बीकेएस का पहला महिला किसान सम्मेलन: नई दिल्ली में हजारों किसानों को सम्मान, कृषि में योगदान पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में अपना पहला महिला किसान सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें देशभर के विभिन्न राज्यों और गाँवों से हजारों महिला किसानों ने भाग लिया। इस ऐतिहासिक आयोजन में वक्ताओं ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं के प्रायः अनदेखे योगदान को रेखांकित किया और उनकी पारंपरिक छवि को नए सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उल्लेखनीय है कि यह सम्मेलन उसी वर्ष आयोजित हुआ जब संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किया है।
उद्घाटन सत्र और मुख्य संबोधन
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा गौ-पूजन, भगवान बलराम पूजन और ध्वजारोहण के साथ हुआ। इस अवसर पर 'हम, भारत की महिलाएं, गौरव लाएंगी' का नारा गूंजा। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में कोटा कृषि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. विमला डुकवाल ने कहा कि भारत की महिलाओं की शक्ति सृजन और पोषण दोनों एक साथ कर सकती है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अन्नपूर्णा और दुर्गा का साक्षात रूप हैं, जो अधिकारों से अधिक कर्तव्यों को प्राथमिकता देती हैं।
महिला किसानों की बदलती भूमिका
सम्मेलन का परिचय देते हुए बीकेएस की अखिल भारतीय महिला संयोजक मंजू दीक्षित ने कहा कि आधुनिक तकनीक और ऊर्जा से लैस होकर महिला किसान आज अपने परिवारों और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने भारत में महिला किसानों की पारंपरिक छवि को बदलने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। संगठन के अध्यक्ष के. साई रेड्डी, उपाध्यक्ष सुशीला बिश्नोई और सचिव वीणा सतीश ने भी सत्र को संबोधित किया।
जैविक खेती और विकसित भारत का आह्वान
समापन सत्र में बीकेएस के महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा कि गौ-कृषि, वन्यजीव और जैविक खेती के बिना 2047 तक एक विकसित और स्वस्थ भारत का लक्ष्य असंभव है। उन्होंने सरकार से विषमुक्त खेती, रोगमुक्त समाज और पोषणयुक्त भोजन पर केंद्रित नीतियाँ बनाने का आह्वान किया। बीकेएस के संगठनात्मक सचिव दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि आत्मनिर्भर और स्वतंत्र महिला किसानों को मिलने वाला सम्मान स्वाभाविक रूप से गाँवों, समाज और परिवारों के गौरव को बढ़ाएगा।
विशिष्ट उपस्थिति और सम्मान समारोह
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय संपर्क प्रमुख रामलाल, राष्ट्र सेविका समिति की सह-संपर्क प्रमुख ऋतु शर्मा और बीकेएस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। देशभर से प्राप्त प्रविष्टियों में से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिला किसानों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रीय पारंपरिक परिधान पहने, क्षेत्रीय भाषाओं में लोकगीत गाए और सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए।
आगे की राह
सम्मेलन की एक उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि भाग लेने वाली महिला किसानों ने यात्रा और संबंधित सभी खर्च स्वयं वहन किए। यह आयोजन इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध बीकेएस ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और उनके सशक्तीकरण को संगठनात्मक एजेंडे में केंद्रीय स्थान दिया है। आने वाले समय में संगठन से महिला किसानों की नीतिगत माँगों को लेकर सरकार से संवाद की उम्मीद जताई जा रही है।