21 अक्टूबर 2026
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कोटिया विवाद: धर्मेंद्र प्रधान का आह्वान — ओडिशा के हित में सभी दल एकजुट हों

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कोटिया विवाद: धर्मेंद्र प्रधान का आह्वान — ओडिशा के हित में सभी दल एकजुट हों

सारांश

कोटिया सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है — आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव कराने के प्रयास के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने दलगत मतभेद भुलाकर ओडिशा की एकजुटता का आह्वान किया। दशकों पुराना यह विवाद अब नए राजनीतिक दबाव में है।

मुख्य बातें

संबलपुर सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने 21 अक्टूबर 2026 को कोटिया विवाद में ओडिशा के सभी दलों से एकजुट होने का आह्वान किया।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सरकार द्वारा विवादित क्षेत्र में स्थानीय निकाय चुनाव कराने की कोशिश के बाद तनाव बढ़ा।
प्रधान ने अप्रैल 2018 , फरवरी 2019 और अप्रैल 2023 में कोटिया गाँव का व्यक्तिगत दौरा किया था।
उन्होंने नवीन पटनायक को 2020 और 2022 में तथा वाईएस जगन मोहन रेड्डी को 2021 में पत्र लिखकर कार्रवाई का अनुरोध किया था।
BJP, BJD और कांग्रेस — तीनों दलों के बीच तीखी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद कोटिया मुद्दे पर एकजुटता की माँग उठी।

संबलपुर सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को कोटिया सीमा विवाद के संदर्भ में सभी राजनीतिक दलों से पार्टी संबद्धता से ऊपर उठकर ओडिशा के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। उनका यह बयान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सरकार द्वारा विवादित कोटिया क्षेत्र में स्थानीय निकाय चुनाव कराने के प्रयासों के बाद नए सिरे से उभरे तनाव की पृष्ठभूमि में आया है।

विवाद की ताज़ा स्थिति

आंध्र प्रदेश द्वारा कोटिया क्षेत्र में हालिया अतिक्रमण के बाद ओडिशा की राजनीति में असामान्य सहमति का माहौल बना है — विपक्षी कांग्रेस, बीजू जनता दल (BJD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के बीच तीखी बयानबाजी के बावजूद, कोटिया मुद्दे पर तीनों पक्षों का स्वर एक जैसा रहा है। प्रधान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: 'कोटिया ओडिशा की संप्रभुता और अखंडता की पहचान है। पार्टी संबद्धता से परे, ओडिशा के हितों के लिए एकजुट होना और सामूहिक समाधान खोजना आवश्यक है।'

प्रधान के व्यक्तिगत प्रयासों का ब्यौरा

प्रधान ने बताया कि उन्होंने अप्रैल 2018, फरवरी 2019 और अप्रैल 2023 में व्यक्तिगत रूप से कोटिया गाँव का दौरा किया। उन्होंने तत्कालीन ओडिशा मुख्यमंत्री और वर्तमान विपक्ष के नेता नवीन पटनायक को 18 नवंबर 2020 और 31 अक्टूबर 2022 को पत्र लिखकर कार्रवाई का अनुरोध किया था। इसी क्रम में उन्होंने आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी को भी 22 सितंबर 2021 को पत्र भेजा था।

ओडिया अस्मिता का संदर्भ

प्रधान ने अपने बयान में उत्कल गौरव मधुसूदन दास, उत्कलमणि गोपबंधु दास और व्यास कवि फकीर मोहन सेनापति जैसे ओडिशा के महान सपूतों का स्मरण करते हुए कहा कि उनका बलिदान और समर्पण व्यर्थ नहीं जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब कोटिया को लेकर यह दीर्घकालिक सीमा विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बन रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और एकजुटता की अपील

प्रधान ने रेखांकित किया कि इस क्षेत्र के मुद्दों को सुलझाने में राजनीतिक हस्तियों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा: 'संवाद के माध्यम से हमें सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाना होगा और समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा।' गौरतलब है कि यह अपील ऐसे वक्त में आई है जब BJP, BJD और कांग्रेस आपस में राज्य की राजनीति पर संघर्षरत हैं — ऐसे में सीमा मुद्दे पर अखिल-दलीय एकता ओडिशा की राजनीति में एक असाधारण संकेत है।

आगे की राह

कोटिया सीमा विवाद दशकों पुराना है और अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। प्रधान ने स्पष्ट किया: 'ओडिया गौरव के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। ओडिशा की एकता और अखंडता की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।' विश्लेषकों का मानना है कि आंध्र प्रदेश में नयडू सरकार के सत्ता में आने के बाद से इस सीमा पर गतिविधियाँ तेज़ हुई हैं, और अब केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की माँग भी उठने लगी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी टाइमिंग — BJP शासित ओडिशा और नायडू नेतृत्व वाले आंध्र प्रदेश के बीच केंद्र में NDA गठबंधन होने के बावजूद — महत्वपूर्ण है। यह सवाल उठता है कि क्या केंद्र सरकार इस सीमा विवाद में सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाएगी या गठबंधन की मजबूरियाँ आड़े आएँगी। कोटिया विवाद दशकों से अनसुलझा इसलिए भी रहा क्योंकि यह राज्यों की अस्मिता से जुड़ा है और हर बार चुनावी मौसम में तेज़ होता है। बिना किसी ठोस संस्थागत तंत्र — जैसे केंद्रीय मध्यस्थता या सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी — के, यह अपील राजनीतिक बयानबाजी से आगे जाती नज़र नहीं आती।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटिया सीमा विवाद क्या है?
कोटिया ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच एक दशकों पुराना सीमा विवाद है, जिसमें दोनों राज्य इस क्षेत्र के गाँवों पर अपना प्रशासनिक दावा जताते हैं। आंध्र प्रदेश द्वारा वहाँ स्थानीय निकाय चुनाव कराने की कोशिश ने हाल ही में तनाव को नए सिरे से बढ़ाया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कोटिया विवाद पर क्या कहा?
प्रधान ने एक्स पर पोस्ट करते हुए सभी राजनीतिक दलों से पार्टी संबद्धता से परे ओडिशा के हितों के लिए एकजुट होने और सामूहिक समाधान खोजने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोटिया ओडिशा की संप्रभुता और अखंडता की पहचान है।
प्रधान ने इस मुद्दे पर पहले क्या प्रयास किए थे?
प्रधान ने अप्रैल 2018, फरवरी 2019 और अप्रैल 2023 में कोटिया का दौरा किया। उन्होंने नवीन पटनायक को 2020 और 2022 में तथा तत्कालीन आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को 2021 में पत्र लिखकर मुद्दे के समाधान का अनुरोध किया था।
आंध्र प्रदेश की ताज़ा कार्रवाई से ओडिशा में क्यों नाराज़गी है?
आंध्र प्रदेश सरकार ने विवादित कोटिया क्षेत्र में स्थानीय निकाय चुनाव कराने का प्रयास किया, जिसे ओडिशा अपने क्षेत्र पर अतिक्रमण मानता है। इस कदम से ओडिशा में BJP, BJD और कांग्रेस तीनों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
कोटिया विवाद का अब तक समाधान क्यों नहीं हो सका?
यह विवाद दोनों राज्यों की क्षेत्रीय अस्मिता और राजनीतिक संवेदनशीलता से गहराई से जुड़ा है, और कोई स्थायी संस्थागत मध्यस्थता तंत्र अब तक स्थापित नहीं हो सका है। हर चुनावी मौसम में यह मुद्दा नए सिरे से उभरता है, जिससे स्थायी समाधान की राह और कठिन हो जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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