कोटिया विवाद: बीजेडी का 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 23 अक्टूबर को करेगा कोरापुट दौरा
सारांश
मुख्य बातें
बीजू जनता दल (बीजेडी) का 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 23 अक्टूबर 2026 को ओडिशा के कोरापुट जिले के पोटांगी ब्लॉक स्थित कोटिया पंचायत का दौरा करेगा। यह दौरा उन कथित गतिविधियों के विरोध में किया जा रहा है, जो आंध्र प्रदेश द्वारा कोटिया के कुछ गाँवों में चुनाव से जुड़े स्तर पर चलाई जा रही हैं। बीजेडी अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक के निर्देश और अनुमोदन के बाद यह निर्णय लिया गया है।
दौरे का उद्देश्य
पार्टी ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा, 'मामले की गंभीरता और ओडिशा की क्षेत्रीय अखंडता तथा प्रशासनिक अधिकार पर इसके असर को देखते हुए इस प्रस्तावित दौरे का उद्देश्य जमीनी हालात का जायजा लेना और प्रभावित गाँवों में रहने वाले लोगों की चिंताओं को समझना है।' प्रतिनिधिमंडल कोटिया निवासियों से प्रत्यक्ष संवाद करेगा, मौजूदा स्थिति का मूल्यांकन करेगा और विवादित क्षेत्र में आंध्र प्रदेश की कथित गतिविधियों की जमीनी जानकारी जुटाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल
इस 16 सदस्यीय दल में बीजेडी विधायक मनोहर रंधारी, पूर्व मंत्री जगन्नाथ सारका, रबी नारायण नंदा और रमेश माझी, तथा पूर्व सांसद झिना हिकाका समेत अन्य नेता शामिल हैं। दौरे के बाद प्रतिनिधिमंडल एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर नवीन पटनायक को सौंपेगा, ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके।
पटनायक का मुख्यमंत्री को पत्र
बीजेडी ने बताया कि नवीन पटनायक ने हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को एक पत्र लिखकर ताजा घटनाक्रम के मद्देनजर कोटिया मामले में तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। पटनायक ने 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के घोषणापत्र का हवाला देते हुए सत्तारूढ़ दल पर अपने वादों से मुकरने का आरोप भी लगाया।
भाजपा पर सीधा निशाना
पटनायक के अनुसार, सत्तारूढ़ भाजपा ने अपने चुनावी वादों में कहा था कि एक 'डबल इंजन सरकार' कोटिया मुद्दे को स्थायी रूप से सुलझाएगी, ओडिशा की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करेगी और 'ओड़िया स्वाभिमान' को पुनः स्थापित करेगी। बीजेडी का मानना है कि राज्य सरकार को प्रभावी कदम उठाकर कोटिया के निवासियों के हितों और ओडिशा की भौगोलिक अखंडता की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
क्या होगा आगे
दौरे के बाद बीजेडी की रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर पार्टी विधानसभा या सड़क — दोनों मोर्चों पर कार्रवाई का निर्णय ले सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब कोटिया पंचायत का अंतर-राज्यीय विवाद एक बार फिर ओडिशा की राजनीति में केंद्रीय मुद्दा बनता जा रहा है।