बिहार के फालका में पुलिस हिरासत में युवक की संदिग्ध मौत, ग्रामीणों ने थाने का घेराव किया
सारांश
Key Takeaways
- कैलू यादव की संदिग्ध मौत ने सवाल उठाए हैं।
- परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उसे पीटा।
- ग्रामीणों ने थाने का घेराव कर आक्रोश व्यक्त किया।
- न्याय की मांग पूरे इलाके में उठ रही है।
- पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।
कटिहार, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के कटिहार जिले के फालका थाना क्षेत्र में पुलिस की हिरासत में एक युवक कैलू यादव उर्फ राकेश यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। यह घटना पूरे इलाके में फैल गई है, जिसके बाद ग्रामीण और मृतक के परिजन थाने के सामने आक्रोशित हो गए। सैकड़ों लोग थाने का घेराव कर नारेबाजी करने लगे।
परिजनों का कहना है कि तीन दिन पहले कैलू यादव को नशीले पदार्थ (स्मैक) बेचने और सेवन करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने थाने में कैलू यादव के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसकी स्थिति बिगड़ गई। बताया जा रहा है कि मारपीट के कारण उसे अंदरूनी चोटें आईं, जिसके चलते उसकी जान चली गई। परिजनों का कहना है कि अगर वह गुनाहगार था, तो उसे अदालत में पेश किया जाना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने उसे पीट-पीटकर मार डाला।
जैसे ही युवक की मौत की जानकारी फैली, इलाके में तनाव बढ़ गया। ग्रामीण और मृतक के परिजन सड़कों पर उतर आए और थाने का घेराव कर दिया। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया है। लोग लगातार नारेबाजी कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। परिजनों ने सवाल उठाया कि पुलिस को किसी को पीटे जाने का अधिकार किसने दिया।
युवक के एक परिजन ने कहा, "मेरे भतीजे को पुलिस ने मार डाला। अगर उसने गुनाह किया था तो उसे अदालत में ले जाते, लेकिन उसे पीट-पीटकर मारने का हक पुलिस को किसने दिया?"