क्या बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक दलों में 'साइड इफेक्ट' दिखने लगा?
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा ने 89 सीटों पर जीत हासिल की।
- प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी पूरी तरह असफल रही।
- कांग्रेस में असंतोष बढ़ रहा है।
- राजद के तेजस्वी यादव ने चुनाव परिणाम के बाद सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा।
- 43 कांग्रेसियों को कारण बताओ नोटिस मिला है।
पटना, 23 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हुआ। इस चुनाव में जीत के लिए सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, हालांकि चुनाव परिणाम एनडीए के पक्ष में आया। इस चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। मतगणना के लगभग आठ दिन बाद अब विभिन्न राजनीतिक दलों में इसका साइड इफेक्ट देखने को मिल रहा है।
2025 का बिहार विधानसभा चुनाव प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी के लिए पहली बड़ी चुनावी परीक्षा थी, लेकिन यह पार्टी पूरी तरह असफल रही। प्रशांत किशोर की छवि के आधार पर तैयार किए गए एक आक्रामक और व्यापक प्रचार अभियान के बावजूद, जन सुराज शुरुआती उत्साह को वोटों में नहीं बदल सकी।
यह पार्टी प्रदेश की 243 में से 238 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद एक भी सीट नहीं जीत पाई। चुनाव परिणाम के बाद पार्टी ने पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर के सभी समितियों को भंग कर दिया है। बताया गया कि पार्टी की सभी समितियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है और अगले डेढ़ माह में नए सिरे से संगठन को खड़ा किया जाएगा।
गौरतलब है कि चुनाव परिणाम के बाद राजद के नेता और महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री चेहरा तेजस्वी यादव अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। ऐसे में वे विरोधी पार्टियों के निशाने पर आ गए हैं।
कांग्रेस में भी चुनाव का साइड इफेक्ट देखने को मिल रहा है। असंतुष्ट खेमे ने अब प्रदेश नेतृत्व को हटाने की मांग को लेकर धरना दिया। बताया जाता है कि असंतुष्ट खेमे के प्रमुख नेता अब दिल्ली जाकर आलाकमान से मुलाकात करेंगे और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को हटाने की मांग करेंगे। इन पर असंतुष्ट कांग्रेसियों ने टिकट बेचने का आरोप लगाया है।
प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने 43 कांग्रेसियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जहां 89 सीटों पर जीत दर्ज की थी, वहीं राजद 25 सीटें ही जीत सकी थी। कांग्रेस को सिर्फ छह सीटों पर संतोष करना पड़ा।