कोटिया विवाद: ओपीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने आंध्र प्रदेश के पंचायत चुनाव नोटिफिकेशन को बताया संवैधानिक उल्लंघन
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने 16 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश द्वारा ओडिशा के कोरापुट जिले के कोटिया इलाके में पंचायत चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी किए जाने की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस कदम को ओडिशा की संप्रभुता में सीधी घुसपैठ बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
भक्त चरण दास ने भुवनेश्वर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश का यह नोटिफिकेशन ओडिशा के भूभाग में अनधिकृत हस्तक्षेप है। उनके अनुसार, आंध्र प्रदेश बार-बार कोटिया क्षेत्र में अपनी प्रशासनिक उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करता रहा है, जिसे कांग्रेस कभी स्वीकार नहीं करेगी।
दास ने कहा, 'आंध्र प्रदेश की अधिसूचना जारी होते ही ओडिशा सरकार को प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी और इसे रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए थे। भाजपा, जो ओडिया गौरव और पहचान के नाम पर सत्ता में आई थी, वह इस मुद्दे पर चुप क्यों है?'
ओडिशा सरकार पर निशाना
ओपीसीसी अध्यक्ष ने राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह इस संवेदनशील सीमा विवाद पर मौन साधे हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंध्र प्रदेश द्वारा कोटिया क्षेत्र के निवासियों को पेंशन और कल्याणकारी लाभ वितरित किए जाने के पीछे के राजनीतिक इरादों को पहचानने में विफल रही है।
गौरतलब है कि कोटिया दशकों से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच सीमा विवाद का केंद्र रहा है। यह इलाका भौगोलिक रूप से कोरापुट जिले में स्थित है, लेकिन आंध्र प्रदेश समय-समय पर वहाँ अपने प्रशासनिक दावे को बल देने की कोशिश करता है।
केंद्र से हस्तक्षेप की माँग
भक्त चरण दास ने माँग की कि ओडिशा के मुख्यमंत्री अथवा राजस्व मंत्री तत्काल आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से संपर्क साधें। उन्होंने केंद्र सरकार से भी यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि कोटिया सीमा विवाद का स्थायी और कानूनी समाधान निकाला जाए।
उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार को केंद्र के साथ मिलकर कड़े कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाने चाहिए, ताकि राज्य की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा हो सके।
आम जनता पर असर
कोटिया इलाके की जनता दोनों राज्यों के प्रशासनिक दावों के बीच फँसी रहती है। आलोचकों का कहना है कि जब आंध्र प्रदेश वहाँ पेंशन और कल्याण योजनाएँ वितरित करता है, तो इससे स्थानीय निवासियों की राज्य-निष्ठा को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है।
यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में BJP सरकार अपने शासन के शुरुआती दौर में है और अंतर-राज्यीय सीमा मुद्दों पर उसकी नीतिगत स्थिति की परख हो रही है।
क्या होगा आगे
भक्त चरण दास ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा और अन्य मंचों पर उठाएगी। उन्होंने दोहराया कि कोटिया ओडिशा का अभिन्न अंग है और राज्य की जनता के साथ मिलकर पार्टी इसकी रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। अब देखना यह होगा कि ओडिशा सरकार इस राजनीतिक दबाव के बाद कोई ठोस कार्रवाई करती है या नहीं।