27 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कोटिया विवाद: CM माझी ने नवीन पटनायक को दिया जवाब, 1936 से ओडिशा का हिस्सा बताया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कोटिया विवाद: CM माझी ने नवीन पटनायक को दिया जवाब, 1936 से ओडिशा का हिस्सा बताया

सारांश

ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी ने नवीन पटनायक को कड़ा जवाब देते हुए दोहराया कि कोटिया 1936 से ओडिशा का हिस्सा है। उन्होंने विकास के लिए उच्च-स्तरीय समिति की जानकारी दी और विपक्ष से मुद्दे को राजनीतिक नहीं बनाने की अपील की।

मुख्य बातें

CM मोहन चरण माझी ने 27 अक्टूबर 2026 को नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक को पत्र लिखकर कोटिया पर ओडिशा का दावा दोहराया।
माझी के अनुसार कोटिया क्षेत्र वर्ष 1936 में ओडिशा राज्य गठन के समय से कोरापुट जिले का अभिन्न हिस्सा है।
कोटिया ग्राम पंचायत के समेकित विकास के लिए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री की अगुवाई में उच्च-स्तरीय समिति गठित।
माझी ने सभी पक्षकारों से संयम और न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान की अपील की।
मुख्यमंत्री ने पटनायक से इस लंबित मुद्दे के समाधान हेतु सुझाव भी माँगे।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 27 अक्टूबर 2026 को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि कोरापुट जिले का कोटिया क्षेत्र वर्ष 1936 में ओडिशा राज्य के गठन के समय से ही उसका अभिन्न अंग रहा है। माझी ने कहा कि राज्य सरकार ओडिशा की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सभी संवैधानिक एवं कानूनी उपायों का सहारा लेती रहेगी।

मुख्यमंत्री का रुख और पत्र का सार

मुख्यमंत्री माझी ने पटनायक को लिखे पत्र में चिंता जताई कि विपक्ष के नेता का पत्र इस संवेदनशील अंतर-राज्यीय मुद्दे को कानूनी और रचनात्मक समाधानों की बजाय राजनीतिक नज़रिए से देख रहा है। उन्होंने लिखा, 'ओडिशा ने कानूनी और संवैधानिक उपायों के ज़रिए लगातार अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा की है, साथ ही कोटिया और आस-पास के इलाकों के विकास को प्राथमिकता दी है।'

माझी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मसले पर किसी राजनीतिक दबाव में नहीं आएगी और हर मंच पर ओडिशा की स्थिति को क़ानूनी ढंग से रखती रहेगी।

हाई-लेवल कमेटी और विकास कार्य

पत्र के अनुसार, कोटिया ग्राम पंचायत क्षेत्र के समेकित विकास की निगरानी के लिए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री की अगुवाई में एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की गई है। इस समिति के अंतर्गत संबंधित मंत्री अन्य मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्षेत्र का दौरा कर विकास आवश्यकताओं का मूल्यांकन कर चुके हैं।

गौरतलब है कि यह कदम ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच दशकों पुराने कोटिया सीमा विवाद की पृष्ठभूमि में उठाया गया है, जिसमें दोनों राज्य इस आदिवासी बहुल क्षेत्र पर अपना दावा जताते रहे हैं।

संयम और न्यायिक प्रक्रिया की अपील

मुख्यमंत्री ने सभी पक्षकारों से संयम, जिम्मेदारी और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लंबे समय से लंबित इस विवाद का समाधान उचित कानूनी और संवैधानिक मंच पर ही होना चाहिए।

माझी ने नवीन पटनायक से भी अनुरोध किया कि वे राज्य और क्षेत्र के निवासियों के व्यापक हित में इस मुद्दे के समाधान हेतु सुझाव दें — यह संकेत देते हुए कि सरकार विपक्ष के साथ रचनात्मक संवाद के लिए तैयार है।

कोटिया विवाद की पृष्ठभूमि

कोटिया क्षेत्र कोरापुट जिले में स्थित है और इस पर ओडिशा एवं आंध्र प्रदेश दोनों दावा करते रहे हैं। यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। आलोचकों का कहना है कि इस क्षेत्र में विकास की दशकों से अनदेखी हुई है, और अब दोनों राज्यों द्वारा चुनावी गतिविधि बढ़ने के साथ यह मुद्दा फिर से केंद्र में आ गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई सरकार के तहत माझी पहली बार इस पुराने विवाद पर कड़ा रुख अपना रहे हैं। आगे की कार्रवाई काफी हद तक सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई की दिशा पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि खुद विधानसभा में यह मुद्दा उठाना भी अपने आप में एक राजनीतिक कदम है। असली सवाल यह है कि उच्च-स्तरीय समिति के दौरों और विकास कार्यों की घोषणाओं के बावजूद इस आदिवासी बहुल क्षेत्र में ज़मीनी बदलाव कितना आया है — यह अभी भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटिया विवाद क्या है?
कोटिया ओडिशा के कोरापुट जिले में स्थित एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जिस पर ओडिशा और आंध्र प्रदेश दोनों अपना दावा करते हैं। यह विवाद दशकों पुराना है और अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
CM माझी ने नवीन पटनायक को क्यों जवाब दिया?
नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने कोटिया मुद्दे पर एक पत्र लिखा था, जिसके जवाब में मुख्यमंत्री माझी ने स्पष्ट किया कि पटनायक का पत्र इस संवेदनशील विषय को राजनीतिक नज़रिए से देख रहा है। माझी ने दोहराया कि सरकार कानूनी और संवैधानिक मंचों पर ओडिशा की स्थिति को मजबूती से रखती रहेगी।
कोटिया के विकास के लिए ओडिशा सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
ओडिशा सरकार ने कोटिया ग्राम पंचायत क्षेत्र के समेकित विकास की निगरानी के लिए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री की अगुवाई में एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की है। इस समिति के तहत मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं।
क्या कोटिया विवाद का कोई कानूनी हल निकलने की संभावना है?
यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और मुख्यमंत्री माझी ने सभी पक्षों से न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की है। सरकार का कहना है कि समाधान उचित कानूनी और संवैधानिक मंच पर ही होगा।
कोटिया 1936 से ओडिशा का हिस्सा कैसे है?
ओडिशा सरकार का दावा है कि कोटिया क्षेत्र 1936 में ओडिशा राज्य के गठन के समय से कोरापुट जिले का अभिन्न हिस्सा रहा है। आंध्र प्रदेश इस दावे को विवादित मानता है और सर्वोच्च न्यायालय में यह मामला अभी लंबित है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 5 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले