15 अक्टूबर 2026
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बिहार CM सम्राट चौधरी का ऐलान: 2030 तक राज्य में ही मिलेगा रोज़गार, ₹140.95 करोड़ के लेदर क्लस्टर का उद्घाटन

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बिहार CM सम्राट चौधरी का ऐलान: 2030 तक राज्य में ही मिलेगा रोज़गार, ₹140.95 करोड़ के लेदर क्लस्टर का उद्घाटन

सारांश

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का वादा — 2030 तक पलायन रुकेगा, राज्य में ही मिलेगा रोज़गार। ₹140.95 करोड़ के लेदर क्लस्टर के उद्घाटन के साथ उन्होंने 10,000 MW बिजली, 1,000 MW डेटा सेंटर और रैपिड रेल का खाका भी रखा। सवाल यह है कि यह खाका ज़मीन पर कितना उतरेगा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 अक्टूबर 2026 को मुजफ्फरपुर के महवल औद्योगिक क्षेत्र में ₹140.95 करोड़ के मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर का उद्घाटन किया।
सरकार का लक्ष्य 2030 से पहले बिहार से पलायन करने वाले श्रमिकों को राज्य में ही रोज़गार उपलब्ध कराना है।
अगले पाँच वर्षों में औद्योगिक क्षेत्र को 10,000 मेगावाट बिजली और 2030 से पहले 1,000 मेगावाट का डेटा सेंटर विकसित करने की योजना।
उद्यमी योजना के तहत लाभार्थियों को ₹10 लाख की सहायता — ₹5 लाख अनुदान और ₹5 लाख कम ब्याज पर ऋण।
निवेशकों के प्रस्तावों पर 30 दिनों के भीतर नीति बनाने की दिशा में काम करने का आश्वासन; उद्योग विभाग और FDDI के बीच MoU हस्ताक्षरित।
गयाजी, मुजफ्फरपुर और दरभंगा में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और मुजफ्फरपुर-पटना-गया रैपिड रेल की योजना।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 अक्टूबर 2026 को मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर प्रखंड स्थित महवल औद्योगिक क्षेत्र में ₹140.95 करोड़ की लागत से निर्मित मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर तथा साझा सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 से पहले बिहार से पलायन करने वाले श्रमिकों को राज्य में ही रोज़गार उपलब्ध कराना है और प्रदेश को एक सशक्त औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करना है।

मुख्य घटनाक्रम

उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कॉमन फैसिलिटी सेंटर का निरीक्षण किया और औद्योगिक इकाइयों को शेड एवं भूमि आवंटन पत्र वितरित किए। कार्यक्रम के दौरान उद्योग विभाग और फुटवियर डिज़ाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (FDDI) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए। यह क्लस्टर स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को आधुनिक तकनीक, साझा उपकरण और प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।

सरकार की औद्योगिक नीति

मुख्यमंत्री ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनके प्रस्तावों की जाँच के बाद 30 दिनों के भीतर संबंधित क्षेत्र के लिए नीति तैयार करने पर काम किया जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन को उद्योगों के लिए भूमि आवंटन में गति लाने के निर्देश भी दिए और किसी भी प्रकार की ढील न बरतने की हिदायत दी। गौरतलब है कि सरकार MSME, भारी उद्योग और नवीकरणीय ऊर्जा सहित विविध क्षेत्रों में निवेश को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है।

बुनियादी ढाँचे का विस्तार

सम्राट चौधरी ने बताया कि अगले पाँच वर्षों में औद्योगिक क्षेत्र को लगभग 10,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त, 2030 से पहले राज्य में 1,000 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करने की भी योजना है। उन्होंने मुजफ्फरपुर से पटना और पटना से गया तक रैपिड रेल चलाने की योजना का भी उल्लेख किया, जिससे तीनों शहरों के बीच संपर्क सुगम होगा और औद्योगिक गतिविधियों को बल मिलेगा। मुजफ्फरपुर के पताही में हवाई संपर्क बढ़ाने और ड्राई पोर्ट जैसी सुविधाएं विकसित करने की दिशा में भी कार्य जारी है, जिससे स्थानीय उत्पादों के निर्यात को गति मिलेगी।

