6 अगस्त 2026
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बॉम्बे हाईकोर्ट की हड़ताली डॉक्टरों को कड़ी फटकार: लंच के बाद तुरंत काम पर लौटें, वरना रुकेगी सैलरी

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बॉम्बे हाईकोर्ट की हड़ताली डॉक्टरों को कड़ी फटकार: लंच के बाद तुरंत काम पर लौटें, वरना रुकेगी सैलरी

सारांश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हड़ताली डॉक्टरों को कड़ी फटकार लगाते हुए लंच के बाद काम पर लौटने का आदेश दिया और वेतन रोकने की चेतावनी दी। विवाद की जड़ में है महाराष्ट्र सरकार का वह फैसला, जिसके तहत 90 दिन के CCMP कोर्स के बाद होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाएँ लिखने की छूट दी गई है।

मुख्य बातें

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को हड़ताली डॉक्टरों का स्वतः संज्ञान लेते हुए तत्काल काम पर लौटने का आदेश दिया।
अदालत ने चेतावनी दी कि काम से इनकार करने पर वेतन रोका जाएगा।
महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने CCMP के तहत होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथी की अनुमति देने के विरोध में हड़ताल की है।
IMA की याचिका इस मुद्दे पर पिछले 12 वर्षों से अदालत में लंबित है।
राज्य सरकार ने 3 अगस्त के सरकारी आदेश से समिति बनाई, पर उसके काम पूरा होने से पहले ही पंजीकरण शुरू हो गया।
हड़ताली डॉक्टरों का तर्क है कि केवल 90 दिन का कोर्स MBBS/MD के समकक्ष नहीं हो सकता।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को महाराष्ट्र में हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी चेतावनी दी कि यदि वे काम पर नहीं लौटे तो उनका वेतन रोका जाएगा। अदालत ने सभी हड़ताली डॉक्टरों को लंच ब्रेक के तुरंत बाद ड्यूटी पर वापस आने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों का पक्ष सुना जाएगा — लेकिन हड़ताल जारी रखते हुए नहीं।

हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी

अदालत ने हड़ताली डॉक्टरों से सीधे पूछा, 'मान लीजिए आपकी याचिका बाद में स्वीकार हो जाती है और आप जीत जाते हैं, लेकिन इस हड़ताल के दौरान यदि 50 मरीजों की मौत हो जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन उठाएगा?' कोर्ट ने यह भी कहा कि म्युनिसिपल अस्पतालों में एक भी मरीज की जान गई तो इसका उत्तरदायित्व हड़ताल करने वालों पर होगा। साथ ही अदालत ने भरोसा दिलाया कि वह डॉक्टरों की पूरी बात सुनेगी।

हड़ताल की वजह: होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथी का अधिकार

महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने होम्योपैथी डॉक्टरों को सर्टिफ़िकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी (CCMP) के अंतर्गत एलोपैथिक दवाएँ लिखने की अनुमति दी है। इस निर्णय के विरोध में महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने हड़ताल का आह्वान किया। मुंबई के आजाद मैदान में बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टरों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पदाधिकारियों ने हाथों में तख्तियाँ लेकर 'नो CCMP' के नारे लगाए और सरकार से यह फैसला तत्काल वापस लेने की माँग की।

IMA का कानूनी तर्क

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथिक अधिकार नहीं दिए जा सकते। उन्होंने बताया कि इस फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पिछले 12 वर्षों से न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने 3 अगस्त के सरकारी आदेश के ज़रिए एक समिति गठित की और समिति का काम पूरा होने से पहले ही CCMP के तहत पंजीकरण शुरू कर दिया गया — जिस पर IMA ने कड़ी आपत्ति जताई है।

डॉक्टरों की मुख्य चिंता: मरीजों की सुरक्षा

हड़ताली डॉक्टरों का कहना है कि केवल 90 दिन का ब्रिज कोर्स पूरा कर होम्योपैथी डॉक्टरों को MBBS और MD डॉक्टरों के समकक्ष नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, यह निर्णय मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मानक पहले से ही बहस के केंद्र में हैं।

आगे क्या होगा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टरों की याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी और उनका पक्ष सुना जाएगा — परंतु हड़ताल समाप्त करने के बाद। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अदालतों ने डॉक्टरों की हड़ताल पर इस तरह हस्तक्षेप किया हो; इससे पहले भी सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालय आपात स्वास्थ्य सेवाओं को अनिवार्य बताते हुए हड़तालों पर रोक लगा चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसे महज प्रशासनिक सुविधा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अदालत ने डॉक्टरों को काम पर बुला लिया, पर जब तक CCMP नीति की न्यायिक समीक्षा नहीं होती, यह विवाद सुलझा नहीं है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बॉम्बे हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को क्या आदेश दिया?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को हड़ताली डॉक्टरों को लंच ब्रेक के बाद तुरंत काम पर लौटने का निर्देश दिया। अदालत ने चेतावनी दी कि काम से इनकार करने पर वेतन रोका जाएगा और मरीजों की मौत की जिम्मेदारी डॉक्टरों पर होगी।
महाराष्ट्र में डॉक्टर हड़ताल पर क्यों हैं?
महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने CCMP (सर्टिफ़िकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी) के तहत होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाएँ लिखने की अनुमति दी है। MARD और IMA का कहना है कि केवल 90 दिन के कोर्स से MBBS/MD डॉक्टरों के समकक्ष योग्यता नहीं मिल सकती और यह मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरनाक है।
CCMP क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
CCMP यानी सर्टिफ़िकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी एक 90 दिन का ब्रिज कोर्स है, जिसे पूरा कर होम्योपैथी डॉक्टर एलोपैथिक दवाएँ लिख सकते हैं। IMA और MARD का तर्क है कि यह कोर्स MBBS की पाँच साल की पढ़ाई का विकल्प नहीं बन सकता और इससे मरीजों की जान को खतरा है।
IMA की याचिका कितने समय से लंबित है?
IMA के वकीलों के अनुसार होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथी अधिकार देने के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पिछले 12 वर्षों से अदालत में लंबित है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने 3 अगस्त के सरकारी आदेश से समिति बनाई और उसके काम पूरा होने से पहले ही CCMP पंजीकरण शुरू कर दिया।
क्या हड़ताल के दौरान मरीजों को इलाज मिल रहा है?
हड़ताल के चलते म्युनिसिपल अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित हुई हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसी पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि हड़ताल के दौरान किसी भी मरीज की मौत की जिम्मेदारी डॉक्टरों पर होगी और उन्हें तुरंत काम पर लौटना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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