बिहार MLC चुनाव 2026: दोपहर 12 बजे तक शिक्षक सीटों पर 30.19% और स्नातक सीटों पर 12.88% मतदान
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों — चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों — पर शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान जारी रहा। दोपहर 12 बजे तक के आँकड़ों के अनुसार, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 30.19 प्रतिशत और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में 12.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कुल 150 प्रत्याशी इन सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
क्षेत्रवार मतदान के आँकड़े
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में कोसी सबसे आगे रहा, जहाँ 17.94 प्रतिशत मतदान हुआ। पटना स्नातक में 15.02 प्रतिशत, दरभंगा में 13 प्रतिशत और तिरहुत में सबसे कम 5.55 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सारण शीर्ष पर रहा, जहाँ 42.55 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 37.50 प्रतिशत, पटना शिक्षक में 30.06 प्रतिशत और तिरहुत शिक्षक में 10.64 प्रतिशत मतदान हुआ। गौरतलब है कि शिक्षक सीटों पर मतदान प्रतिशत, स्नातक सीटों की तुलना में कहीं अधिक रहा।
एनडीए प्रत्याशी का दावा
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) समर्थित जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रत्याशी नीरज कुमार ने अपनी जीत को लेकर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा, 'न घबराता हूं, न किसी दूसरे को डराता हूं। हम अड़ने वाले हैं, गिरने वाले नहीं हैं, क्योंकि हम परशुराम वंशी हैं और समाज के सारे तबकों का विश्वास हमें प्राप्त है।'
नीरज कुमार ने विश्वास जताया कि स्नातक मतदाता उन्हें चौथी बार अपना आशीर्वाद देंगे और उन्हें परिणाम को लेकर कोई संशय नहीं है।
राजनीतिक विवाद और हिरासत
मतदान के बीच पटना से एक विवादित घटनाक्रम सामने आया। जदयू से निष्कासित पूर्व नेता छोटू सिंह को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर जक्कनपुर थाने लाए जाने की सूचना है। छोटू सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर रोका गया, हालाँकि उन्हें किस विशेष मामले में हिरासत में लिया गया, इस बारे में आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
चुनावी प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था
मतदान सुबह आठ बजे से शुरू हुआ और शांतिपूर्ण माहौल में जारी रहा। निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीतिक पार्टियों की नज़रें अंतिम मतदान प्रतिशत और नतीजों पर टिकी हुई हैं।
विधान परिषद की ये सीटें स्नातक और शिक्षक मतदाताओं द्वारा भरी जाती हैं, जो आम विधानसभा चुनावों से भिन्न प्रक्रिया है — इसीलिए मतदान प्रतिशत परंपरागत रूप से कम रहता है। मतदान के समाप्त होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किस गठबंधन ने अपने मतदाताओं को बेहतर ढंग से मतदान केंद्रों तक लाने में सफलता पाई।