंग, वन स्वीकृति और बुनियादी ढाँचा विकास समानांतर तेज़ी से आगे बढ़ें — जो अब तक बिहार की औद्योगिक परियोजनाओं में कमज़ोर कड़ी रही है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जमुई के चकाई में कितने करोड़ का निवेश प्रस्तावित है और किन कंपनियों का है?
जमुई जिले के चकाई में कुल ₹3,400 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। यह निवेश अंकुर स्टील प्राइवेट लिमिटेड, अंकुर बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड, सीएलएम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और अंकुर ट्रेडविस्टा प्राइवेट लिमिटेड की परियोजनाओं के माध्यम से आएगा।
चकाई का एथेनॉल प्लांट कब तक शुरू होगा और इसकी क्षमता क्या है?
अंकुर बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड के एथेनॉल प्लांट से मार्च 2027 तक उत्पादन शुरू होने की संभावना है। इसकी क्षमता 1,000 किलोलीटर प्रतिदिन होगी और इसमें 20 मेगावाट की कैप्टिव पावर जेनरेशन सुविधा भी होगी।
इन परियोजनाओं से बिहार में कितने रोज़गार मिलने की उम्मीद है?
अधिकारियों के अनुसार, जमुई जिले की इन परियोजनाओं से 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार अवसर सृजित होने की उम्मीद है। इसके अलावा, प्लांट को प्रतिदिन लगभग 30,000 क्विंटल अनाज की ज़रूरत होगी, जिससे स्थानीय किसानों को स्थायी बाज़ार मिलेगा।
चकाई औद्योगिक क्षेत्र के लिए कितनी भूमि चिह्नित की गई है?
चकाई में औद्योगिक क्षेत्र के लिए लगभग 9,000 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है, जिसमें करीब 5,000 एकड़ वन विभाग की और 4,000 एकड़ रैयती एवं अन्य श्रेणी की भूमि शामिल है। मुख्यमंत्री ने 30 अक्टूबर तक भूमि का पूरा ब्यौरा तैयार करने का निर्देश दिया है।
एथेनॉल प्लांट में पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
संयंत्र में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली अपनाई जाएगी, जिससे जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित होगी। यह प्रणाली औद्योगिक इकाइयों से होने वाले जल प्रदूषण को रोकने में सहायक मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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