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क्या हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी पेंशनर्स का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन समय पर पेंशन न मिलने का परिणाम है?

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क्या हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी पेंशनर्स का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन समय पर पेंशन न मिलने का परिणाम है?

सारांश

हिमाचल प्रदेश के एचआरटीसी पेंशनर्स ने समय पर पेंशन न मिलने के कारण सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका आक्रोश इस बात से बढ़ा है कि पेंशन की किश्तों में वितरण और मेडिकल बिलों का भुगतान नहीं हो रहा है। क्या इस समस्या का समाधान होगा?

मुख्य बातें

समय पर पेंशन का भुगतान न होना एक बड़ी समस्या है।
पेंशन की किश्तों में वितरण से असमानता बढ़ रही है।
सरकार को पेंशनर्स के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
प्रदर्शन से सरकार की नीतियों पर दबाव बढ़ता है।
पेंशनर्स की मांगें सुनना आवश्यक है।

शिमला, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश में हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की समस्याएं एक बार फिर सरकार के सामने गंभीर चुनौती बनकर उभरी हैं। समय पर पेंशन का भुगतान न होने, पेंशन को किश्तों में जारी करने और मेडिकल सहित अन्य लंबित बिलों को लेकर पेंशनर्स में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

पेंशनर्स को अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, जो सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

बुधवार को एचआरटीसी से सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने ऊना जिला मुख्यालय स्थित पुराने बस अड्डा परिसर में प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। हिमाचल पथ परिवहन निगम सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण संगठन की बैठक के दौरान पेंशनर्स ने नारेबाजी करते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की।

पेंशनर्स का कहना है कि जीवन के इस नाजुक दौर में उन्हें नियमित और सम्मानजनक पेंशन मिलनी चाहिए, लेकिन इसके उलट उन्हें बार-बार संघर्ष करना पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पेंशन को अलग-अलग आयु वर्गों में बांटकर किश्तों में देना शुरू कर दिया है, जिससे असमानता और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। वर्तमान व्यवस्था के तहत 75 वर्ष से अधिक, 65 वर्ष से अधिक, 63 वर्ष से अधिक और 58 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनर्स को अलग-अलग समय पर पेंशन दी जा रही है। इससे न केवल पेंशनर्स को आर्थिक परेशानी हो रही है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है।

हिमाचल पथ परिवहन निगम सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण संगठन के पदाधिकारी नरेश शर्मा ने सरकार की इस नीति पर ऐतराज जताया।

उन्होंने कहा कि कड़ाके की ठंड में बुजुर्ग पेंशनर्स को प्रदर्शन के लिए मजबूर होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और मांग की कि सभी पेंशनर्स को एक समान और एकमुश्त पेंशन दी जाए ताकि उन्हें हर महीने अपनी जरूरतों के लिए भटकना न पड़े।

पेंशनर्स ने यह भी सवाल उठाया कि जब निगम में कार्यरत कर्मचारियों को सरकार द्वारा 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) की किश्त जारी कर दी गई है, तो पेंशनर्स को इससे क्यों वंचित रखा गया है।

प्रदर्शन के दौरान नरेश शर्मा ने कहा, "इतनी ठंड में सभी पेंशनर्स को यहां आना पड़ रहा है। हमारी पेंशन समय से नहीं मिल रही। पिछले महीने की पेंशन चार किश्तों में दी गई। सभी कर्मचारियों को एकमुश्त पेंशन मिलनी चाहिए। दूसरे कर्मचारियों को तीन प्रतिशत डीए दे दिया गया है, लेकिन हमें उससे वंचित रखा गया है। रिटायरमेंट के बाद मेडिकल बिलों का भी कोई भुगतान नहीं हो रहा। अगर सरकार समय पर पेंशन दे, तो हमें संगठन बनाने या आंदोलन करने की जरूरत ही न पड़े।"

पेंशनर्स ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि हर महीने पहली तारीख को पेंशन जारी करने की व्यवस्था जल्द नहीं की गई, तो सेवानिवृत कर्मचारियों की संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है। समय पर पेंशन का न मिलना न केवल आर्थिक समस्या है, बल्कि यह मानसिक तनाव का कारण भी बन रहा है। सरकार को इस स्थिति को तत्काल सुलझाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एचआरटीसी पेंशनर्स का प्रदर्शन क्यों हो रहा है?
एचआरटीसी पेंशनर्स का प्रदर्शन समय पर पेंशन न मिलने और पेंशन को किश्तों में बांटने के कारण हो रहा है।
क्या पेंशनर्स को समान पेंशन मिल रही है?
नहीं, पेंशनर्स को अलग-अलग आयु वर्गों में पेंशन मिल रही है, जिससे असमानता हो रही है।
सरकार ने पेंशन के मामले में क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता कार्यरत कर्मचारियों को दिया है, लेकिन पेंशनर्स को अभी तक नहीं मिला है।
राष्ट्र प्रेस
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