भोजपुर थाने में होमगार्ड जवान की गोली लगने से मौत, SP बोले — हत्या या हादसा, जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भोजपुर जिले के संदेश थाना परिसर में रविवार रात करीब 10 बजे गोली लगने से 25 वर्षीय होमगार्ड जवान मोनल कुमार राय की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, गोली उनके सहकर्मी की सर्विस राइफल से चली थी। पुलिस ने राइफल बरामद कर ली है और मामले की जांच हादसे तथा हत्या — दोनों कोणों से की जा रही है।
घटनाक्रम: रात को थाने में चली गोली
मोनल कुमार राय सहार थाना क्षेत्र के गुलजारपुर गाँव के निवासी थे। रविवार देर रात संदेश थाना परिसर में अचानक गोली चलने की घटना हुई। गोली लगने के बाद जवान को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
जिस सहकर्मी जवान की राइफल से गोली चलने की बात कही जा रही है, वह घटना के कुछ समय बाद थाना परिसर से चला गया। पुलिस का कहना है कि वह उस जवान के परिजनों के संपर्क में है और सामने आने पर उसका पक्ष भी दर्ज किया जाएगा।
जांच अधिकारी की प्रतिक्रिया
भोजपुर के पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने बताया कि जवान की मौत गोली लगने से हुई है, यह तथ्यात्मक रूप से स्थापित है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल का विधिवत निरीक्षण कराया गया और फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम ने मौके से साक्ष्य एकत्र किए हैं।
दीक्षित के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में संपन्न हुई और उसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी यह तय नहीं हो सका है कि गोली गलती से चली थी या जानबूझकर दागी गई — जांच पूरी होने पर ही वास्तविक कारण सामने आएगा।
परिजनों का आरोप और पुलिस का रुख
मृतक जवान के परिजनों ने इस घटना को हत्या बताया है। एसपी दीक्षित ने इस पर कहा कि यह जांच का विषय है — पुलिस किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी पहलुओं को खंगाल रही है। गौरतलब है कि थाना परिसर के भीतर इस तरह की घटना प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करती है।
परिवार को मिलने वाली सहायता
एसपी ने बताया कि मृतक के परिजनों को होमगार्ड के प्रावधानों के अंतर्गत सहायता दी जाएगी। तत्काल सहायता योजना के तहत राशि पहले ही दी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, आश्रित परिवार को दो वर्ष तक ₹2,000 प्रतिमाह देने का प्रावधान है। ऑन-ड्यूटी मृत्यु पर लागू अन्य मुआवजे और सुविधाएँ भी नियमानुसार प्रदान की जाएँगी।
आगे क्या होगा
FSL रिपोर्ट और मजिस्ट्रेट जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद पुलिस घटना की आधिकारिक परिस्थितियाँ स्पष्ट करेगी। सहकर्मी जवान के सामने आने और उसका बयान दर्ज होने के बाद मामले में नई स्पष्टता आ सकती है। यह देखना होगा कि जांच किस दिशा में जाती है — आकस्मिक गोली चलने का मामला या कुछ और।