बिहार की सतत जीविकोपार्जन योजना पर राष्ट्रीय मंथन, नोबेल विजेता एस्थर डुफ्लो ने रखा वैश्विक दृष्टिकोण
सारांश
मुख्य बातें
पटना में 16 अक्टूबर 2026 को जे-पाल साउथ एशिया और जीविका के संयुक्त आयोजन में बिहार की सतत जीविकोपार्जन योजना के एक दशक के अनुभवों और साक्ष्यों पर राष्ट्रीय मंथन हुआ, जिसका केंद्रीय संदेश 'बिहार से भारत तक' रहा। इस विमर्श में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विकास विशेषज्ञों ने भाग लिया।
मुख्य घटनाक्रम
कार्यक्रम का उद्घाटन जे-पाल साउथ एशिया की कार्यकारी निदेशक शोभिनी मुखर्जी के संबोधन से हुआ। उन्होंने योजना के मूल्यांकन से प्राप्त साक्ष्यों और अनुभवों को नीतिगत निर्णयों में एकीकृत करने के महत्व को रेखांकित किया।
जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अनन्या सिंह ने योजना के मॉडल, कार्यप्रणाली और पिछले एक दशक की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। इस दौरान योजना पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
विशेषज्ञों का योगदान
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) की प्रोफेसर, जे-पाल की सह-संस्थापक और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित एस्थर डुफ्लो ने अत्यधिक गरीबी उन्मूलन में 'ग्रेजुएशन अप्रोच' की वैश्विक प्रासंगिकता पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। उनकी उपस्थिति इस कार्यक्रम को वैश्विक नीति-विमर्श के मानचित्र पर स्थापित करती है।
योजना के मूल्यांकन सत्र में डॉ. एमआर शरण, डॉ. ज्योति मुखोपाध्याय और डॉ. शगुन सबरवाल ने योजना के प्रभावों और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की।
सरकार की प्रतिक्रिया
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने ग्रामीण विकास में नवाचार और प्रभावी समाधान तैयार करने के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। बिहार सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय विकास विभाग के सचिव अरविंद कुमार चौधरी और ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एचआर श्रीनिवास ने भी ग्रामीण विकास में योजना की भूमिका को रेखांकित किया।
योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव बालामुरुगन डी. और एनबीपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक राहुल कुमार ने भी योजना के दीर्घकालिक विस्तार पर विचार साझा किए।
आम जनता पर असर
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब केंद्र सरकार ग्रामीण गरीबी उन्मूलन के लिए 'ग्रेजुएशन अप्रोच' को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने पर विचार कर रही है। बिहार में पिछले एक दशक में विकसित इस मॉडल के तहत अत्यंत गरीब परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपनाए गए तरीकों को देश के अन्य राज्यों में भी लागू किए जाने की संभावना पर चर्चा हुई।
गौरतलब है कि यह योजना ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सीधे आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ती है, जिससे न केवल आय बढ़ती है बल्कि सामाजिक सुरक्षा जाल भी मज़बूत होता है।
क्या होगा आगे
कार्यक्रम में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर योजना को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। साक्ष्य-आधारित नीतियों, संस्थागत सहयोग और निरंतर नवाचार के ज़रिए ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों को अधिक प्रभावशाली बनाने पर सहमति बनी। जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा ने इस दिशा में आगे के कदमों की रूपरेखा साझा की और कार्यक्रम के समापन पर अनन्या सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।