29 अक्टूबर 2026
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केरल पीएससी विवाद: राजीव चंद्रशेखर ने राज्यपाल से की मुलाकात, कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना

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केरल पीएससी विवाद: राजीव चंद्रशेखर ने राज्यपाल से की मुलाकात, कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना

सारांश

केरल पीएससी विवाद अब राजभवन तक पहुँच गया है। भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने राज्यपाल से मिलकर हस्तक्षेप माँगा और कांग्रेस पर 150 दिनों की निष्क्रियता का आरोप लगाया। राहुल गांधी की 'छात्र-प्रेम' की छवि और केरल की जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करने की यह भाजपा की सुनियोजित रणनीति दिखती है।

मुख्य बातें

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने 29 अक्टूबर 2026 को केरल राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर से मिलकर पीएससी विवाद में हस्तक्षेप की माँग की।
पीएससी रैंक होल्डरों का आंदोलन 150 दिनों से अधिक समय से जारी है; सचिवालय के सामने छात्रों ने सिर मुंडवाकर विरोध किया।
राज्यपाल ने अनुच्छेद 317 के तहत राष्ट्रपति को सिफारिश भेजी, जिसके बाद 48 घंटों में केरल सरकार ने पीएससी चेयरमैन से पूछताछ शुरू की।
चंद्रशेखर ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे राष्ट्रीय स्तर पर छात्र-प्रेम दिखाते हैं, लेकिन केरल में अपनी सरकार के भ्रष्टाचार पर चुप हैं।
केरल उच्च न्यायालय ने सीपीएम और कांग्रेस के बीच संभावित मिलीभगत पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने 29 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में केरल के राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर से भेंट कर केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में राजभवन के हस्तक्षेप की माँग की। उनके साथ भाजपा के तीन विधायक, युवा मोर्चा के प्रतिनिधि और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष भी उपस्थित रहे। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब पीएससी रैंक होल्डर छात्रों का आंदोलन 150 दिनों से अधिक समय से जारी है।

राज्यपाल से मुलाकात का संदर्भ

चंद्रशेखर ने मीडिया को बताया कि राज्यपाल ने युवा मोर्चा की शिकायत पर अनुच्छेद 317 के तहत राष्ट्रपति को सिफारिश भेजी, जिसके बाद पिछले 48 घंटों में केरल सरकार सक्रिय हुई और पीएससी चेयरमैन से पूछताछ शुरू की। उन्होंने इसे कांग्रेस सरकार की निष्क्रियता का प्रमाण बताया।

गौरतलब है कि वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पिछले 150 दिनों से सत्ता में है, लेकिन भाजपा के आरोपों के अनुसार इस अवधि में पीएससी विवाद पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

राहुल गांधी और सतीशन सरकार पर आरोप

चंद्रशेखर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, 'केरल में यह कांग्रेस की सरकार है, यह राहुल गांधी की कांग्रेस सरकार है। एक तरफ राहुल गांधी देशभर में छात्रों के असंतोष को लेकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अपनी ही सरकार में पीएससी में हो रहे भ्रष्टाचार और छात्रों के साथ हो रहे अन्याय पर आँखें मूंदे हुए हैं।'

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इन दिनों देशभर में 'छात्रों की गूंज' की बात करते हैं, लेकिन केरल में पीएससी रैंक होल्डर छात्रों की पीड़ा उन्हें दिखाई नहीं देती।

पिछली सरकार पर दोषारोपण को लेकर भाजपा का पलटवार

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन द्वारा इस विवाद के लिए पिछली सीपीएम सरकार को जिम्मेदार ठहराने पर चंद्रशेखर ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सतीशन ने पाँच गारंटियाँ और 'नए केरल' का सपना दिखाकर जनता से वोट लिया था और विधानसभा के पहले सत्र में युवाओं को अवसर देने का वादा किया था।

उन्होंने पूछा कि यदि पिछली सीपीएम सरकार वास्तव में दोषी थी तो नई सरकार ने 150 दिनों में पीएससी चेयरमैन के खिलाफ जाँच के आदेश क्यों नहीं दिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केरल उच्च न्यायालय ने स्वयं यह सवाल उठाया कि क्या सीपीएम और कांग्रेस के बीच कोई मिलीभगत है।

आम जनता और छात्रों पर असर

पीएससी रैंक होल्डरों का आंदोलन केरल सचिवालय के सामने जारी है, जहाँ कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने सिर मुंडवाकर विरोध दर्ज किया है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में सरकारी नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा चरम पर है और पीएससी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं।

चंद्रशेखर ने अंत में मुख्यमंत्री सतीशन को आगाह करते हुए कहा कि उन्हें 'दूसरा राहुल गांधी' बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सतीशन की अभी कुछ विश्वसनीयता बची है और अगर वे बहाने बनाते रहे तो वह भी समाप्त हो जाएगी।

क्या होगा आगे

राज्यपाल की अनुच्छेद 317 के तहत सिफारिश के बाद अब सभी की नज़रें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और केरल सरकार द्वारा पीएससी में की जाने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को आगे भी उठाती रहेगी और छात्रों को न्याय दिलाने तक दबाव बनाए रखेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसकी सरकार केरल में 150 दिनों से पीएससी रैंक होल्डरों की पीड़ा पर मौन है। असली सवाल यह है कि अनुच्छेद 317 की सिफारिश के बाद भी यदि केंद्र या राज्य स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह राजनीतिक दबाव महज़ सुर्खियों तक सीमित रह जाएगा।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल पीएससी विवाद क्या है?
केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर पीएससी रैंक होल्डर छात्र 150 दिनों से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।
राज्यपाल ने अनुच्छेद 317 के तहत क्या कार्रवाई की?
राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर ने युवा मोर्चा की शिकायत पर अनुच्छेद 317 के तहत राष्ट्रपति को सिफारिश भेजी। इसके बाद 48 घंटों के भीतर केरल सरकार ने पीएससी चेयरमैन से पूछताछ शुरू की।
भाजपा ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर 'छात्रों की गूंज' की बात करते हैं, लेकिन केरल में उनकी अपनी कांग्रेस सरकार पीएससी रैंक होल्डर छात्रों के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने इसे 'पाखंड और धोखेबाज राजनीति' करार दिया।
केरल उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या टिप्पणी की?
राजीव चंद्रशेखर के अनुसार केरल उच्च न्यायालय ने यह सवाल उठाया है कि क्या सीपीएम और कांग्रेस के बीच पीएससी मामले में कोई मिलीभगत है। हालाँकि न्यायालय का विस्तृत आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना चाहिए।
इस विवाद में वी.डी. सतीशन का रुख क्या है?
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने पीएससी विवाद के लिए पूर्ववर्ती सीपीएम सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। भाजपा ने इस रुख को खारिज करते हुए कहा है कि सरकार के 150 दिन बाद भी पिछली सरकार पर दोष मढ़ना छात्रों के प्रति गैरजिम्मेदारी है।
राष्ट्र प्रेस
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