राज्यसभा चुनाव: भाजपा ने जमीनी कार्यकर्ताओं को टिकट दिया, प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने सपा पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उत्तर प्रदेश प्रदेश प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने 5 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा की ओर से घोषित आठ उम्मीदवारों का बचाव करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि जहाँ भाजपा ने बिना राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका दिया, वहीं सपा ने अपने परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता दी।
भाजपा का उम्मीदवार चयन: कार्यकर्ता आधारित दावा
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि भाजपा केवल कार्यकर्ता आधारित पार्टी होने का दावा नहीं करती, बल्कि उसे व्यवहार में भी दिखाती है। उनके अनुसार, राज्यसभा के लिए घोषित उम्मीदवारों में कई ऐसे नाम हैं जिनका किसी राजनीतिक परिवार से कोई संबंध नहीं है, लेकिन उन्होंने वर्षों तक संगठन के लिए जमीनी स्तर पर काम किया है।
उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक समीकरण का भी ध्यान रखा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भाजपा संगठन और उसकी सरकारों का मूल मंत्र है, महज एक राजनीतिक नारा नहीं।
सपा के 'पीडीए' पर कटाक्ष
समाजवादी पार्टी के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर निशाना साधते हुए दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव का पीडीए वास्तव में 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' है। उन्होंने दावा किया कि सपा ने राज्यसभा की दो सीटों के लिए परिवार से जुड़े व्यक्तियों को उम्मीदवार बनाया, जिससे पिछड़ा और दलित समाज की उम्मीदें टूट गईं।
उनके अनुसार, पिछड़े समाज को उम्मीद थी कि उनके वर्ग से किसी को उम्मीदवार बनाया जाएगा, जबकि दलित समाज भी प्रतिनिधित्व की प्रतीक्षा में था। इसके बजाय सपा ने एक धनवान व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया। उनका कहना था कि इससे यह स्पष्ट होता है कि सपा को पिछड़ों और दलितों की वास्तविक चिंता नहीं है।
अखिलेश के 'तीसरे उम्मीदवार' वाले बयान पर पलटवार
अखिलेश यादव ने कथित तौर पर दावा किया था कि सपा एक ऐसा तीसरा उम्मीदवार उतारेगी जिससे भाजपा के पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि पहले दो उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही सपा के अपने पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई है, क्योंकि पार्टी ने अपने आधार वर्गों की अनदेखी की।
यादव समाज और मुस्लिम तुष्टिकरण पर आरोप
दिनेश प्रताप सिंह ने आगे कहा कि सपा कथित मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है, फिर भी मुस्लिम समाज को भी राज्यसभा उम्मीदवारी में स्थान नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि सपा ने अपने विधान परिषद के नेता पद से एक यादव नेता को हटाया और गोरखपुर में शिक्षा से जुड़े मामले में भी यादव समाज के एक नेता के खिलाफ कार्रवाई हुई।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सपा यादव समाज को अपना 'बंधुआ मजदूर' समझती है। उन्होंने यादव समाज को सनातनी बताते हुए कहा कि यह समाज स्वाभिमान के साथ जीता है और 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा की राजनीति का जवाब देगा।
2027 का दावा और आगे की रणनीति
दिनेश प्रताप सिंह ने दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर बहुमत की सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सपा के राजनीतिक चरित्र को पहचान चुकी है और राज्यसभा चुनाव में भी इसका स्पष्ट जवाब मिलेगा। गौरतलब है कि यह बयान उत्तर प्रदेश में राजनीतिक ध्रुवीकरण की उस प्रक्रिया का हिस्सा है जो 2027 विधानसभा चुनाव से पहले तेज होती जा रही है।