2030 तक बिहार से मजदूरी पलायन रोकेंगे: CM सम्राट चौधरी का मुंगेर में बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 19 अक्टूबर 2026 को अपने गृह जिले मुंगेर में एक फुटबॉल कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि 2030 तक बिहार के किसी भी व्यक्ति को केवल शारीरिक श्रम से आजीविका कमाने के लिए दूसरे राज्य में पलायन करने पर मजबूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर सृजित करेगी।
मुख्य घोषणा और उसका दायरा
चौधरी ने तारापुर विधानसभा क्षेत्र के संग्रामपुर ब्लॉक के कहुआ गाँव में नवरात्रि के नौवें दिन आयोजित वार्षिक फुटबॉल टूर्नामेंट के फाइनल में यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल अनिवार्य श्रम-पलायन पर है — बेहतर नौकरियों, व्यावसायिक अवसरों या पेशेवर करियर के लिए युवाओं के अन्य राज्यों में जाने पर कोई रोक नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'समृद्ध बिहार' के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए अपना जीवन समर्पित करेंगे।
खेल अवसंरचना का विस्तार
इस अवसर पर चौधरी ने तारापुर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक स्टेडियम निर्माण की घोषणा की, ताकि युवा खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अगले दो महीनों के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।
यह टूर्नामेंट तारापुर क्षेत्र के पहले विधायक वासुकी राय के नाम पर बने खेल मैदान में आयोजित किया गया था। ग्रामीणों के अनुसार, कहुआ में यह फुटबॉल टूर्नामेंट 1962 से हर साल निरंतर आयोजित हो रहा है। मुख्यमंत्री ने विजेता और उपविजेता टीमों के कप्तानों को ट्रॉफियाँ प्रदान कीं।
शिक्षा क्षेत्र में की गई पहलें
चौधरी ने बताया कि बिहार में पहले केवल 272 कॉलेज थे, जबकि 15 जुलाई 2026 को राज्यभर में एक साथ 211 नए डिग्री कॉलेजों का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही राज्य में 700 'मॉडल स्कूल-सह-सरस्वती विद्या निकेतन' भी स्थापित किए गए हैं।
ये संस्थान छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कक्षाएँ प्रदान करते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी अपने गाँव छोड़े बिना विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उन्नत अध्ययन संसाधनों तक पहुँच बना सकते हैं।
आम जनता पर असर
बिहार ऐतिहासिक रूप से देश के सबसे बड़े श्रम-प्रेषण राज्यों में से एक रहा है। लाखों बिहारी मजदूर दिल्ली, मुंबई, गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों में रोजगार के लिए जाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार बुनियादी ढाँचे और शिक्षा में निवेश बढ़ाकर स्थानीय रोजगार सृजन का माहौल तैयार करने की कोशिश कर रही है।
गौरतलब है कि ऐसे वादे बिहार में पहले भी किए गए हैं — 2030 का यह नया लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब रोजगार सृजन के ठोस और मापने योग्य आँकड़े सामने आएँ।
क्या होगा आगे
तारापुर विधानसभा क्षेत्र में स्टेडियम निर्माण का काम दो महीनों में शुरू होने की घोषणा की गई है। राज्य सरकार के 2030 के रोजगार लक्ष्य को पूरा करने के लिए निजी निवेश आकर्षित करने और औद्योगिक नीति को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदमों की प्रतीक्षा रहेगी।