बिहार विधान परिषद चुनाव 2026: एनडीए ने प्रचार के अंतिम दिन झोंकी पूरी ताकत, आठों सीटें जीतने का दावा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ 21 अक्टूबर 2026 को अपने चरम पर पहुँच गईं, क्योंकि बुधवार को प्रचार अभियान का अंतिम दिन था और शाम ढलते ही प्रचार पर आधिकारिक रोक लग गई। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने सभी आठ सीटों पर भारी मतों से जीत का दावा करते हुए गठबंधन की पूरी ताकत मैदान में उतार दी।
एनडीए का आत्मविश्वास और प्रचार अभियान
बिहार के उपमुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने दावा किया कि पूरे प्रदेश में एनडीए के पक्ष में स्पष्ट माहौल है। उन्होंने कहा, 'हम लोग भी घूमे हैं। पूरे प्रदेश का जो माहौल है, एनडीए के आठों उम्मीदवार भारी मतों से जीतेंगे।' उपमुख्यमंत्री की यह टिप्पणी चुनावी अभियान के समापन पर गठबंधन के भरोसे की अभिव्यक्ति के रूप में देखी जा रही है।
गौरतलब है कि चौधरी ने स्वयं राज्य के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा कर मतदाताओं से संपर्क साधा और जमीनी स्थिति का आकलन किया। यह ऐसे समय में आया है जब विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला कड़ा बताया जा रहा है।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: नवल किशोर यादव का अनूठा अंदाज़
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए प्रत्याशी नवल किशोर यादव ने अपने चुनाव प्रचार को लेकर एक अलग ही रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उनके लिए प्रचार-व्यवस्था उनके मतदाता और शिक्षक समुदाय स्वयं कर रहा है। यादव ने कहा, 'मेरी तैयारी मेरे मतदाता करते हैं, मेरे शिक्षक करते हैं। उन्होंने सारा इंतजाम पहले से कर रखा है, मुझे कुछ करने की जरूरत नहीं। मैं क्षेत्र भी नहीं जाता हूं, मैं अपने दफ्तर में बैठता हूं और आप लोगों से मिलता हूं।'
उन्होंने शिक्षक समुदाय को देश का सबसे बौद्धिक वर्ग बताते हुए कहा कि शिक्षक अपने सम्मान, स्वाभिमान और अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग हैं। उनके अनुसार, इस समुदाय को किसी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी या समझाने की आवश्यकता नहीं है।
चुनावी प्रतिस्पर्धा और समग्र तस्वीर
बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। प्रचार के अंतिम दिन उम्मीदवारों और उनके समर्थकों ने अपनी पूरी ऊर्जा मतदाताओं तक पहुँचने में लगाई। यह उल्लेखनीय है कि बिहार विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता एक विशिष्ट और शिक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से अलग अपना स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति में एनडीए गठबंधन अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा है। आलोचकों का कहना है कि जीत के दावे चुनावी सियासत का हिस्सा हैं और असली तस्वीर मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी।
आगे क्या होगा
प्रचार थमने के बाद सभी दलों का ध्यान अब मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित होगा। मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ ही बिहार विधान परिषद की इन सीटों का परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगा और आगामी चुनावों के लिए महत्त्वपूर्ण संकेत देगा।