क्या तेजस्वी यादव गुम हैं और तेज प्रताप यादव छाए हुए हैं?

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क्या तेजस्वी यादव गुम हैं और तेज प्रताप यादव छाए हुए हैं?

सारांश

बिहार में मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा-दही भोज ने राजनीतिक ज्वाला भड़काई है। शिवानंद तिवारी ने तेजस्वी यादव को कटघरे में खड़ा करते हुए तेज प्रताप यादव की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। जानिए इस घटना का राजनीतिक परिप्रेक्ष्य क्या है।

Key Takeaways

  • चूड़ा-दही भोज का आयोजन राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
  • तेज प्रताप यादव की उपस्थिति ने राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया।
  • राजद के कार्यकर्ताओं को ऊर्जा देने की आवश्यकता है।

पटना, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा-दही भोज को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस संदर्भ में राजद के पूर्व अध्यक्ष लालू यादव के निकट सहयोगी शिवानंद तिवारी ने तेज प्रताप यादव के चूड़ा-दही भोज के माध्यम से विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को कटघरे में खड़ा किया है।

पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने बुधवार को अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि आज मकर संक्रांति का दही चूड़ा भोज राजनीतिक रंग में रंगा हुआ है। इस रंग में एक ही व्यक्ति प्रमुखता से नजर आ रहा है और वह हैं तेज प्रताप, जबकि तेजस्वी पूरी तरह से ओझल हैं।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास की ओर इशारा करते हुए आगे कहा, "10 नंबर में सन्नाटा है। वही 10 नंबर जहां बिहार के विभिन्न क्षेत्रों से राजद कार्यकर्ता आते थे। दही चूड़ा तो बस एक बहाना था; असल में नेताओं से मिलने की होड़ होती थी। दर्शन-परस और दण्ड प्रणाम किया जाता था। सभी यहां से नई ऊर्जा के साथ अपने-अपने क्षेत्रों में लौटते थे।"

उन्होंने बताया कि आज इसकी अधिक आवश्यकता थी। चुनाव परिणामों से निराश कार्यकर्ताओं को हौंसला देने की जरूरत थी। लेकिन जब नेता ही हताश हैं और मैदान में कहीं नजर नहीं आ रहे हैं, तो ऐसे में दल को कौन ऊर्जा देगा?

शिवानंद तिवारी ने कहा कि आज तेजस्वी गायब हैं, और तेज प्रताप छाए हुए हैं। जिन लोगों ने तेजस्वी को मुख्यमंत्री की शपथ दिलाने के लिए तारीख तय करवाई थी और इस प्रक्रिया में तेज प्रताप को एक बड़ा अवरोध मानकर बाहर किया था, वे लोग अब कहां हैं? दरअसल, बुधवार को जनशक्ति जनता दल के नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने अपने सरकारी आवास पर चूड़ा दही भोज का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम की चर्चा बिहार की राजनीति में खूब हो रही है। इस आयोजन में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और राजद अध्यक्ष लालू यादव के अलावा एनडीए के कई नेता भी शामिल हुए। वहीं, राबड़ी देवी का आवास वीरान रहा, जबकि यहां हर साल मकर संक्रांति पर चूड़ा दही भोज की दावत होती थी।

Point of View

बल्कि नेताओं की सक्रियता और कार्यकर्ताओं के मनोबल को परखने का एक अवसर भी है। शिवानंद तिवारी के बयान से यह साफ हो जाता है कि पार्टी के भीतर की स्थिति क्या है।
NationPress
14/01/2026

Frequently Asked Questions

चूड़ा-दही भोज का राजनीतिक महत्व क्या है?
चूड़ा-दही भोज बिहार में एक पारंपरिक कार्यक्रम है, जो राजनीतिक संवाद और कार्यकर्ताओं की एकता को बढ़ावा देता है।
तेजस्वी यादव क्यों गुम हैं?
शिवानंद तिवारी के अनुसार, तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति पार्टी की स्थिति को कमजोर कर रही है।
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