क्या बिहार चुनाव में महागठबंधन में टिकट वितरण पर तारिक अनवर का बयान महत्वपूर्ण है?
सारांश
Key Takeaways
- तारिक अनवर ने चुनावी मुद्दों को सुलझाने की पुष्टि की।
- महागठबंधन में नई पार्टियों का समावेश महत्वपूर्ण है।
- भारत की गुटनिरपेक्ष नीति को बनाए रखना आवश्यक है।
- मतदाता सूची में पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियाद है।
- चुनाव आयोग को विपक्ष की शिकायतों को गंभीरता से लेना चाहिए।
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने गुरुवार को बिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के नामों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चल रहे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ मामले लंबित हैं, लेकिन इन मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में कहा कि नामांकन की वास्तविक अवधि कल तक है और उसके बाद नाम वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होगी। अनवर ने बताया कि एक-दो मामले अभी लंबित हैं, लेकिन पार्टी इन मुद्दों को सुलझाने की पूरी कोशिश कर रही है। हमारा प्रयास है कि इंडिया गठबंधन में किसी प्रकार की कोई टूट न हो और प्रत्येक सीट पर एक ही उम्मीदवार चुनाव लड़े।
कांग्रेस द्वारा कम सीटों पर समझौता करने के सवाल पर तारिक अनवर ने कहा कि इस बार महागठबंधन में कई नई पार्टियां शामिल हुई हैं, इसलिए सबको साथ लेकर चलना और उन्हें समायोजित करना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस गठबंधन की मजबूती और एकता बनाए रखने के लिए रचनात्मक भूमिका निभा रही है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए तारिक अनवर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा। अनवर ने कहा, “अगर डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ऐसा कोई दबाव है तो भारत को इसे कभी स्वीकार नहीं करना चाहिए। भारत की विदेश नीति हमेशा गुटनिरपेक्ष रही है और हमने अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार ही निर्णय लिए हैं। किसी भी विदेशी नेता को हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने या दबाव डालने का अधिकार नहीं है।”
वहीं, महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट को लेकर विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर तारिक अनवर ने कहा कि मामला गंभीर है और चुनाव आयोग को विपक्षी पार्टियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और निष्पक्षता लोकतंत्र की बुनियाद है, इसलिए आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी मतदाता के अधिकारों का हनन न हो।