22 अक्टूबर 2026
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कोटिया सीमा विवाद: ओडिशा मंत्री सुरेश पुजारी ने आंध्र प्रदेश के नए तनाव पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया

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कोटिया सीमा विवाद: ओडिशा मंत्री सुरेश पुजारी ने आंध्र प्रदेश के नए तनाव पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया

सारांश

आंध्र प्रदेश द्वारा विवादित कोटिया क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराने की कोशिश ने दशकों पुराने सीमा विवाद को फिर से सुलगा दिया है। ओडिशा मंत्री सुरेश पुजारी ने कानूनी रणनीति तेज़ करने और प्रशासनिक उपस्थिति मज़बूत करने का आश्वासन दिया।

मुख्य बातें

ओडिशा के राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने 21 अक्टूबर 2026 को कोटिया सीमा विवाद की वर्चुअल समीक्षा बैठक की।
आंध्र प्रदेश द्वारा विवादित गांवों में पंचायत चुनाव कराने की कोशिश के बाद तनाव फिर से बढ़ा।
एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य को सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई।
2006 में सर्वोच्च न्यायालय ने ओडिशा का मामला खारिज किया; 2022 में 16 साल बाद नया मामला दायर हुआ, जो अभी लंबित है।
फरवरी 2021 में आंध्र प्रदेश ने विवादित गांवों में पंचायत चुनाव संपन्न कराए थे, जिसके विरोध में ओडिशा ने अवमानना याचिका दायर की।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंत्री-स्तरीय समिति कोटिया में विकास कार्यों और सेवाओं की नियमित समीक्षा करती है।

ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को कोटिया ग्राम पंचायत से जुड़े दशकों पुराने सीमा विवाद के त्वरित और स्थायी निपटारे के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई। यह घोषणा ऐसे समय में आई जब पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश ने कोरापुट जिले के पोटांगी ब्लॉक के विवादित गांवों में पंचायत चुनाव कराने की कोशिश की, जिससे दोनों राज्यों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री पुजारी ने 21 अक्टूबर को एक वर्चुअल बैठक के माध्यम से कोटिया पंचायत की स्थिति और हालिया घटनाओं की विस्तृत समीक्षा की। जैसे ही उन्हें आंध्र प्रदेश द्वारा विवादित इलाके में चुनाव कराने की कोशिश की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल कोरापुट जिला प्रशासन को स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया।

बैठक के दौरान मंत्री ने ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य से विस्तृत कानूनी परामर्श लिया और राज्य के हितों की रक्षा के लिए उचित कानूनी कदमों पर चर्चा की। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन (R&DM) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा कोरापुट कलेक्टर को निर्देश दिया गया कि वे एडवोकेट जनरल को सभी आवश्यक दस्तावेज़ और सहायता प्रदान करें।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री पुजारी ने स्पष्ट किया, 'कोटिया क्षेत्र में शांति, स्थिरता और जनता का भरोसा बनाए रखना, साथ ही राज्य के कानूनी अधिकारों और हितों की रक्षा करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। राज्य सरकार इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद के जल्द और स्थायी समाधान के लिए सभी ज़रूरी और उचित कदम उठाने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।'

उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में ओडिशा की प्रशासनिक उपस्थिति को और मज़बूत करने पर भी ज़ोर दिया। इसके साथ ही मुख्य विभागों, कानूनी विशेषज्ञों और ज़िला अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया, ताकि ऐतिहासिक रिकॉर्ड, जनगणना के आंकड़ों और प्रशासनिक तथ्यों के आधार पर एक सुदृढ़ रणनीति बनाई जा सके।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि कोटिया पंचायत का यह सीमा विवाद पिछले कई दशकों से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच द्विपक्षीय वार्ता और न्यायिक कार्यवाही का केंद्र रहा है। 2006 में सर्वोच्च न्यायालय ने ओडिशा सरकार द्वारा दायर अंतर-राज्य सीमा विवाद मामले को खारिज कर दिया था। इसके बाद दाखिल समीक्षा याचिका और उपचारात्मक याचिका भी न्यायालय ने अस्वीकार कर दीं।

