बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर मतगणना शुरू, 150 प्रत्याशियों की किस्मत आज होगी तय
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर 27 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजे से मतगणना आरंभ हो गई, जिससे 23 अक्टूबर को हुए मतदान के बाद 150 प्रत्याशियों की राजनीतिक किस्मत का फैसला होना है। इन सीटों में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं, और चुनाव आयोग के अनुसार परिणाम शाम तक आने की संभावना है।
मतगणना का ढाँचा और केंद्र
मतगणना के लिए सभी संबंधित प्रमंडलीय मुख्यालयों में केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहाँ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतों की गिनती जारी है। चुनाव आयोग (ECI) ने बताया कि मतगणना को लेकर सभी आवश्यक तैयारियाँ पहले ही पूरी कर ली गई थीं और निगरानी के लिए प्रेक्षकों तथा कर्मियों की तैनाती की गई है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से 90 प्रत्याशी और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से 60 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। प्रत्याशियों की संख्या के लिहाज से दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सबसे आगे रहा, जहाँ 40 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। पटना शिक्षक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 18-18 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होगा।
पटना स्नातक सीट पर विशेष निगाहें
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र इस चुनाव में राजनीतिक रूप से सबसे अधिक चर्चित रहा है। मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने इस सीट पर जन सुराज समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन जताया था, जिससे इस सीट का परिणाम उनकी राजनीतिक साख से भी जुड़ा माना जा रहा है। गौरतलब है कि चुनाव प्रचार के दौरान यह सीट असाधारण रूप से चर्चा में रही।
किस दल ने कितनी सीटों पर लड़ा चुनाव
भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) ने 4-4 सीटों पर प्रत्याशी उतारे। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने 6 सीटों पर और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने 5 सीटों पर चुनाव लड़ा। जन सुराज पार्टी ने सभी 8 निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे, जो इस दल के विस्तार की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में विभिन्न दलों के बीच स्थानीय स्तर पर प्रभाव की होड़ तेज हो गई है। विधान परिषद के ये चुनाव परिणाम दलों की ज़मीनी पकड़ का एक महत्वपूर्ण संकेतक माने जा रहे हैं।
मतगणना की प्रक्रिया
मतगणना में पहले प्रथम वरीयता के मतों की गिनती होगी। यदि इसके आधार पर कोई प्रत्याशी जीत की स्थिति में नहीं पहुँचता, तो द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती की जाएगी। यह प्रक्रिया अंतिम विजेता का निर्धारण होने तक जारी रहेगी। यह वरीयता-आधारित प्रणाली विधान परिषद चुनावों की विशेषता है।
मतगणना में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम पहले आने की संभावना है, क्योंकि इन सीटों पर मतदाताओं की संख्या स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में कम है। हालाँकि, मतदान प्रतिशत के मामले में शिक्षक मतदाता आगे रहे थे।
परिणामों का राजनीतिक महत्व
इन 8 सीटों के नतीजे न केवल प्रत्याशियों की व्यक्तिगत स्थिति स्पष्ट करेंगे, बल्कि पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी जैसे प्रमुख स्नातक क्षेत्रों में विभिन्न दलों के जनाधार का आकलन भी प्रस्तुत करेंगे। इस समय सभी की निगाहें मतगणना की अंतिम स्थिति पर टिकी हैं, जो बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर को और स्पष्ट करेगी।