8 अक्टूबर 2026
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बिहार के 1 करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाएगी सरकार: सीएम सम्राट चौधरी का ₹3,500 करोड़ का ऐलान

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बिहार के 1 करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाएगी सरकार: सीएम सम्राट चौधरी का ₹3,500 करोड़ का ऐलान

सारांश

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में 1 करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाने का संकल्प दोहराया। ₹3,500 करोड़ की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना, नई एमएसएमई नीति-2026 और ₹5 लाख करोड़ के पीपीपी निवेश लक्ष्य के साथ बिहार पलायन रोकने और स्थानीय उद्योग खड़े करने की बड़ी कोशिश कर रहा है।

मुख्य बातें

बिहार सीएम सम्राट चौधरी ने 8 अक्टूबर 2026 को पटना में 1 करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाने का लक्ष्य घोषित किया।
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 45 हजार उद्यमी तैयार किए जाएँगे, जिस पर ₹3,500 करोड़ खर्च होंगे।
7 हजार से अधिक लाभार्थियों के बैंक खातों में योजना की किस्त सीधे हस्तांतरित की गई।
बिहार में पीपीपी मोड में ₹5 लाख करोड़ निवेश और अगले पाँच वर्षों में 20 हजार मेगावाट बिजली का लक्ष्य।
सरकारी खरीद में 25 से 40 प्रतिशत तक बिहार निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता देने के लिए परचेज प्रिफरेंस एक्ट लागू।
राज्य में 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल और 211 डिग्री कॉलेज स्थापित; अगले वर्ष से विज्ञान शिक्षा शुरू होगी।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 8 अक्टूबर 2026 को पटना के हबापू सभागार में राज्य के 1 करोड़ परिवारों को उद्यमिता और आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ने का संकल्प दोहराया। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत आयोजित एक दिवसीय उन्मुखीकरण एवं प्रथम किस्त वितरण कार्यक्रम में उन्होंने घोषणा की कि अगले पाँच वर्षों में उद्योग, रोज़गार, शिक्षा, आधारभूत संरचना और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम किया जाएगा।

मुख्यमंत्री उद्यमी योजना: किस्त वितरण और नई नीतियाँ

सीएम सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया और वित्तीय वर्ष 2025-26 में चयनित लाभार्थियों को सांकेतिक चेक प्रदान किए। इस अवसर पर योजना की प्रथम, द्वितीय और तृतीय किस्त के 7 हजार से अधिक लाभार्थियों के बैंक खातों में राशि सीधे हस्तांतरित की गई। साथ ही उन्होंने राज्य के सभी जिलों में स्थापित एमएसएमई केंद्रों का उद्घाटन भी किया।

इस कार्यक्रम में बिहार एमएसएमई नीति-2026, मुख्यमंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्लस्टर विकास योजना-2026 तथा सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद नियामावली-2026 पर आधारित पुस्तिकाओं का भी विमोचन किया गया। ये तीनों नई नीतियाँ बिहार के एमएसएमई क्षेत्र को एक नियामक ढाँचा प्रदान करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं।

45 हजार उद्यमी और ₹3,500 करोड़ का निवेश

मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के अंतर्गत एमएसएमई क्षेत्र में 45 हजार उद्यमी तैयार किए जा रहे हैं। इनमें 14 हजार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, 10 हजार अतिपिछड़ा वर्ग, 9,500 महिलाएँ, 9 हजार युवा और 2,500 अल्पसंख्यक वर्ग के उद्यमी शामिल हैं। राज्य सरकार इस योजना पर ₹3,500 करोड़ खर्च कर रही है।

गौरतलब है कि यह योजना समाज के उन वर्गों को मुख्यधारा की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास है, जो ऐतिहासिक रूप से औपचारिक उद्यमिता से दूर रहे हैं। प्रत्येक जिले में एमएसएमई केंद्र खोलने का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर मार्गदर्शन और सहायता सुनिश्चित करना है, ताकि युवाओं को रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन न करना पड़े।

₹5 लाख करोड़ का निवेश लक्ष्य और ऊर्जा योजनाएँ

सम्राट चौधरी ने बताया कि बिहार में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पीपीपी मोड में ₹5 लाख करोड़ का निवेश लाने का लक्ष्य रखा गया है। अगले पाँच वर्षों में उद्योगों के लिए 20 हजार मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही, कृषि फीडरों को आगामी एक वर्ष में 100 प्रतिशत सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में निर्मित वस्तुओं को सरकारी खरीद में प्राथमिकता देने के लिए परचेज प्रिफरेंस एक्ट के तहत 25 से 40 प्रतिशत तक सरकारी खरीद की जाएगी। यह कदम स्थानीय उद्योगों को बाज़ार की गारंटी देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

