बिहार पंचायत चुनाव परिसीमन के बाद: सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान, 2030 से पहले 1 करोड़ रोज़गार का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 21 सितंबर 2026 को पटना में स्पष्ट किया कि राज्य में अगला पंचायत चुनाव पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आयोजित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगले वर्ष नगर निकायों के परिसीमन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पंचायत और नगर निकाय क्षेत्रों की सीमाओं का स्पष्ट निर्धारण हो सके।
कार्यक्रम और परिसीमन प्रक्रिया
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पटना में आयोजित 'ग्राम संसद-बिहार चैप्टर' के 'मुखिया संवाद' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर ग्रामीण विकास, पंचायतों की भूमिका और गाँवों को आत्मनिर्भर बनाने के विषय पर व्यापक चर्चा हुई।
उन्होंने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पंचायत चुनावों की समय-सीमा को लेकर कई तरह की अटकलें जारी थीं।
पंचायती राज में तकनीकी सुधार
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पंचायतों में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए पंचायती राज विभाग में एक इंजीनियरिंग सेल विकसित किया जाएगा। इससे मुखियाओं को विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में सीधी तकनीकी मदद मिलेगी।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से गाँवों में राजस्व के नए स्रोत विकसित करने के सुझाव देने की अपील की, ताकि कचरा प्रबंधन, पेयजल, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं में और सुधार किया जा सके। गौरतलब है कि 'सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान' के तहत प्रत्येक पंचायत में 10 विकास योजनाओं पर कार्य जारी है, जिसमें स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन और आंगनबाड़ी केंद्रों का रखरखाव शामिल है।
सरकार की जन-सेवा व्यवस्था
चौधरी ने बताया कि जनसमस्याओं के त्वरित निपटारे के लिए प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। शिविर में प्राप्त आवेदनों का निष्पादन 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को ग्राम सभा की बैठक आयोजित करने की नई व्यवस्था लागू की गई है। यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को अधिक सक्रिय और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
रोज़गार, शिक्षा और किसान कल्याण
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 से पहले 1 करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी एवं रोज़गार उपलब्ध कराना है। साथ ही बिहार में उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े।
किसानों के लिए कृषि कार्य हेतु 55 पैसे प्रति यूनिट की रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही कृषि फीडरों को सोलराइज़ करने की दिशा में काम जारी है। प्रत्येक परिवार को प्रतिमाह 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का प्रावधान भी किया गया है।
स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता और 2037 का विज़न
सम्राट चौधरी ने ऐलान किया कि बिहार में निर्मित उत्पादों — जैसे छड़ और सीमेंट — की सरकारी खरीद में कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाएगी और इसे टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत और वर्ष 2037 तक समृद्ध एवं सशक्त बिहार के निर्माण में पंचायत प्रतिनिधियों की केंद्रीय भूमिका है। 'गाँव विकसित होगा, तभी देश विकसित होगा' — इस भाव के साथ उन्होंने प्रतिनिधियों को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। परिसीमन प्रक्रिया पूरी होते ही बिहार में पंचायत चुनाव की तारीखें घोषित होने का रास्ता खुलेगा।