ओडिशा CM माझी ने गिनाईं दो वर्षों की उपलब्धियाँ: किसान आत्महत्या रोकथाम और शिकायत निवारण सबसे आगे
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 12 जून 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री शिकायत निवारण प्रकोष्ठ के पुनरुद्धार और किसान-केंद्रित योजनाओं के ज़रिये किसानों की आत्महत्याओं पर अंकुश लगाने को अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियाँ बताया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में माझी ने कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों और भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनाई गई नीति का भी विस्तार से उल्लेख किया।
शिकायत निवारण प्रकोष्ठ: जन समस्याओं का सीधा समाधान
मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि मुख्यमंत्री शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में नियमित सुनवाई से आम नागरिकों की विभिन्न समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव हो सका है। उन्होंने इसे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक ठोस कदम बताया। यह प्रकोष्ठ पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में निष्क्रिय पड़ा था, और BJP सरकार ने सत्ता में आते ही इसे पुनः सक्रिय किया।
किसान आत्महत्या रोकथाम: सरकार का दावा
माझी ने कहा कि उनकी सरकार ने समृद्ध कृषक योजना, प्रधानमंत्री-किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री-किसान योजना के तहत किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनकी आजीविका में सुधार किया है। उनके अनुसार इन प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य में संकटग्रस्त किसान आत्महत्याओं में कमी आई है। हालाँकि, सरकार ने इस दावे की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र आँकड़ा या तुलनात्मक डेटा सार्वजनिक नहीं किया।
भ्रष्टाचार और चिट फंड घोटाले
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके प्रशासन ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। चिट फंड घोटालों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि आरोपियों की संपत्तियों की नीलामी शुरू की जा चुकी है और वैध रसीदें प्रस्तुत करने वाले वास्तविक जमाकर्ताओं को धनराशि वापस करने की प्रक्रिया भी आरंभ हो गई है। इसके अलावा, राज्य के वरिष्ठ नागरिकों को मासिक पेंशन देने की योजना जारी है।
क्षेत्रीय विकास और संतुलन की चुनौती
माझी ने उत्तर ओडिशा विकास परिषद, दक्षिण ओडिशा विकास परिषद और पश्चिमी ओडिशा विकास परिषद से जुड़ी चिंताओं को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि उत्तरी ओडिशा विकास परिषद के लिए ₹200 करोड़ के आवंटन के साथ एक कार्यबल गठित किया गया है। संबलपुर में पश्चिमी ओडिशा विकास परिषद का मुख्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव विभिन्न जिलों की परस्पर विरोधी माँगों के कारण विलंबित हुआ है, यह उन्होंने स्वयं स्वीकार किया।
आगे की चुनौतियाँ
मुख्यमंत्री ने माना कि आने वाले समय में युवाओं के लिए पर्याप्त रोज़गार के अवसर पैदा करना और अल नीनो जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे का सामना करना उनकी सरकार के सामने दो सबसे बड़ी चुनौतियाँ होंगी। यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय में आई है जब ओडिशा के कई जिले सूखे और अनियमित मानसून से प्रभावित रहे हैं। आने वाले महीनों में सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन और उनके ज़मीनी परिणाम ही इन दावों की असली कसौटी होंगे।