केंद्र से मदद और प्रधानमंत्री का आभार

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एमएसएमई क्षेत्र के लिए ₹10 हजार करोड़ का प्रावधान किया है, जिसमें से कम से कम दसवाँ हिस्सा, यानी करीब ₹1,000 करोड़, बिहार को मिलने की संभावना है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया।

शिक्षा और आधारभूत संरचना की भी बड़ी घोषणाएँ

सम्राट चौधरी ने बताया कि राज्य में 700 स्थानों पर सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल खोले गए हैं और 211 डिग्री कॉलेज स्थापित किए जा चुके हैं। अगले वर्ष से इन कॉलेजों में विज्ञान की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है। अगले दो वर्षों में राज्य के 20 महत्वपूर्ण स्थानों पर रोप-वे निर्माण का भी लक्ष्य रखा गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार लंबे समय से पलायन और औद्योगिक पिछड़ेपन की समस्या से जूझता रहा है। सरकार के इन व्यापक ऐलानों का असल परीक्षण उनके ज़मीनी क्रियान्वयन में होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बिहार की असली चुनौती हमेशा क्रियान्वयन की रही है — राज्य दशकों से बड़े औद्योगिक वादों और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई से जूझता आया है। ₹3,500 करोड़ की उद्यमी योजना में SC/ST, महिलाओं और अल्पसंख्यकों को शामिल करना समावेशी सोच दर्शाता है, पर 45 हजार उद्यमियों की तुलना में 1 करोड़ परिवारों का लक्ष्य अभी भी एक बड़ी छलाँग माँगता है। ₹5 लाख करोड़ का पीपीपी निवेश लक्ष्य बिहार के पिछले निवेशक सम्मेलनों के वादों की याद दिलाता है, जिनमें से कई कागज़ से ज़मीन तक नहीं पहुँच पाए। असली कसौटी यह होगी कि एमएसएमई केंद्र महज उद्घाटनी आयोजन बनकर न रहें, बल्कि उद्यमियों को बाज़ार, ऋण और कौशल तक सतत पहुँच दिला सकें।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री उद्यमी योजना बिहार क्या है?
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना बिहार सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसके तहत एमएसएमई क्षेत्र में 45 हजार उद्यमी तैयार किए जाएँगे और राज्य के 1 करोड़ परिवारों को उद्यमिता से जोड़ने का लक्ष्य है। इस पर राज्य सरकार ₹3,500 करोड़ खर्च कर रही है।
बिहार एमएसएमई नीति-2026 में क्या नया है?
बिहार एमएसएमई नीति-2026 को 8 अक्टूबर 2026 को पटना में लॉन्च किया गया। इसके साथ मुख्यमंत्री क्लस्टर विकास योजना-2026 और सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद नियामावली-2026 भी जारी की गई, जो एमएसएमई क्षेत्र को एक व्यापक नियामक और प्रोत्साहन ढाँचा प्रदान करती है।
बिहार में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से किन वर्गों को लाभ मिलेगा?
इस योजना के तहत 14 हजार SC/ST, 10 हजार अतिपिछड़ा वर्ग, 9,500 महिलाएँ, 9 हजार युवा और 2,500 अल्पसंख्यक वर्ग के उद्यमी शामिल हैं। योजना का उद्देश्य समाज के हाशिये पर रहे वर्गों को औपचारिक उद्यमिता की मुख्यधारा में लाना है।
बिहार सरकार का निवेश और ऊर्जा लक्ष्य क्या है?
बिहार सरकार ने पीपीपी मोड में ₹5 लाख करोड़ का निवेश लाने और अगले पाँच वर्षों में उद्योगों के लिए 20 हजार मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इसके अतिरिक्त, एक वर्ष में कृषि फीडरों को 100 प्रतिशत सौर ऊर्जा से जोड़ने की भी योजना है।
केंद्र सरकार से बिहार को एमएसएमई के लिए कितनी मदद मिल सकती है?
सीएम सम्राट चौधरी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एमएसएमई क्षेत्र के लिए ₹10 हजार करोड़ का प्रावधान किया है, जिसमें से कम से कम दसवाँ हिस्सा यानी करीब ₹1,000 करोड़ बिहार को मिलने की संभावना है। इससे राज्य के छोटे और मध्यम उद्यमों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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