बॉम्बे हाईकोर्ट की हड़ताली डॉक्टरों को कड़ी फटकार: लंच के बाद तुरंत काम पर लौटें, वरना रुकेगी सैलरी
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को महाराष्ट्र में हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी चेतावनी दी कि यदि वे काम पर नहीं लौटे तो उनका वेतन रोका जाएगा। अदालत ने सभी हड़ताली डॉक्टरों को लंच ब्रेक के तुरंत बाद ड्यूटी पर वापस आने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों का पक्ष सुना जाएगा — लेकिन हड़ताल जारी रखते हुए नहीं।
हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
अदालत ने हड़ताली डॉक्टरों से सीधे पूछा, 'मान लीजिए आपकी याचिका बाद में स्वीकार हो जाती है और आप जीत जाते हैं, लेकिन इस हड़ताल के दौरान यदि 50 मरीजों की मौत हो जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन उठाएगा?' कोर्ट ने यह भी कहा कि म्युनिसिपल अस्पतालों में एक भी मरीज की जान गई तो इसका उत्तरदायित्व हड़ताल करने वालों पर होगा। साथ ही अदालत ने भरोसा दिलाया कि वह डॉक्टरों की पूरी बात सुनेगी।
हड़ताल की वजह: होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथी का अधिकार
महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने होम्योपैथी डॉक्टरों को सर्टिफ़िकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी (CCMP) के अंतर्गत एलोपैथिक दवाएँ लिखने की अनुमति दी है। इस निर्णय के विरोध में महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने हड़ताल का आह्वान किया। मुंबई के आजाद मैदान में बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टरों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पदाधिकारियों ने हाथों में तख्तियाँ लेकर 'नो CCMP' के नारे लगाए और सरकार से यह फैसला तत्काल वापस लेने की माँग की।
IMA का कानूनी तर्क
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथिक अधिकार नहीं दिए जा सकते। उन्होंने बताया कि इस फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पिछले 12 वर्षों से न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने 3 अगस्त के सरकारी आदेश के ज़रिए एक समिति गठित की और समिति का काम पूरा होने से पहले ही CCMP के तहत पंजीकरण शुरू कर दिया गया — जिस पर IMA ने कड़ी आपत्ति जताई है।
डॉक्टरों की मुख्य चिंता: मरीजों की सुरक्षा
हड़ताली डॉक्टरों का कहना है कि केवल 90 दिन का ब्रिज कोर्स पूरा कर होम्योपैथी डॉक्टरों को MBBS और MD डॉक्टरों के समकक्ष नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, यह निर्णय मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मानक पहले से ही बहस के केंद्र में हैं।
आगे क्या होगा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टरों की याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी और उनका पक्ष सुना जाएगा — परंतु हड़ताल समाप्त करने के बाद। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अदालतों ने डॉक्टरों की हड़ताल पर इस तरह हस्तक्षेप किया हो; इससे पहले भी सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालय आपात स्वास्थ्य सेवाओं को अनिवार्य बताते हुए हड़तालों पर रोक लगा चुके हैं।