ओडिशा BJP सरकार के 2 साल: OPCC अध्यक्ष भक्त चरण दास बोले — युवा, महिला, बुजुर्ग सब परेशान
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने 14 जून 2026 को भुवनेश्वर में प्रेस को संबोधित करते हुए राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जहाँ सरकार जश्न मनाने में व्यस्त है, वहीं राज्य के युवा, महिलाएँ और बुजुर्ग बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
सरकार के दो साल पर सवाल
दास ने कहा कि BJP सरकार उपलब्धियों का उत्सव मना रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उनके अनुसार राज्य के बड़ी संख्या में श्रमिक रोज़गार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हैं और उनकी दशा पर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बुजुर्गों को समय पर पेंशन नहीं मिल रही, जिससे उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हो रही है।
आलोचकों का कहना है कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में बढ़ोतरी और सामाजिक तनाव के बीच प्रशासनिक व्यवस्था कमज़ोर पड़ी है। दास ने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता की कमी है और अयोग्य व्यक्तियों की नियुक्तियाँ संस्थागत गुणवत्ता को नुकसान पहुँचा रही हैं।
पंचायत राज और शिक्षा पर आरोप
OPCC अध्यक्ष ने दावा किया कि पंचायत राज व्यवस्था के अधिकारों में कटौती की गई है और स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका को सीमित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ा है, जिससे शैक्षणिक स्वतंत्रता और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। गौरतलब है कि पंचायती राज संस्थाओं के अधिकारों का प्रश्न ओडिशा में लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है।
महिला सरपंच उत्पीड़न मामला
केंद्रपाड़ा जिले के महाकालपाड़ा ब्लॉक की तिखिरी ग्राम पंचायत की सरपंच चमेली ओझा के कथित उत्पीड़न और गिरफ्तारी के मामले पर दास ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का सीधा परिणाम है — यदि किसी परियोजना को स्वीकृति मिली थी, तो उसका समय पर क्रियान्वयन और धनराशि जारी करना प्रशासन की ज़िम्मेदारी थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरपंच के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया और उनका मोबाइल फोन छीने जाने जैसी घटनाएँ सामने आई हैं। दास ने माँग की कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, सरपंच ओझा पर दर्ज मामले वापस लिए जाएँ और उन्हें उचित मुआवज़ा दिया जाए। उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को सम्मानपूर्वक सुना जाना चाहिए, न कि टकराव की स्थिति पैदा की जानी चाहिए।
EVM विवाद और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर चिंता
दास ने पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर 4,000 EVM जलने की घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि EVM से जुड़े विवादों के कारण मतदाताओं में अविश्वास का माहौल बन रहा है और ऐसे मामलों की पारदर्शी जाँच होनी चाहिए।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करना सभी राजनीतिक दलों की साझी ज़िम्मेदारी है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल पूरे देश में चुनावी पारदर्शिता को लेकर लगातार आवाज़ उठा रहे हैं।
आगे क्या
OPCC ने संकेत दिया है कि वह सरपंच चमेली ओझा के मामले को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रखेगी। BJP सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राज्य में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।