क्या हर्ष सांघवी बीएलओ लोकशाही के असली हीरो हैं?

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क्या हर्ष सांघवी बीएलओ लोकशाही के असली हीरो हैं?

सारांश

गुजरात के उपमुख्‍यमंत्री हर्ष सांघवी ने बीएलओ से मुलाकात कर उनकी मेहनत की सराहना की। उन्होंने बताया कि पिछले 21 दिनों से टीम लोकशाही को मजबूत करने के लिए काम कर रही है। क्या ये बीएलओ सच में लोकशाही के हीरो हैं? जानिए इस महत्वपूर्ण चर्चा में।

Key Takeaways

  • बीएलओ लोकतंत्र के सच्चे हीरो हैं।
  • हर्ष सांघवी ने उनकी मेहनत की सराहना की।
  • पिछले 21 दिनों से निरंतर काम चल रहा है।
  • एसआईआर प्रक्रिया ने दलित समुदाय को लाभ पहुंचाया।
  • लोकतंत्र में थकान के बावजूद खुशी का अनुभव होता है।

सूरत, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के उपमुख्‍यमंत्री हर्ष सांघवी ने रविवार को एसआईआर प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों एवं कर्मचारियों (बीएलओ) से बातचीत की। इस मौके पर उन्होंने उनकी कठिन परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि लोकशाही को मजबूत करने के लिए पिछले 21 दिनों से पूरी टीम दिन-रात एक साथ काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि निरंतर काम करने के कारण थकान भले ही दिखाई दे रही हो, लेकिन लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने की खुशी उनके चेहरों पर साफ नजर आ रही है। सच में बीएलओ लोकशाही को मजबूत करने के असली हीरो हैं।

हर्ष सांघवी ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि वे यहां किसी का मूल्यांकन करने नहीं आए हैं, बल्कि अपने निर्वाचन क्षेत्र के सभी कर्मियों के समर्पण और मेहनत का सम्मान करने आए हैं। उन्होंने कहा, “ये लोग लोकशाही के पर्व को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। जिस तरह से वे हर छोटे-बड़े काम का ध्यान रख रहे हैं और इस प्रक्रिया में शामिल बच्चों की देखभाल कर रहे हैं, वह वास्तव में प्रेरणादायक है। सही मायनों में लोकशाही के इस पर्व को सफल बनाने वाले ये सभी असली हीरो हैं। मैं इन्हें सलामी देता हूं।”

उन्होंने आगे कहा कि निरंतर काम के चलते थकान होना स्वाभाविक है, लेकिन देशहित में मिल रही सफलता इस थकान को खुशी में बदल देती है। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती है।

इधर, राष्ट्र प्रेस से बातचीत में एलजेपी (आर) के सांसद अरुण भारती ने बिहार में हुई एसआईआर प्रक्रिया को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि इससे मुख्य रूप से दलित समुदाय को बड़ा लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव से पहले कुछ राजनीतिक दल 'नव-सामंतवाद' जैसे व्यवहार में लिप्त थे और तरह-तरह के दावे कर रहे थे।

उनके समर्थकों तक का कहना था कि कई बूथों पर इतने फर्जी वोट हैं कि दलित समुदाय का मतदान भी किसी काम नहीं आएगा।

अरुण भारती ने बताया कि एसआईआर के माध्यम से सभी फर्जी वोटों को हटाया गया, जिसके बाद दलित मतदाताओं का वोट पहली बार निर्णायक बना। उन्होंने दावा किया कि इसी कारण बिहार चुनाव में दलित समाज का वोट प्रभावी साबित हुआ और एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला। इसे उन्होंने लोकतांत्रिक प्रणाली की बड़ी जीत बताया।

Point of View

यह स्पष्ट है कि बीएलओ की मेहनत और समर्पण को पहचानना आवश्यक है। यह न केवल लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज के सभी वर्गों को एक साथ लाने का एक साधन भी है।
NationPress
30/11/2025

Frequently Asked Questions

बीएलओ कौन होते हैं?
बीएलओ का मतलब है बूथ लेवल ऑफिसर, जो चुनावी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं।
हर्ष सांघवी ने किससे मुलाकात की?
हर्ष सांघवी ने बीएलओ से मुलाकात की और उनकी मेहनत की सराहना की।
एसआईआर प्रक्रिया क्या है?
एसआईआर प्रक्रिया चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लागू की गई है।
इस प्रक्रिया का दलित समुदाय पर क्या प्रभाव पड़ा?
इस प्रक्रिया के कारण दलित मतदाताओं का वोट निर्णायक बना और उन्हें बड़ा लाभ मिला।
लोकतंत्र की खूबसूरती क्या है?
लोकतंत्र की खूबसूरती है कि मेहनत और समर्पण देश को मजबूत बनाते हैं।
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