बिहार में पंचायत चुनाव समय पर होंगे: दीपक प्रकाश का स्पष्ट बयान
सारांश
Key Takeaways
- पंचायत चुनाव तय समय पर होंगे।
- परिसीमन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा।
- 2026 के लिए नया आरक्षण रोस्टर लागू होगा।
- सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने का प्रयास।
- नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा।
पटना, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने शनिवार को स्पष्ट किया कि बिहार में पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर ही होंगे और परिसीमन प्रक्रिया में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि प्रमुख और उप-प्रमुख के पदों के लिए चुनाव मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार ही होंगे, जैसे कि पिछले चुनावों में हुए थे।
उन्होंने यह भी बताया कि 2026 के पंचायत चुनावों के लिए एक नया आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा।
गया में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "मौजूदा व्यवस्था लगभग एक दशक से चल रही है, और इसका उद्देश्य सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व प्रदान करना है।"
गया जिले के दौरे के दौरान, मंत्री ने टंकुप्पा ब्लॉक के बरसाउना गांव में एक विवादित पंचायत भवन के निर्माण स्थल का निरीक्षण किया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य फिर से शुरू करने और उसे तेज़ी से पूरा करने का निर्देश दिया। यह परियोजना स्थानीय विरोध प्रदर्शनों के कारण रुकी हुई थी।
गया के सर्किट हाउस में उन्होंने राजनीतिक स्थिति पर भी चर्चा की।
बिहार में नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों पर उन्होंने कहा कि अगले मुख्यमंत्री के मुद्दे पर स्पष्टता सही समय पर सामने आएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य में नेतृत्व नीतीश कुमार के पास ही रहेगा, और पिछले दो दशकों में उनके सुशासन को बिहार के विकास का श्रेय दिया जाना चाहिए।
पटना के गांधी मैदान में ईद समारोह में मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर पूछे गए सवालों के जवाब में, मंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार सरकारी कार्यों में व्यस्त थे।
उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम में निशांत कुमार की उपस्थिति को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
मंत्री ने राष्ट्रीय राजनीति पर भी संक्षेप में बात की, और कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव से जुड़ी हिंसा एक बार-बार होने वाली समस्या है, लेकिन वहाँ के मतदाता भविष्य में बदलाव का विकल्प चुन सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह घोषणा सरकार के इस इरादे को दिखाती है कि वह पंचायत चुनावों को मजबूती से आगे बढ़ाने के साथ-साथ आरक्षण प्रणाली में सुधार लाकर जमीनी स्तर पर शासन को और अधिक समावेशी बनाएगी।