क्या बिहार चुनाव में बहादुरपुर विधानसभा की जनता की ताकत का असर होगा?

सारांश
Key Takeaways
- बहादुरपुर सीट का गठन 2008 में हुआ था।
- यह सीट दरभंगा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
- यहां की महिला मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।
- कृषि मुख्य व्यवसाय है, लेकिन युवाओं का पलायन जारी है।
- आसपास के कस्बों से सीधा संपर्क है।
पटना, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। दरभंगा जिले के दक्षिणी हिस्से में स्थित बहादुरपुर विधानसभा सीट बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। वर्ष 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद इस सीट का गठन हुआ और 2010 में यहां पहला विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ। यह सीट बहादुरपुर और हनुमान नगर प्रखंडों से मिलकर बनी है और दरभंगा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
अब तक यहां तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और हर बार चुनावी समीकरण में बदलाव देखने को मिला है।
बहादुरपुर, दरभंगा शहर से लगभग 10 किलोमीटर दक्षिण और पटना से करीब 140 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। इसके आसपास लहेरियासराय, मनीगाछी और समस्तीपुर जैसे कस्बों से इसका सीधा संपर्क है। सड़क और रेल नेटवर्क के लिहाज से यह क्षेत्र अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है, हालांकि औद्योगिक विकास का अभाव होने के कारण अर्थव्यवस्था अब भी कृषि पर निर्भर है।
यहां की उपजाऊ भूमि पर धान, गेहूं, मक्का और दालों की खेती प्रमुख है, लेकिन युवाओं का रोजगार और अवसरों के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन जारी है।
कृषि यहां का मुख्य व्यवसाय है। बहादुरपुर से लगभग 33 किलोमीटर पूर्व में कमला नदी बहती है। इस क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां सीमित हैं और रोजगार की तलाश में लोगों का पलायन आम बात है।
बहादुरपुर सीट पर 2010 में हुए पहले चुनाव में जेडीयू के मदन साहनी ने राजद के भोला यादव को मात देकर कब्जा जमाया। 2015 के चुनाव में जेडीयू-आरजेडी गठबंधन के चलते समीकरण बदले और भोला यादव ने भाजपा उम्मीदवार हरी साहनी को हराया।
इसके बाद 2020 में जेडीयू ने भाजपा के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरते हुए फिर से बाजी मारी और मदन साहनी ने राजद के रमेश चौधरी को शिकस्त दी।
चुनाव आयोग के 2024 के आंकड़े बताते हैं कि बहादुरपुर विधानसभा क्षेत्र की कुल अनुमानित जनसंख्या 5,24,087 है, जिनमें 2,75,219 पुरुष और 2,48,868 महिलाएं शामिल हैं।
वहीं, मतदाताओं की संख्या 3,11,991 है, जिनमें 1,65,032 पुरुष, 1,46,947 महिलाएं और 12 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। इन आंकड़ों से यह साफ है कि महिला मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।