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सीजेआई पर विवादित पोस्ट: भाजपा का कांग्रेस पर हमला, 'पोस्ट हटाने से मंशा नहीं बदलती'

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सीजेआई पर विवादित पोस्ट: भाजपा का कांग्रेस पर हमला, 'पोस्ट हटाने से मंशा नहीं बदलती'

सारांश

केपीसीसी के एक्स हैंडल से सीजेआई के इस्तीफे की मांग करने वाले पोस्ट ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। पोस्ट हटाने और कार्यकर्ता की बर्खास्तगी के बावजूद भाजपा ने कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने का आरोपी बताते हुए माफी माँगने की माँग की।

मुख्य बातें

केपीसीसी के एक्स हैंडल से सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत के इस्तीफे की माँग करने वाला पोस्ट किया गया, जो बाद में हटा लिया गया।
केरल कांग्रेस ने जिम्मेदार कार्यकर्ता को बर्खास्त किया और कहा कि पोस्ट नेतृत्व की 'जानकारी या सहमति' के बिना था।
केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा — 'पोस्ट हटाने से कांग्रेस की मंशा नहीं बदलती।' भाजपा राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने कांग्रेस पर 'अराजकता' फैलाने का आरोप लगाया और सार्वजनिक माफी की माँग की।
भाजपा प्रवक्ता सी.आर.
केसवन ने इसे राहुल गांधी द्वारा प्रसारित 'अभद्र संस्कृति' का प्रतिबिंब बताया।

केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के आधिकारिक एक्स हैंडल से भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत के इस्तीफे की मांग करने वाला एक विवादास्पद पोस्ट किए जाने के बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 13 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया। भाजपा ने इस घटना को कांग्रेस और राहुल गांधी की देश की संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की 'सोची-समझी रणनीति' का हिस्सा बताया। भारी विरोध के बाद केरल कांग्रेस ने पोस्ट हटा दिया और जिम्मेदार कार्यकर्ता को बर्खास्त कर दिया, लेकिन भाजपा ने इस कदम को नाकाफी करार दिया।

विवाद की जड़

यह मामला तब सामने आया जब केपीसीसी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट किया गया, जिसमें कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत की टिप्पणियों को लेकर उनके इस्तीफे की मांग की गई थी। इस पोस्ट ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में व्यापक नाराज़गी पैदा की और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाने के आरोप लगे। केरल कांग्रेस यूनिट ने सफाई दी कि यह पोस्ट केपीसीसी नेतृत्व की 'जानकारी, सहमति या सलाह के बिना' प्रकाशित किया गया था।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इस विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'पोस्ट हटाने से उसके पीछे की भावना या कांग्रेस पार्टी की सोच और काम करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं आता। राहुल गांधी की भारत और उसकी संस्थाओं — चाहे वह न्यायपालिका हो, चुनाव आयोग हो, सरकार हो, मीडिया हो या युवा उद्यमी — का अपमान करने की रणनीति रही है।' उनके अनुसार, यह घटना कांग्रेस की लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति दृष्टिकोण को उजागर करती है।

भाजपा राष्ट्रीय सचिव का आरोप

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने कांग्रेस पर 'अराजकता' फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'कोई सीजेआई के बारे में ऐसी बातें कैसे कह सकता है? चाहे चुनाव आयुक्त हों, सीजेआई हों या राष्ट्रपति, क्या जब भी कोई संवैधानिक पदाधिकारी कांग्रेस की बात से सहमत नहीं होगा तो कांग्रेस अराजकता फैलाएगी? कांग्रेस का यह खतरनाक चेहरा अब देश के सामने आ रहा है।' गुप्ता ने कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की माँग करते हुए कहा कि 'संवैधानिक पद पर बैठे किसी भी व्यक्ति से, जो कांग्रेस की बात नहीं मानता, इस्तीफा देने को कहा जाता है।'

भाजपा प्रवक्ता की कड़ी आलोचना

भाजपा प्रवक्ता सी.आर. केसवन ने कांग्रेस की 'अभद्र संस्कृति' पर निशाना साधते हुए कहा, 'यह तीखा पोस्ट राहुल गांधी द्वारा बढ़ावा दी जाने वाली और फैलाई जाने वाली अभद्र और असभ्य संस्कृति को दर्शाता है।' यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच न्यायपालिका की भूमिका को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राजनीतिक दल से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट ने संवैधानिक संस्थाओं पर विवाद को जन्म दिया हो।

आगे क्या होगा

कांग्रेस ने अब तक इस मामले पर औपचारिक माफी नहीं माँगी है, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाए रखने के संकेत दिए हैं। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राजनीतिक दलों की सोशल मीडिया जवाबदेही पर यह बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एक प्रमुख राज्य इकाई के आधिकारिक हैंडल से ऐसा पोस्ट बिना नेतृत्व की जानकारी के कैसे गया — यह आंतरिक अनुशासन की कमी को उजागर करता है। दूसरी ओर, भाजपा का इसे 'रणनीति' बताना भी राजनीतिक है, क्योंकि संवैधानिक पदाधिकारियों की आलोचना की सीमा पर बहस दोनों पक्षों में चलती रही है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि न्यायपालिका पर टिप्पणी की स्वीकार्य सीमा क्या है — यह सवाल इस प्रकरण से कहीं अधिक व्यापक है और इसका जवाब संसदीय और न्यायिक मानदंडों, दोनों के आधार पर खोजा जाना चाहिए।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केपीसीसी के एक्स पोस्ट में सीजेआई के बारे में क्या कहा गया था?
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर की गई उनकी टिप्पणियों को लेकर सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत के इस्तीफे की मांग की गई थी। भारी विरोध के बाद यह पोस्ट हटा लिया गया।
कांग्रेस ने इस विवाद पर क्या सफाई दी?
केरल कांग्रेस यूनिट ने कहा कि यह पोस्ट केपीसीसी नेतृत्व की जानकारी, सहमति या सलाह के बिना प्रकाशित किया गया था। पार्टी ने जिम्मेदार कार्यकर्ता को बर्खास्त कर दिया और पोस्ट हटा दिया।
भाजपा ने इस प्रकरण पर क्या प्रतिक्रिया दी?
भाजपा ने इसे कांग्रेस की संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने की 'रणनीति' बताया। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर, राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता और प्रवक्ता सी.आर. केसवन ने कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की माँग की।
क्या कांग्रेस ने माफी मांगी है?
13 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार कांग्रेस ने कोई औपचारिक माफी नहीं माँगी है। पार्टी ने केवल पोस्ट हटाने और कार्यकर्ता की बर्खास्तगी पर सफाई दी है।
यह विवाद न्यायपालिका की स्वतंत्रता के नज़रिए से क्यों महत्वपूर्ण है?
किसी राजनीतिक दल के आधिकारिक हैंडल से सीजेआई जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी के इस्तीफे की माँग न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राजनीतिक दबाव के बीच की बहस को फिर से केंद्र में ले आती है। यह सवाल उठाता है कि राजनीतिक दलों की सोशल मीडिया जवाबदेही कैसे सुनिश्चित हो।
राष्ट्र प्रेस
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