पुजारी ने पूर्ववर्ती बीजू जनता दल (BJD) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय की सरकार ने 16 वर्षों के अंतराल के बाद 2022 में एक नया मामला दायर किया, जो अभी भी न्यायालय में लंबित है। यह मुद्दा तब और जटिल हो गया जब फरवरी 2021 में आंध्र प्रदेश ने विवादित गांवों में पंचायत चुनाव संपन्न करा लिए, जिसके विरोध में ओडिशा ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायालय की अवमानना की याचिका दायर की।

आम जनता पर असर

राज्य सरकार के अनुसार, कोटिया क्षेत्र में निरंतर आवश्यक सेवाएं और कल्याणकारी योजनाएं पहुंचाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत एक मंत्री-स्तरीय समिति नियमित रूप से क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा करती है। विवादित गांवों के निवासियों के लिए यह अनिश्चितता वर्षों से बनी हुई है — दोनों राज्य उन्हें अपना नागरिक बताते हैं, जिससे ज़मीनी स्तर पर प्रशासनिक भ्रम की स्थिति बनती है।

क्या होगा आगे

चूंकि संबंधित मामले अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं, इसलिए एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य को सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों राज्यों के बीच इस विवाद का अंतिम समाधान न्यायिक प्रक्रिया और केंद्र सरकार की मध्यस्थता पर निर्भर करेगा। राज्य सरकार का अगला कदम न्यायालय में एक मज़बूत साक्ष्य-आधारित रणनीति प्रस्तुत करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ऐतिहासिक रिकॉर्ड और प्रशासनिक तथ्यों का वह आधार तैयार है जो सर्वोच्च न्यायालय में टिक सके। आंध्र प्रदेश का बार-बार चुनाव-आधारित 'तथ्य निर्माण' रणनीति अपनाना बताता है कि ज़मीन पर कब्ज़ा बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। जब तक ओडिशा न्यायिक मोर्चे पर ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करता और केंद्र सरकार की सक्रिय मध्यस्थता नहीं होती, तब तक यह विवाद हर चुनाव मौसम में सुलगता रहेगा।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटिया सीमा विवाद क्या है?
कोटिया ओडिशा के कोरापुट जिले के पोटांगी ब्लॉक की एक ग्राम पंचायत है, जिस पर ओडिशा और आंध्र प्रदेश दोनों अपना दावा करते हैं। यह विवाद दशकों पुराना है और कई बार द्विपक्षीय वार्ता तथा सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई का विषय बन चुका है।
अभी कोटिया में तनाव क्यों बढ़ा?
आंध्र प्रदेश ने कोटिया के विवादित गांवों में पंचायत चुनाव कराने की कोशिश की, जिससे तनाव फिर से भड़क उठा। इससे पहले फरवरी 2021 में भी आंध्र प्रदेश ने इन गांवों में पंचायत चुनाव संपन्न कराए थे, जिसके विरोध में ओडिशा ने सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की थी।
ओडिशा सरकार ने इस विवाद में क्या कदम उठाए हैं?
राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने 21 अक्टूबर 2026 को वर्चुअल बैठक कर एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य से कानूनी रणनीति पर चर्चा की। जिला प्रशासन को निगरानी बढ़ाने और एडवोकेट जनरल को सभी ज़रूरी दस्तावेज़ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय में इस विवाद की क्या स्थिति है?
2006 में सर्वोच्च न्यायालय ने ओडिशा का अंतर-राज्य सीमा विवाद मामला खारिज कर दिया था, और बाद में समीक्षा व उपचारात्मक याचिकाएं भी खारिज हुईं। 16 वर्षों के अंतराल के बाद 2022 में एक नया मामला दायर किया गया, जो अभी न्यायालय में लंबित है।
कोटिया के निवासियों को इस विवाद से क्या असर पड़ता है?
दोनों राज्यों के दावे के कारण कोटिया के निवासी प्रशासनिक अनिश्चितता में जीते हैं। ओडिशा सरकार का दावा है कि वह निरंतर आवश्यक सेवाएं और कल्याणकारी योजनाएं क्षेत्र तक पहुंचा रही है, और एक मंत्री-स्तरीय समिति नियमित रूप से विकास कार्यों की निगरानी करती है।
राष्ट्र प्रेस
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