राज्यसभा चुनाव: एनडीए के सभी पांच उम्मीदवारों की जीत की संभावना, विपक्ष की चिंता बढ़ी
सारांश
Key Takeaways
- राज्यसभा चुनाव १६ मार्च को होने वाले हैं।
- एनडीए ने पांच उम्मीदवार खड़े किए हैं।
- विपक्ष की स्थिति चिंताजनक है।
- बिहार विधानसभा में २४३ सदस्य हैं।
- एक उम्मीदवार को जीतने के लिए ४१ वोट की आवश्यकता है।
पटना, १५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए १६ मार्च को होने वाले मतदान के लिए दोनों गठबंधनों में विचार-विमर्श जारी है। इस दौरान, एनडीए के विधायकों और नेताओं की लगातार बैठकें हो रही हैं।
इसी बीच, जदयू के वरिष्ठ नेता और बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने रविवार को यह दावा किया है कि एनडीए के सभी पांच उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित है। बिहार के मंत्री चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा, "एनडीए को किसी प्रकार का संदेह नहीं है। एनडीए के सभी घटक दल के नेता यह कह रहे हैं कि हमारी सभी सीटों पर जीत पक्की है। चुनाव के समय तक मतदान करने वाले विधायक एक-दूसरे से मिलते रहेंगे। चुनाव तक सभी पटना में रहेंगे और किसी अन्य कार्य में लगे नहीं रहेंगे। इससे वोटिंग की गणना पर कोई असर नहीं पड़ेगा।"
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष के नेता भी यह समझ चुके हैं कि इस चुनाव में उनके लिए कोई उम्मीद नहीं है। विपक्ष में हलचल मची हुई है। हमारे विधायक शहर में घूम रहे हैं जबकि कुछ विपक्षी दल के विधायक नजरबंद हैं। इससे स्पष्ट हो जाता है कि जीत किसकी है और हार किसकी।
चौधरी ने दावा किया कि हमारे पास वोटों की कोई कमी नहीं है। एआईएमआईएम के विधायकों द्वारा राजद के उम्मीदवार को वोट देने की खबर पर उन्होंने कहा कि मिलना और वोट देना अलग बात है। सभी विधायक आपस में मिलते रहते हैं।
वास्तव में, बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें इस बार खाली हो रही हैं और इनके लिए चुनाव होना है। एनडीए ने राज्यसभा चुनाव में पांच जबकि राजद ने एक उम्मीदवार खड़ा किया है। २४३ सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए ४१ विधायकों की आवश्यकता है। वर्तमान में एनडीए के पास कुल २०२ विधायक हैं।
इस आधार पर, एनडीए आसानी से चार सीटें जीत सकता है। चार सीटें जीतने के बाद भी उसके पास कुछ अतिरिक्त वोट बचे हैं, लेकिन पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे अन्य विधायकों की मदद की आवश्यकता होगी। विपक्ष राजद के नेतृत्व वाला महागठबंधन है, जिसके पास कुल ३५ विधायक हैं। इसे एक सीट पर जीत हासिल करने के लिए अन्य विधायकों की आवश्यकता पड़ेगी। यही कारण है कि इस चुनाव को लेकर राजनीतिक गणित और जोड़-तोड़ की चर्चा तेज हो गई है।