बोकारो ट्रेजरी घोटाला: CID ने ASI अशोक कुमार भंडारी को किया गिरफ्तार, ₹1.11 करोड़ के गबन में बड़े खुलासे
सारांश
Key Takeaways
- CID ने बोकारो एसपी कार्यालय के ASI अशोक कुमार भंडारी को बोकारो ट्रेजरी घोटाले में गिरफ्तार किया।
- जांच में ₹1.11 करोड़ से अधिक के गबन का खुलासा; मुख्य आरोपी लेखापाल कौशल कुमार पांडेय के खाते से ₹50 लाख भंडारी के खाते में ट्रांसफर।
- फर्जी 'कमान' दस्तावेज बनाकर यात्रा भत्ता बिलों की अवैध निकासी — यह सिलसिला 2020 से जारी था।
- 24 अप्रैल 2026 को BNS और IT अधिनियम के तहत FIR दर्ज; SIT का गठन किया गया।
- CID के अनुसार जांच के आने वाले चरणों में और विभागीय कर्मियों व अधिकारियों पर कार्रवाई संभव।
झारखंड के बोकारो जिला ट्रेजरी से फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी राशि की अवैध निकासी के मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने बोकारो एसपी कार्यालय के अकाउंट सेक्शन में प्रतिनियुक्त सहायक उप-निरीक्षक (ASI) अशोक कुमार भंडारी को गिरफ्तार किया है। CID की प्रारंभिक जांच में ₹1.11 करोड़ से अधिक के गबन का मामला सामने आया है, जो कथित तौर पर वर्ष 2020 से लगातार जारी था।
मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर
झारखंड सरकार के निर्देश पर इस घोटाले की जांच CID रांची को सौंपी गई है। 24 अप्रैल 2026 को CID थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। मामले की संवेदनशीलता और व्यापकता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का भी गठन किया गया है।
मुख्य आरोपी और गबन की कार्यप्रणाली
जांच में सामने आया है कि ASI अशोक कुमार भंडारी, मुख्य आरोपी और लेखापाल कौशल कुमार पांडेय का करीबी सहयोगी था। दोनों मिलकर फर्जी आधिकारिक दस्तावेज — जिन्हें स्थानीय प्रशासनिक भाषा में 'कमान' कहा जाता है — तैयार करते थे और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर यात्रा भत्ता (TA) बिलों की अवैध निकासी की जाती थी। CID के अनुसार, कौशल पांडेय के बैंक खाते से अशोक भंडारी के खाते में करीब ₹50 लाख ट्रांसफर किए गए थे।
घोटाले का दायरा और आर्थिक नुकसान
जांच एजेंसी के अनुसार यह फर्जीवाड़ा 2020 से निर्बाध रूप से चलता रहा। अकेले अशोक भंडारी के बैंक खाते के माध्यम से ही ₹1.11 करोड़ से अधिक की राशि निकाली गई। यह ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी खजाने की निगरानी प्रणाली पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि SIT फिलहाल बैंक खातों और विभागीय दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है।
आगे क्या होगा
CID के अनुसार यह जांच का शुरुआती चरण है और आने वाले दिनों में इस घोटाले में कई और विभागीय कर्मियों एवं अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे और ट्रेजरी कार्यालयों में हड़कंप मचा हुआ है। जांच के दायरे में और नाम आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।