युवाओं और उद्यमिता पर फोकस

मुख्यमंत्री ने युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने के लिए सरकार की उद्यमी योजना का उल्लेख किया, जिसके तहत लाभार्थियों को ₹10 लाख की सहायता दी जाती है — इसमें ₹5 लाख अनुदान और ₹5 लाख कम ब्याज दर पर ऋण शामिल है। उन्होंने युवाओं से अपने शोध, नवाचार और स्टार्टअप से जुड़े प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखने की अपील की। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार की लगभग 14 करोड़ आबादी के लिए रोज़गार सृजन एक बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

नए औद्योगिक क्लस्टर की योजना

सम्राट चौधरी ने बताया कि गयाजी में एक इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करने की प्रक्रिया पहले से जारी है। दरभंगा में भी इसी तर्ज पर औद्योगिक क्लस्टर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि इन क्लस्टरों की स्थापना से न केवल रोज़गार बढ़ेगा, बल्कि राज्य के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार करने में बिहार की भागीदारी सुनिश्चित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु बिहार की 14 करोड़ आबादी और लाखों प्रवासी मज़दूरों की तुलना में यह निवेश अभी भी नगण्य है। असली परीक्षा यह है कि 10,000 MW बिजली, 1,000 MW डेटा सेंटर और रैपिड रेल जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य केवल मंच पर बोले गए वादे बनकर न रह जाएँ — इन्हें बजटीय प्रतिबद्धता और समयबद्ध क्रियान्वयन से जोड़ना होगा। निवेशकों को 30 दिनों में नीति देने का वादा सकारात्मक संकेत है, लेकिन भूमि अधिग्रहण की जटिलताएं और प्रशासनिक क्षमता बिहार के औद्योगिक विकास की सबसे बड़ी बाधाएँ रही हैं।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार CM सम्राट चौधरी ने मुजफ्फरपुर में किस क्लस्टर का उद्घाटन किया?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 अक्टूबर 2026 को मुजफ्फरपुर के मोतीपुर प्रखंड स्थित महवल औद्योगिक क्षेत्र में ₹140.95 करोड़ की लागत से निर्मित मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर और साझा सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उद्योग विभाग और FDDI के बीच MoU पर भी हस्ताक्षर हुए।
बिहार सरकार 2030 तक रोज़गार देने का लक्ष्य कैसे पूरा करेगी?
सरकार की योजना राज्य में उद्योगों का व्यापक नेटवर्क विकसित करने की है — इसमें गयाजी, मुजफ्फरपुर और दरभंगा में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, 10,000 MW बिजली आपूर्ति, 1,000 MW का डेटा सेंटर और रैपिड रेल संपर्क शामिल हैं। निवेशकों के प्रस्तावों पर 30 दिनों के भीतर नीति बनाने का भी आश्वासन दिया गया है।
बिहार उद्यमी योजना क्या है और इससे युवाओं को क्या फायदा होगा?
उद्यमी योजना के तहत लाभार्थियों को ₹10 लाख की सहायता दी जाती है, जिसमें ₹5 लाख सीधा अनुदान और ₹5 लाख कम ब्याज दर पर ऋण शामिल है। यह योजना युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने और राज्य में नए व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
मुजफ्फरपुर और बिहार में बुनियादी ढाँचे के विकास की क्या योजनाएँ हैं?
सरकार मुजफ्फरपुर-पटना-गया के बीच रैपिड रेल, मुजफ्फरपुर के पताही में उन्नत हवाई संपर्क और ड्राई पोर्ट जैसी सुविधाएँ विकसित करने पर काम कर रही है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों की पैकेजिंग, विपणन और निर्यात को बढ़ावा देना है।
बिहार में पलायन की समस्या कितनी बड़ी है और यह क्लस्टर कितना प्रभावी होगा?
बिहार से लाखों श्रमिक हर साल रोज़गार के लिए अन्य राज्यों में जाते हैं, जो राज्य की लगभग 14 करोड़ आबादी के लिए एक गंभीर चुनौती है। ₹140.95 करोड़ का लेदर क्लस्टर एक प्रारंभिक कदम है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पलायन रोकने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश और त्वरित क्रियान्वयन आवश्यक होगा।
राष्ट्र प्रेस
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