बी.पी. सिंह का निधन: 'सीआईडी' और 'आहट' के निर्माता को दिल का दौरा, अशोक पंडित ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय टेलीविजन के दो सबसे दीर्घजीवी शोज — क्राइम ड्रामा 'सीआईडी' और हॉरर धारावाहिक 'आहट' — के निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 की सुबह तड़के दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनका पूरा नाम बृजेंद्रपाल सिंह था और उनका जन्म उत्तराखंड के देहरादून में हुआ था। उनके निधन की जानकारी वरिष्ठ फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने सार्वजनिक की।
अशोक पंडित की श्रद्धांजलि
फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पर बी.पी. सिंह की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'आज सुबह तड़के दिल का दौरा पड़ने से दिग्गज निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह जी के निधन की खबर सुनकर दुख हुआ। वह एक शानदार फिल्मकार थे, जिन्होंने अपने क्राइम शो 'सीआईडी' और हॉरर शो 'आहट' के जरिए पूरे देश के दर्शकों को बांधे रखा।' पंडित ने आगे जोड़ा कि उनका काम आज भी प्रेरणा देता है और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा।
पंडित ने यह भी बताया कि जब बी.पी. सिंह भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन निर्देशक संघ के अध्यक्ष थे, तब वे उनके बेहद करीबी सहयोगियों में से एक थे। उन्होंने बी.पी. सिंह को 'एक बेहतरीन इंसान और प्रिय मित्र' बताया। अंतिम संस्कार 28 अक्टूबर को किए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी।
करियर की शुरुआत और सफर
बी.पी. सिंह ने 1973 में दूरदर्शन के साथ समाचार कैमरामैन के रूप में अपना सफर शुरू किया। करीब एक दशक तक कैमरे के पीछे काम करने के बाद वे मुंबई आए और धीरे-धीरे निर्देशन व निर्माण की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। उनके करियर का एक अहम मोड़ दूरदर्शन के लिए बनाई गई टेलीफिल्म 'सिर्फ चार दिन' थी।
इस टेलीफिल्म की तैयारी के दौरान वे नियमित रूप से पुलिस की अपराध शाखा में जाने लगे, जहाँ उनकी मुलाकात निरीक्षक जयंत वागले से हुई। अपराधों की जाँच-पड़ताल की प्रक्रिया में उनकी रुचि बढ़ती गई, जो आगे चलकर 'सीआईडी' के निर्माण की प्रेरणा बनी।
'सीआईडी' और 'आहट' — दो युगांतकारी शोज
'सीआईडी' का प्रसारण 1998 में शुरू हुआ और यह भारतीय टेलीविजन के सबसे लंबे समय तक चलने वाले क्राइम शोज में से एक बना। इससे पहले, 1995 में प्रसारित हॉरर-रहस्य धारावाहिक 'आहट' ने दर्शकों में डर और रोमांच की एक नई भूख जगाई और लंबे समय तक लोकप्रियता बनाए रखी।
यह ऐसे समय में उल्लेखनीय था जब भारतीय टेलीविजन पर पारिवारिक नाट्य धारावाहिकों का वर्चस्व था। बी.पी. सिंह ने क्राइम और हॉरर को मुख्यधारा के दर्शकों तक पहुँचाने का काम किया — एक ऐसा योगदान जिसने आने वाले दशकों में टेलीविजन की विषयवस्तु को प्रभावित किया।
अन्य उल्लेखनीय काम
बी.पी. सिंह ने दूरदर्शन के धारावाहिक 'एक शून्य शून्य' का निर्माण भी किया। इसके अलावा वे 'सीआईडी: स्पेशल ब्यूरो', 'अचानक 37 साल बाद', 'रात होने को है', 'जिंदगी बदल सकता है हादसा', 'गुटुर गू', 'सूर्य द सुपर कॉप', 'हम ने ली है शपथ', 'सुपरकॉप्स वर्सेज सुपर विलेन' और 'दिव्य दृष्टि' जैसे शोज से भी जुड़े रहे।
मनोरंजन जगत ने एक ऐसे रचनाकार को खोया है जिन्होंने भारतीय टेलीविजन को एक विशिष्ट शैली और गहराई दी। उनका पार्थिव कार्य इस बात की याद दिलाता रहेगा कि छोटे पर्दे पर भी बड़ी कहानियाँ कही जा सकती हैं।