19 अक्टूबर 2026
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कोटिया विवाद: नवीन पटनायक ने CM माझी को घेरा, आंध्र के चुनाव ऐलान पर BJP से माँगा जवाब

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कोटिया विवाद: नवीन पटनायक ने CM माझी को घेरा, आंध्र के चुनाव ऐलान पर BJP से माँगा जवाब

सारांश

आंध्र प्रदेश के कोटिया में चुनाव कराने की घोषणा ने ओडिशा की राजनीति को तूफान में डाल दिया है। नवीन पटनायक ने सीधा सवाल दागा — क्या 'गो बैक आंध्र' का नारा और 'ओड़िया स्वाभिमान' का वादा महज चुनावी जुमला था? TDP-BJP गठबंधन के बीच ओडिशा के हित कहाँ खड़े हैं, यह अब बड़ा सवाल बन गया है।

मुख्य बातें

नवीन पटनायक ने 19 अक्टूबर 2026 को CM मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर कोटिया में आंध्र प्रदेश के चुनाव ऐलान पर जवाब माँगा।
पटनायक ने 2024 चुनाव घोषणापत्र में BJP के कोटिया विवाद के स्थायी समाधान और 'ओड़िया स्वाभिमान' के वादे याद दिलाए।
आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ TDP , केंद्र में BJP नेतृत्व वाले NDA की सहयोगी है — पटनायक ने इसी राजनीतिक निर्भरता को ओडिशा सरकार की चुप्पी का कारण बताया।
2025 में गठित 16 सदस्यीय उच्चस्तरीय कोटिया समिति की सिफारिशों पर अमल का भी ब्यौरा माँगा।
पटनायक ने सवाल किया कि क्या 'गो बैक आंध्र' का नारा केवल चुनावी जुमला था।

बीजू जनता दल (BJD) के प्रमुख और ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने 19 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर कोटिया क्षेत्र में आंध्र प्रदेश द्वारा चुनाव कराने की घोषणा पर कड़ी आपत्ति जताई। पटनायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोटिया ओडिशा का अभिन्न अंग है और राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए।

क्या है कोटिया विवाद

कोटिया ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर स्थित एक विवादित क्षेत्र है, जिस पर दोनों राज्य दशकों से अपना दावा जताते आए हैं। इस क्षेत्र की 21 से अधिक ग्राम पंचायतें विवाद के केंद्र में हैं। गौरतलब है कि जब भी आंध्र प्रदेश ने इस इलाके में चुनावी गतिविधियाँ बढ़ाई हैं, ओडिशा में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई है।

आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेलुगू देशम पार्टी (TDP) के नेतृत्व में अब इस क्षेत्र में चुनाव कराने की घोषणा ने ओडिशा में राजनीतिक तापमान एक बार फिर बढ़ा दिया है।

पटनायक ने BJP के वादे याद दिलाए

पटनायक ने अपने पत्र में भाजपा नेताओं के पुराने बयानों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि BJP नेता स्वयं पहले 'गो बैक आंध्र' के नारे लगाते रहे हैं और कोटिया को ओडिशा का हिस्सा बताते रहे हैं।

उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि 2024 के विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा ने अपने घोषणापत्र में 'डबल इंजन सरकार' के ज़रिये कोटिया विवाद का स्थायी समाधान निकालने, ओडिशा की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने और 'ओड़िया स्वाभिमान' को मजबूत करने का वादा किया था। पटनायक ने सीधे सवाल किया कि उन वादों का क्या हुआ।

TDP-BJP गठबंधन पर उठाए सवाल

BJD प्रमुख ने इस मुद्दे को केंद्र की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ TDP, केंद्र में BJP नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की महत्वपूर्ण सहयोगी है। उनके अनुसार यही राजनीतिक निर्भरता संभवतः ओडिशा की BJP सरकार की चुप्पी का कारण है।

पटनायक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपने राजनीतिक समीकरणों के चलते ओडिशा के हितों और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता कर रही है।

उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट पर भी जवाब माँगा

पत्र में पटनायक ने वर्ष 2025 में गठित 16 सदस्यीय उच्चस्तरीय कोटिया समिति की सिफारिशों और उन्हें लागू करने के लिए अब तक उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी माँगी। उन्होंने कहा कि ओडिशा की जनता इन वादों पर स्पष्ट जवाबदेही की हकदार है।

आगे क्या होगा

पटनायक ने मुख्यमंत्री माझी से आग्रह किया कि राज्य सरकार निर्णायक कदम उठाए और कोटिया पर ओडिशा के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करे। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में भाजपा की नई सरकार पर विपक्ष का दबाव लगातार बढ़ रहा है। अब सबकी नज़रें मुख्यमंत्री माझी की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे में ओडिशा की BJP सरकार के लिए आंध्र पर सख्त रुख अपनाना दिल्ली से टकराव मोल लेना है। यह वही अंतर्विरोध है जिसे 'डबल इंजन सरकार' की अवधारणा सुलझाने का दावा करती है, पर अक्सर और उलझा देती है। 16 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति के गठन को एक वर्ष से अधिक हो चुका है — उसकी सिफारिशों पर चुप्पी यह संकेत देती है कि ओडिशा सरकार के पास फिलहाल कोई ठोस जवाब नहीं है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटिया विवाद क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
कोटिया ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर स्थित एक विवादित क्षेत्र है, जिस पर दोनों राज्य अपना दावा करते हैं। इस क्षेत्र की दर्जनों ग्राम पंचायतें दशकों से विवाद के केंद्र में हैं, और जब भी कोई एक राज्य वहाँ चुनावी गतिविधि बढ़ाता है, दूसरे राज्य में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया होती है।
नवीन पटनायक ने CM माझी को पत्र क्यों लिखा?
आंध्र प्रदेश द्वारा कोटिया क्षेत्र में चुनाव कराने की घोषणा के बाद BJD प्रमुख नवीन पटनायक ने 19 अक्टूबर 2026 को CM मोहन चरण माझी को पत्र लिखा। उन्होंने BJP के 2024 के घोषणापत्र में किए गए वादों का हवाला देते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट रुख और जवाबदेही माँगी।
BJP ने 2024 में कोटिया पर क्या वादे किए थे?
2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव से पूर्व BJP ने अपने घोषणापत्र में 'डबल इंजन सरकार' बनने पर कोटिया विवाद का स्थायी समाधान निकालने, क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने और 'ओड़िया स्वाभिमान' को मजबूत करने का वादा किया था। पटनायक ने इन वादों पर अब जवाब माँगा है।
TDP का इस विवाद से क्या संबंध है?
आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ TDP केंद्र में BJP नेतृत्व वाले NDA गठबंधन की अहम सहयोगी है। पटनायक का आरोप है कि इसी राजनीतिक निर्भरता के कारण ओडिशा की भाजपा सरकार कोटिया मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है और राज्य के हितों से समझौता हो रहा है।
कोटिया उच्चस्तरीय समिति क्या है और उसकी सिफारिशें कब आएँगी?
वर्ष 2025 में ओडिशा सरकार ने कोटिया विवाद के समाधान के लिए 16 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। नवीन पटनायक ने CM माझी से उस समिति की सिफारिशों और उन पर अमल के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी माँगी है, जो अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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